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Thursday, July 2, 2020

जबलपुर को क्या मिला ? 'बाबाजी का ठुल्लू'



चैतन्य भट्ट 

क्या क्या सपने देख रहे थे जबलपुर के लोग, कि अबकी बार शिवराज  सिंह के मंत्रीमंडल में जबलपुर के एक दो नेताओ को तो मंत्री बनने का मौक़ा जरूर मिलेगाl कमलनाथ  सरकार  में दो दो 'केबिनेट मंत्री' जबलपुर से ही थे तो बीजेपी भी बेलेंस बनाने के लिए दो मंत्री न सही एक केबिनेट मंत्री तो जबलपुर को देगी पर मंत्री मंडल के विस्तार के बाद अब फिल्म ' निकाह' का एक गाना याद आ रहा है 'दिल के अरमा आंसुओं में बह गए'l  कब से इन्तजार था मंत्रीमंडल के विस्तार का, जबलपुर के नेताओं  और मतदाताओं के अलावा नेताओं के  'लग्गू भग्गू'  भी पूरी तैयारी में थे कि जैसे ही 'भैया' मंत्री बनेगे अपन  जोरदार  'शोभा यात्रा' निकालेंगे,  'जय जय कार' के नारे लगाएंगे, हजारों      फटाखे जला कर अपनी ख़ुशी  का इजहार करेंगे पर एक ही झटके में  सारे के सारे  अरमान धरे के धरे रह गएl अब    बेचारे  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह करें भी तो क्या करें  वे तो चाहते थी कि उनके दो चार  ख़ास भी मंत्री बा न जाए पर ऊपर वाले  मानें  तब न, जो लिस्ट बेहतरीन टाइप करके ले गए थे एक मिनिट में केंसिल कर दी ऊपर वालों नेl खूब मंथन किया मुख्यमंत्री जी ने की कोई 'जुगाड़'  फिट हो जाए अपने खास लोगो के लिए, पर ऊपर वाले तो ऊपर वाले है साफ़ साफ़ कह दिया कि पहले उनको सम्भालो जिनकी 'दम' पर फिर से मुख्यमंत्री बने हो, यदि वे नाराज हो गए तो एक मिनिट भी नहीं लगेगा  'कुर्सी' नीचे से खिसकने में,  इसलिए पहले उनको 'छांटबीन' लेने दो फिर जो बचेगा वो  अपन लोग बाँट लेंगें  और यही हुआ l  सिंधिया जी के तमाम लोग मंत्री बन गए  और  बीजेपी के नेता मुंह ताकते रह गए l  वैसे जबलपुर के लोगो को इसलिए भी  नाराज  नहीं  होना  चहिये क्योंकि जबलपुर को पिछले मंत्री मंडल में भी कुल जमा एक 'राज्य मंत्री' ही तो मिला थाl जबलपुर का तो इतिहास है कि यहां से  'द्वारिका प्रसाद मिश्रा'   के बाद से आज तक न कोई 'मुख्यमंत्री'  बन पाया न 'केन्दीय मंत्री'l असल में इसके लिये  'दम'  चाहिए होती है और  'दम' के मामले में जबलपुर के लोग और नेता दोनों 'फिसड्डी' है भले ही पूरे शहर में  लाखों 'गुरु' 'बड़े' 'बड्डे' घूम  रहे हों  पर जब मौका आता है तो वे 'चेला' बन कर  रह जाते हैं  जलवा तो है 'सागर' का चार  चार मंत्रीl 'सागर' से ही कुछ सीख  लो जबलपुर के नेताओ, 'बखत' बनाओ तभी कुछ मिल पायेगा वरना  हमेशा  की तरह जबलपुर को 'बाबाजी का ठुल्लू' के अलावा और कुछ नहीं मिल पायेगा ये बात तो तय हैl

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