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Wednesday, September 2, 2020

एक खाते में दो बोरी मिल रही खाद किसान परेशान दाम भी नही है निश्चित




  रेवांचल टाइम्स - कहने को तो हमारा देश कृषि प्रधान देश है लेकिल सबसे जादा आज किसान ही परेशान है।
खाद व बीज किसानो को न मिलना, बिक्रय किये गये आनाज की कीमत समय पर न मिलना, बीमा व  फसल नुकसान राशि न मिलना जेसे अनेक परेशानीयो से किसान हमेशा से परेशान होता आ रहा है। एक तरफ अतिवृष्टि व हवा तुफान से मक्के की फसल जमीन में गिर गई है जिससे किसानों का काफी नुकसान हो गया है। दूसरी तरफ धान की फसल को खाद की अतिअवशयकता है पर किसानो को खाद न मिलने से धान की फसल से नुकसान होना बताया जा रहा है। अभी तक किसानो ने 400 रूपये प्रति बोरी तक खाद खरीद कर अपना काम चलाया है। "सैंया भए कुटवार तो डर काहे का के तर्ज पर कृषि विभाग व खाद बिक्रेता इनदिनों कार्यकर रहे है" कलेक्टर मंडला श्री मति हर्षिका सिंह के निर्देशन मे गत दिनो एसडीएम नैनपुर व मंडला से आये अधिकरियो के द्वारा कुछ खाद बिक्रेताओ की दुकान व गोदाम की चांज की गई। कलेक्टर के मार्ग दर्शन में कृषि विभाग के कर्मचारियों की उपस्थिति में निर्धारित दर पर  मात्र दो बारी खाद मिलन रही है जो पर्याप्त नही है।
 (खाद बिक्रेताओ के दस्तावेज व गुप्त गोदामो की हो जांच)
नैनपुर विकास खण्ड में 17 खाद दुकान फिर भी किसानों को नही मिल रही खाद*

     कहने को तो मंडला बिछिया,नैनपुर,मोहगांव, घुघरी, निवास, मवई, में खाद की अनेक  दुकाने, है और  पिंडरई में 2 दुकाने, डिठौरी में 2 दुकाने, चिरईडोगरी 2 दुकाने निजी व समीतियों की संचालित है। साथ ही लेम्स नैनपुर , पिंडरई, डिठौरी , जामगांव, चिरईडोगरी से भी किसानो को  खाद  मिलना निर्धारित है। इसके बाद भी खाद की पूर्ती कृषि विभाग के अधिकारी नही करा पा रहे है यह बडा दुर्भाग्य पूर्ण है। आखिर खाद किसे ओर कब कहा मिल रही है। कितनी खाद नैनपुर भंडार ग्रह में आई ओर प्राईवेट डीलरो से कितनी खाद प्राप्त हुई यह जांच का विषय है।

*कृषि विभाग के नियंत्रण में बाटी जा रही खाद*
 कलेक्टर श्रीमति हर्षिका सिंह के आदेशो के बाद अब कृषि विभाग के आला अधिकारी गेहरी नींद से जागे है ओर अब सामने से प्रत्येक किसान को 2 बोरी खाद दिला रहे है। जो फसल के लिये पर्याप्त नही है। इसके पूर्व अधिक दामो में खाद लेना किसानो की मजबूरी बन गई थी। खाद विक्रेताओ ने अपने मनमाने तरीके से अपने दामो मे 400 रूपये से लेकर 600 रुपये प्रतिवोरी तक खाद बेची जा रही है। उस समय कृषि विभाग के आला अधिकारी खाद विक्रेताओ को चांदी के चन्द सिक्को के कारण सहयोग करते आ रहे थे ओर अब दो बोरी खाद किसानो को दी जा रही है। जिससे किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है।


*कृषि विभाग का नही है खाद विक्रेताओं पर नियंत्रण*
         म. प्र. शासन के आदेशो के अनुसार पोस मशीन में थम लगाकर खाद बेचने के आदेश निर्देश दिये गये है पर किसी भी खाद बिक्रेताओ के पास कोई मशीन संचालित नही है। बगैर किसी दस्तावेज रिकार्ड के खाद  बिक्रेता किसे खाद बेच रहे है कितनी बेच रहे है किस मूल्य पर बेच रहे है  यह सब जांच करना कृषि विभाग के अधिकारी की जिम्मेदारी है किन्तु बिक्रेताओ से भाईभतीजा बाद बनाये रख सब गोलमाल कर खाद बिक्रेताओ को सहयोग करते आ रहे है। एक एक खाद बिक्रेताओ के दस्तावेजो व अलग अलग भंडारण गोदामो की जांच कर ली जाये तो खाद बिक्रेता दूसरे दिन खाद का  लाइसेंस केंसिल कराने अपना आवेदन दे देगा। खाद बिक्रेताओ को  प्राइवेट डीलर से खाद प्राप्त होती आ रही है ओर कुछ दुकानदारो को नैनपुर भंडारग्रह से इसके बाद भी किसानों को खाद न मिलना समझ से परे है। अनेक जगहों में ऐसे लोग भी खाद बेच रहे जिनके पास लाइंसेंस भी नही है और कार्यवाही करने वाला विभाग हाथ मे हाथ धरा बैठा हुआ है और बेचारे किसान परेशान हो रहे और शिकायत करें भी तो किस्से।
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