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Tuesday, November 24, 2020

नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी,पुलिस से की गई शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई

  



रेवांचल टाईम्स - धोखाधड़ी मे दो बालाघाट के और एक धनोरा तहसील के  हल्का नंबर 30 का पटवारी चक्रेश भौरजाल शामिल

         सिवनी - कहने को तो बेरोजगारी लोगों के लिए जी का जंजाल बनी हुए हैं और शायद यही कारण है कि हर बेरोजगार नौकरी की चाक-चौबंद में अच्छा और बुरा सब भूल जाता है और उसे लगता है कि कहीं से ही सही बस शासकीय नौकरी लग जाए और यही कारण है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के बेरोजगार नौकरी का झांसा देने वालों के चुंगल में फंस जाते हैं लेकिन वर्तमान का यह जो मामला है कुछ अलग है इसमें झांसा देनेवालो में एक पटवारी भी सामिल है जिन्होंने बालाघाट के एक युवक और युवती के साथ मिलकर धनोरा तहसील के  ही बेरोजगार युवक-युवतियों को ठगने का काम किया मामला कुछ माह पुराना है लेकिन मामले की शिकायत सितंबर 2020 को धनोरा थाने में पीड़ित बेरोजगारों ने लिखित में दर्ज कराई परंतु पुलिस ने मामले पर अभी तक ना ही खुलासा किया ना ही कोई जांच की है अब इस पूरे मामले पर पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है मामला यह था की धनोरा तहसील के पटवारी हल्का नंबर 30 में पदस्थ पटवारी चक्रेश भोरजाल ने अपने ही हलके के कुछ बेरोजगार लोगों को शासकीय नौकरी लगाने का प्रलोभन देते हुए बालाघाट के युवक-युवती मुकेश और कल्पना जिनके नाम पते शिकायत अनुसार मुकेश आगाशे पिता दुलीचंद आगाशे जाति तेली ग्राम देवगांव तहसील किरनापुर जिला बालाघाट, कल्पना ठाकरे ग्राम देवगांव तहसील किरनापुर जिला बालाघाट को शासकीय कर्मचारी बताते हुए नौकरी लगा देने की बात का हवाला देते हुए धनौरा में युवक युवतियों से धनोरा तहसील के बेरोजगार युवक-युवतियों से मिला दिया फिर क्या था बालाघाट जिले के युवक- मुकेश अगासे और युवती कल्पना ठाकरे ने धनोरा तहसील के बेरोजगारों से संपर्क किया और पटवारी चक्रेश भोरजाल के साथ अपने संबंध बताते हुए लोगों को विश्वास में ले लिया और शासकीय विभागों में नौकरी लगाने के नाम पर लाखों की ठगी कर ली गई और शासकीय पदों पर नौकरी के नाम पर फर्जी आदेश थमा दिए गए जब कुछ दिन बाद आदेश की हकीकत उजागर हुई तो उन बेरोजगारों ने अपने दिए हुए लाखों रुपए वापस मांगना शुरू कर दिया फिर क्या था मामला उजागर हो चुका था और फिर क्या बेरोजगार अपने को ठगा महसूस कर रहे थे बेरोजगार युवक-युवतियों ने पटवारी चक्रेश भोरजाल से संपर्क किया तो फिर क्या था धोखाधड़ी में शामिल पटवारी जी ने भी उन बेरोजगारों को धमकाना और पैसे वापस करने के लिए लटकाना शुरू कर दिया मजबूरन बस बेरोजगार पीड़ित युवक युवतियों ने 19 सितंबर 2020 को लिखित में शिकायत देकर धनोरा थाने में अपनी शिकायत दी परंतु शिकायत देने के बाद भी पुलिस के द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है वहीं इस पूरे मामले पर पटवारी चक्रेश भोरजाल  और थाना धनोरा की भूमिका  मित्रता बतौर नजर आ रही है।और शायद यही कारण है कि बालाघाट जिले के युवक-युवतियों और धनोरा तहसील में पदस्थ पटवारी चक्रेश भौरजाल के द्वारा शासकीय नौकरी लगाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी के मामले पर यदि पुलिस  की भूमिका ही संदिग्ध हो तो फिर क्षेत्र की जनता किस पर विश्वास करेगी पुलिस कहती है वर्दी ही नहीं हमदर्दी भी तो अब आप सहज ही अंदाजा लगा ले की पुलिस वर्दी के पीछे हमदर्दी किस पर दिखा रही है आदिवासी बाहुल्य तहसील के बेरोजगार अपनी ठगी की व्यथा अब किसे सुनाए बेरोजगार युवक युवती अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं शिकायतकर्ताओं में राजेंद्र बेलिया  राजेश बेलिया प्रेमलता परते सत्या नागदेवे राजनंदिनी इनवाती ममता कुबलवार है जिनके मुताबिक पूरी ठगी लगभग सोलह लाख रुपए की है। अब इस पूरे मामले पर जिले के आला अधिकारी आरोपियों पर और पुलिस पर क्या कार्यवाही करते हैं देखना होगा।

वहीं इस पूरे मामले पर इनका यह कहना है


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