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Wednesday, September 16, 2020

किसान विरोधी अध्यादेश के खिलाफ जिला मुख्यालय में उमड़ा जनसैलाब


राष्ट्रीय किसान मजदुर महासंघ किसान विरोधी नीतियों के खिलाफशांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से आखिर क्यों डरी सरकार?

रेवांचल टाइम्स - किसान विरोधी अध्यादेश के खिलाफ जिला मुख्यालय में उमड़ा जनसैलाब लगी धारा 144 के बाद भी जिला मुख्यालय में भारी संख्या में एकत्रित हुए किसान जिसे देख प्रशासन ने नहीं दी रैली की अनुमति लगाई धारा 144 आखिर वजह क्या?- किसान विरोधी अध्यादेश के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से आखिर क्यों डरी सरकार?-
         चुप्पी साधने वाले विधायकों सांसदों से भी पूछा जाएगा सवाल आखिर अध्यादेश रूपी इस काले कानून के खिलाफ सदन में क्यों नहीं उठाते आवाज-
             राष्ट्रीय किसान मजदुर महासंघ किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एवं अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विगत 1 पखवाड़े से जिले में निरंतर धरना रैली और विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम कर रहा था, अंत में पूरे जिले के विकासखंड, ब्लॉक ,सेक्टर, तहसील ,प्रखंड ,ग्राम आदि मिलाकर संयुक्त रूप से दिनांक 14 /9/ 2020 को सिवनी मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन कर रैली आयोजित करने का कार्यक्रम था।जिसके अंतर्गत  सिवनी मुख्यालय के समीपस्थ लुघरवड़ा में स्थित कृष्णा लान में दोपहर 12 बजे से जिले भर के किसानों हेतु आवश्यक विचार -मंथन बैठक अध्यदेश के विरोध में  चर्चा हेतु रखी गई थी जिसमे प्रदेश नेतृत्व की उपस्थिति में 'प्रदेश अध्यक्ष'- रवि दत्त , 'प्रांतीय संगठन मंत्री' -धनसिंह ठाकुर,'संभागीय मंत्री'-रमाशंकर पटेल सहित 'जिला अध्यक्ष'- प्रीतम ठाकुर, 'जिला उपाध्यक्ष'- राजेश सोलंकी ,'जिला उपाध्यक्ष'- रामनाथ राय -'जिला संगठन मंत्री'- तुलाराम डेहरिया,जिला युवा इकाई के 'अध्यक्ष'- शुभम दयाल पटेल ,सिवनी ब्लॉक के 'अध्यक्ष'- डॉक्टर नरेंद्र ठाकुर 'मीडिया प्रभारी'- महेंद्र मोनू राय राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ आदि वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ हमारी जिला, ब्लॉक ,सेक्टर, और ग्राम इकाइयों की उपस्थिति थी जिले के अन्नदाता किसान -मजदूर साथी भारी संख्या में उपस्थित होकर किसान विरोधी अध्यादेश को वक्तव्य के माध्यम से समझकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ को समर्थन हेतु आये थे,लान में बैठक के बाद झंडे बैनर के साथ अनुशासित रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन करने का कार्यक्रम था जिस हेतु  जिले भर के किसान भारी संख्या में दोपहर 12:00 बजे से ही जुटना शुरू हो गए थे कृष्णा लान का प्रांगण किसानों और मजदूर साथियों से खचाखच भरा हुआ था
      जिसकी भनक प्रशासन को लग गई  जिसने  आनन-फानन में  सिवनी पुलिस को कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना किया प्रशासन के अमले ने कार्यक्रम स्थल में पहुंचकर रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन करने से मना कर दिया पूछने पर बताया गया की जिला दंडाधिकारी कलेक्टर महोदय ने तत्काल प्रभाव से धारा 144 लागू कर दी है अतः आप रैली नहीं निकाल सकते जो भी कार्यक्रम आपको करना है लान के अंदर ही करें यह कहकर भारी संख्या में अमला वहां पर मौजूद रहा जो कि कार्यक्रम के अंत तक नजर गड़ाए हुए था हमारे राष्ट्रीय किसान मजदुर महासंघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष जी ने कार्यक्रम स्थल पर ही रैली घुमाकर सड़क मार्ग के किनारे अध्यादेश का पुतला दहन करने का निर्णय लेकर  ऊर्जा और जोश के साथ नारे लगाकर  कार्यक्रम संपन्न कराया सिवनी के नगर और आसमान को नारों से गुंजायमान कर किसानों ने कृषि अध्यादेश के पुतले का दहन किया

