स्कूलों ने बच्चों से फीस वसूलने के अपनाए नए-नए तरीके स्कूल बंद फिर क्यों बच्चों से वसूली जा रही है तगड़ी फीस? अभिभावक
रेवांचल टाइम्स नैनपुर- निजी स्कूलों ने छात्रों से फीस वसूली के लिए नए पैंतरे अपनाना शुरू कर दिया है। फीस देने में असमर्थ अभिभावकों पर फीस वसूली का दबाव बनाने के लिए उनके बच्चों को परीक्षा में ना बैठाने की हिदायत दी जा रही है। खास तौर पर बोर्ड कक्षाओं एवं नवी और ग्यारहवीं के छात्र छात्राओं पर इस तरह का दबाव ज्यादा बनाए ने की बात भी सामने आई है।
बता दें कि सीबीएसई और आइसीएसई बोर्ड ने इस सत्र की बोर्ड परीक्षाओं के लिए 10वीं और 12वीं के छात्र छात्राओं का पंजीकरण शुरू कर दिया है। इसके अलावा नियमानुसार नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के छात्र छात्राओं का पंजीकरण भी करवाया जा रहा है। पंजीकरण के लिए अभिभावकों को सीबीएससी और आइसीएसई की तय फीस तो देनी ही पड़ रही है। लेकिन कुछ अभिभावक जिन्होंने असमर्थता के कारण लॉकडाउन लागू होने के बाद से फीस पूरी जमा नहीं करवाई है। ऐसे अभिभावकों पर निजी स्कूलों ने पूरी फीस एक साथ जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। कुछ स्कूलों में फीस जमा न करवाने पर बोर्ड परीक्षाओं के लिए छात्र-छात्राओं का पंजीकरण ना करवाने की हिदायत देने की बात भी सामने आई है। ऐसे में आर्थिक रूप से तंगी झेल रहे अभिभावक खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कोरोना के चलते कक्षा 1 से 8वी तक की कक्षाओं के 31 दिसंबर 2020 तक बंद रखा जाएगा तो बच्चे की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ेगा। ऑनलाईन क्लास का भी कोई मतलब नहीं है। क्योंकि ऑनलाइन क्लास में टीचर द्वारा पढ़ाया नहीं जा रहा है। ऑनलाईन क्लास के नाम पर सिर्फ होमवर्क से दिया जाता है।
जबकि ऑनलाइन क्लास टीचर द्वारा 02 से 03 घंटा ज़ूम ऐप या अन्य ऐप के माध्यम से लिया जाना होता है परन्तु नैनपुर के प्राइवेटस्कूलों में ऐसा नहीं हो रहा है।
वर्तमान में प्रायवेट स्कूल के माध्यम से जुलाई माह से अभी तक की पूरी की पूरी फीस वसूली जा रही है।
साथ ही पालक से कहा जा रहा है कि यदि फीस जमा नहीं करोगे तो अर्ध वर्षिक परीक्षा नहीं देने दिया जाएगा।ओर जनरल प्रामोट भी नहीं किया जाएगा।
अब बताए की बच्चे को पढ़ाई के नाम पर कुछ नहीं पढ़ाया गया ओर फीस पूरी वसूली जा रही है। यह क्या है।
बीच में वहीं टीचर घर घर जाकर बच्चो के घर से सहयोग राशि भी ली गई की उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है।
अब बताए की स्कूल प्रबंधन एक माह कि फीस 450 से 700रुपए तक की फीस प्रतिमाह की दर से जुलाई से नवंबर माह तक पूरी मांग रहे है। अब गरीब पूरी फीस कैसे दे ओर वह भी स्कूल वाले पालक से ट्यूशन फीस के नाम से मांग रहे है।
क्या यह उचित है। यह तो तानाशाही हुई न गरीब बच्चो को बमुश्किल है पढ़ा पा रहा है उसके बाद इतना भर इकट्ठा पालक के सर पर रखना कहा तक उचित है।न सेवा ओर न शिक्षा पर फीस पूरी।
वही जन माँग की इस ओर प्रशासन कृपया अपना ध्यान आकर्षित कर अवैध वसूली पर रोक लगाए।
रेवांचल टाईम्स से महेन्द्र विश्वकर्मा की रिपोर्ट

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