रेवांचल टाइम्स - जिले भर में गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भारत ही नही अपितु समूचा विश्व 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है। देश के प्रत्येक कोने में नुक्कड़ अभियान, रैलियां, पोस्टर-मेकिंग और भाषण जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 को जन्मे महात्मा गांधी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। कानून के छात्र के रूप में शुरू किया गया जिवन उनकी यात्रा परीक्षणों और उथल-पुथल से भरी रही। इस दिन, स्कूल छात्रों में नेतृत्व, सादगी, अखंडता के मूल्य को विकसित करने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। देशभक्ति की भावना को जोड़ने के लिए छात्र भारी संख्या में भाग लेते हैं,किंतु कोरोना महामारी को द्रष्टिगत रखते हुए गांधी जयंती एंव भुतपुर्व प्रधानमंत्री स्व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती को सादगी के साथ मनाया गया।_
इसी परिप्रेक्ष्य में विकासखंड लांजी के ग्राम बेनेगांव में युवा नेता रवि नारनौरे के नेत्रत्व में तथा वरिष्ठ ग्रामिणों के मार्गदर्शन में देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एव लाल बहादुर शास्त्री की जयंती को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप मे सादगीपुर्ण रवैये के साथ ग्राम पंचायत भवन मे मनाया गया।इस दौरान युवाओं एंव ग्राम पंचायत के कर्मचारियों के द्वारा सर्वप्रथम गांधी जी एव शास्त्री जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजली अर्पित की गई,एव बारी बारी से उपस्थित जनमानस के द्वारा पुष्पअर्पण कर याद किया गया।
व्रक्षारोपण का किया पूनित कार्य
युवा संगठन बेनेगांव के द्वारा गांधी जयंती के अवसर पर व्रक्षारोपण का कार्य किया गया। बागवानी में आयुर्वेदिक औषधीय पौधे, फलदार , छायादार, इमारती एव दिखावटी पौधे लगाए गये। इससे यह स्पष्ट होता है कि आज का युवा भुतकाल की याद को ताजा रखने एव उस सम्मा को जलाए रखने के लिए अपने ग्राम के विकास के प्रति नई सोच को बरकरार रखने के लिए नित नए आयाम निर्धारित कर भावी पीढि के लिए बेमिसाल यादें छोड़ रहे है। व्रक्षारोपण पश्चात युवक रवि नारनौरे ने कहा कि गांधी जयंती के अवसर पर आज हमारे द्वारा व्रक्षारोपण का कार्य किया गया,और हमारे द्वारा सभी पौधों की समय समय पर देखभाल की जाएगी। एसे अवसर पर हमे जनहित एव प्रक्रती के हितैषी बनना चाहिए,हमारे आज के इस कार्यक्रम के लिए सभी प्रत्यक्ष एव अप्रत्यक्ष सहयोगियों का धन्यवाद करता हूं। वही ग्रामिणों ने भी गांधी जी के जनजिवन से जुडी़ घटनाओं का बखान किया।
सराहनीय योगदान मे युवा एव वरिष्ठ ग्रामवाशी
ग्राम के प्रति नई सोच रखने वाले युवा रवि नारनौरे ,नेमेष बुढ़ावने, ओमेश बुढ़ावने ,नरसिमा चिल्ले ,हरेंद्र बुढ़ावने, हमेंद्र बुढ़ावने, प्रदीप कस्बे, अंकुश बावनकार, लतीश उके ,मुकेश आवरे ,निकेश फरकंडे, पराग उके, विनोद महेश्वरे, विजय नारनौरे, रोशन नारनौरे ,कृष्णा नारनौरे, कृष्णा बुढ़ावने, प्रहलाद करसायल ,शिव बुढ़ावने, राकेश बुढ़ावने, दीपक उके, राहुल आवरे, राजू सिरसे, शुभम बावनकर, शुभम गजभिये, राकेश गजभिये, अजय कबीरे ,उमेश ओके, दीपेश बुढ़ावने, नरेश आवरे, उमेश उके,तथा वरिष्ठजन ग्रामवासी रामचंद बावनकर, राजाराम धारणे, संतोष आवरे, बिनिराम उके, बालू खोब्रारागड़े ,राजेंद्र मेश्राम, कुलेश शक्करपुड़े, रेखा बाई शक्करपुड़े, डिलेश्वरी बाई भरद्वाज की गरिमामयी उपस्थिति रही।
रेवांचल टाइम्स बालाघाट से खेमराज बनाफरे की रिपोर्ट।


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