प्रांगण कि विरोध रैली मेंकिसान एकता, मजदूर एकता जिंदाबाद , कौन बनाता हिंदुस्तान भारत का मजदूर किसान, जो हमसे टकराएगा भूखा ही मर जाएगा ,किसान मजदूर भाई -भाई मिल कर लेंगे पाई पाई, हम अपना अधिकार मांगते नहीं किसी से भीख मांगते ,राष्ट्रीय किसान मजदूर महा संघ जिंदाबाद
       आदि अनेक नारे ऊर्जा के साथ किसानों ने लगाए। परंतु सवाल इस बात का है कि हम सभी इस देश के अन्नदाता अपनी जायज मांगों को लेकर शांति पूर्वक विरोध कर रहे हैं तथा किसान, कृषि विरोधी अध्यादेश को वापस लेने की मांग कर रहे हैं जो कि पीएमसीमें केंद्र सरकार ने बदलाव किया है जिससे किसानों को अपनी फसल को बेचने में परेशानी और नुकसान का खामियाजा भुगतना पड़ेगा,एक देश एक बाजार की व्यवस्था से किसानों की फसलों के दाम गिरेंगे क्योंकि खरीदने की प्रतिस्पर्धा नही रहेगी,और जमाखोरी की रोक हटने पर कालाबाजारी आएगी जिससे देश मे महंगाई बढ़ेगी आम जनता का जीवन आर्थिक संकट से घिर जाएगा जीना दुभर हो जाएगा
   इन मांगों को लेकर किसान शांति पूर्वक अपनी बात रख रहे हैं तो फिर सरकार  इन बातों को मांगों को क्यों नहीं सुन रही ,क्या इनकी मंशा इस देश का पेट पालने वाले अन्नदाता के सहयोग करने कि उसे बढ़ाने की नहीं है ? या फिर चुपके से,  पीछे के दरवाजे से अध्यादेश लाकर कृषि और किसान का समूल विनाश किया जाए क्या ऐसा षड्यंत्र है ? ,क्या चंद पूंजीपतियों को कृषि क्षेत्र से लाभ देने का यह षडयंत्र पूर्वक फैसला है? हम अपनी मांगों को सभी किसान शांतिपूर्वक ढंग से रख रहे है सरकार को सुननी चाहिए क्योंकि हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधि सदन के अंदर सांसद और विधायक बैठे हैं जो कि स्वयं बहु संख्या में  किसान पुत्र भी हैं  परंतु अफसोस  वह भी कुछ नहीं कर रहे और सरकार भी नहीं सुन रही है प्रशासन के माध्यम से हमारे कार्यक्रमों को रोक रही है तो कहीं ना कहीं इनकी नियत में खोट समझ में आ रहा है हम भी सरकार को चेताना चाहते हैं कि अभी गांव ,कस्बों और तहसीलों से लेकर यह जिले स्तर तक विरोध था अगर किसान विरोधी काला कानून वापस नहीं लिया गया ,हमारी बात नहीं सुनी गई  ,लागत मूल्य का निर्धारण कर समर्थन मूल्य में खरीदी नहीं की गई तो महासंघ राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उग्र आंदोलन करेगा 
     साथ ही केंद्र बीमा राशि के तत्काल भुगतान कराये ,क्योंकि बीमा कंपनियां प्रीमियम की राशि एक निश्चित समय पर काट लेती हैं परंतु नुकसान होने पर एक निश्चित समय पर बीमा राशि  का आवंटन नहीं हो पाता  जिससे  किसान ठगा महसूस करता है व वर्तमान वर्षा ऋतु में  हुई अतिवृष्टि  के कारण किसानों की फसलों एवं घरों के क्षतिग्रस्त हो जाने की भी  राहत राशि और बीमा क्लेम दिया जाए ,समर्थन मूल्य में पूर्व में की गई गेहूं एवम धान की खरीदी का बोनस की राशि भी तत्काल किसानों को प्रदान की जाएं उक्त आदिमांगे  जिले के किसान की ओर से शामिल की गई और इसी तरह
 किसान हित में राष्ट्रीय किसान मजदुर महासंघ  उनके अधिकार और हक की लड़ाई में हमेशा  साथ देता रहेगा
      कार्यक्रम में भारी संख्या में माताएं बहने भी मौजूद रही किसानो का सहयोग रहा एवं सारे कार्यक्रम में विरोध प्रदशर्न को नगर वासियो का भरपूर समर्थन मिला #जय जवान,जय किसान#
        हमारे द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि की चुप्पी पचाने योग्य नहीं है अगर इन्होंने हमारे हित की पैरवी विधानसभा और लोकसभा में नहीं की तो इनका भी विरोध किया जाएगा और आगामी चुनाव में सबक सिखाया जाएगा।*

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