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Wednesday, July 1, 2020

मंडला: यहाँ है पन्नी की छत वाला सरकारी ऑफिस, न कंप्यूटर, न नेट, न बिजली..-शर्मनाक

खण्ड शिक्षा विभाग चल रहा है पन्नी के नीचे छत से टपक रहा पानी।             पॉलीथिन लगाकर किया जा रहा है अपना ओर दस्तावेजो का बचाव   आदिवासी क्षेत्र में मूकदर्शक बनकर बैठे है अधिकारी व जनप्रतिनिधि 



      रेवांचल टाइम्स - मवई जो कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है जहाँ पर आदिवासियों के विकास एवं शिक्षा के लिए सरकार के द्वारा अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रही वही हर वर्ष करोड़ो रूपये खर्च किये जाते है परन्तु ये पैसे कहाँ कैसे खर्च किये जाते है आज तलक किसी को भी पता नही है यहाँ आदिवासियों के भविष्य को सुधारने के लिए अनेको योजनाओं को भी इस क्षेत्र में नाम मात्र के लिए ही लागू किया जाता है शिक्षा का मंदिर कहलाने वाले विद्यालय ओर उन्ही विद्यालय को संचालित करने वाला दफ्तर आज खुद ही सुविधाओ से वंचित नजर आ रहा है न ही सुरक्षित छत है ना कम्प्यूटर ऑपरेटर ओर न ही बिजली औऱ न इंटर नेट सुविधा शिक्षको के वेतन और शासकीय कार्य करने के लिए मंडला जा कर काम करना पड़ता है और आने जाने का ठिकाना केवल भगवान भरोसे ही नजर आता है ये दफ्तर वर्षो से इस कार्यालय की स्थिति बहुत ही दयनीय ओर निंदनीय हो गयी है वही आज बारिश के मौसम में शिक्षा विभाग के सरकारी दफ्तर से पानी टपक रहा है। लगातार बारिश के कारण वर्षों पुराने सरकारी कार्यालय और निर्माण जवाब देने पर आतुर हो गए है  इन पर बाजार से पन्नियां खरीदकर बिछाई जा रही है। जिससे कि पानी से बचाव किया जा सके। यहां छत के हिस्से में पुराने तरीके से कबेलू बिछाए गए हैं, जिनके भीतर से रिसकर पानी कार्यालय के भीतर पहुंच रहा है।
वही खण्ड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ऐसा हर साल होता है। कई बार तो जरूरी कागजात भी पानी से गीले हो जाते हैं। यहां भी वर्षों पुराने भवन में कार्यालय संचालित है। जिसकी छत जर्जर हाे चुकी है और दीवारों में सीलन आ गई है। छत से बारिश में निरंतर पानी टपकता रहता है। पूरा परिसर बारिश के पानी से गीला बना रहता है। यहां कार्यरत कर्मचारियों को इस समस्या के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ओर तो ओर न ही इस दफ्तर में कोई भी कम्प्यूटर ऑपरेटर ना ही बिजली का कोई भी ठिकाना इस दफ्तर में बिजली भी आंखमिचौली का खेल खेलती नजर आती है
 अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में कई बार जिम्मेदार अधिकारियों तक इसकी बात पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन कोई सुधार नहीं हो पाया।
हर साल सरकारी भवनों की मरम्मत तो की जाती है। जहां शिकायत मिलती है वहां प्राथमिकता से मरम्मत का कार्य किया जाता है। लेकिन ये मरम्मत भी नाम मात्र की ही होती है इस भवन में न तो उच्चाधिकारियों की नजर जाती है ना ही अपने आप को दिग्गज जनप्रतिनिधि कहे जाने वाले नेताओ अपने आप को नेता कहने वाले ये जनप्रतिनिधि केवल मूक दर्शक होकर तमाशा देखते नजर आ रहे है जबकि पूरा मंजर इनके आखो के सामने नजर आ रहा है ऐसा लगता है कि इन्हें भी शिक्षा के पावन मंदिर के कार्यालय से कोई लेना देना है  यदि इस भवन को जल्द से जल्द वहाँ से स्थान्तरित नही किया गया तो आने वाले समय मे किसी भी प्रकार की कोई भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है।
   
                    इनका कहना है कि
  मवई के हालात बहुत ही खराब है और आये दी लाईट नही रहती न ऑपरेटर बहुत ही अवस्था है शायद इस लिये यहा कोई अधिकारी कर्मचारी नही आना चाहता ओर हमने अनेक वार वरिष्ट अधिकारीयो ओर जनप्रतिनिधियों को इस समस्याओं से अवगत कराया गया पर कोई ध्यान नही देते है जैसे तैसे काम चल रहा है और काम करना मजबूरी है।
          खण्ड शिक्षा अधिकारी मवई
                   एस एच परते

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