रेवांचल टाइम्स मंडला - आदिवासी बाहुल्य जिला जैसे क्षेत्र में एक ही पद पर लगातार एक ही जगह पर कार्य कर भारी अनियमितता कर भ्रष्टाचार किया गया हैं। आख़िर क्यो नही हो रहा तत्कालीन खण्ड शिक्षा अधिकारी का मोह भंग बी ई ओ पद से वही नवागत बीईओ एसके जाटव पदस्थ होते ही भ्रष्टाचार की परतें खुलती नजर आ रही हैं। जिनको हटाने के लिए आजाद अध्यापक संघ का सहारा लेकर अनावश्यक रूप से धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपने जैसी कार्यवाही कर निर्वाचित जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन को भ्रमित किया जा रहा हैं।पूर्व बीईओ आतमजीत सिंह अहलूवालिया के द्वारा बिछिया बीईओ के पद पर 13 साल तक एक ही जगह पदस्थ रहने के बाद उनका मोह भंग नहीं हो रहा हैं।जरा सोचो आजाद अध्यापक संघ जनप्रतिनिधि जन समर्थन क्यों कर रहें हैं, आप लोगों का क्या स्वार्थ हैं,नये अधिकारी से इतना भय क्यों लग रहा हैं।अभी-अभी तो पद भार ग्रहण किए हैं।फील्ड से वाकिफ भी नहीं हुऐ और धमकी क्यों दी जा रही हैं।शिक्षकों को बरगलाया क्यों जा रहा हैं,पूरी ब्लॉक में देखो शिक्षक विहीन शालाएं हैं कहीं पे नियुक्ति कहीं,से वेतन दिया जा रहा हैं। सीनियर को हटाकर जूनियर को प्रभार देना, फिर गोल-माल का खेल करना लगभग 13-14 वर्षों से यही चल रहा हैं।
छात्रावासों में चल रही मनमर्जी
निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के दबाव में अधिकारियों के द्वारा अधीक्षकों की नियुक्ति करना,एक ही छात्रावास में 07-08 वर्षों से जमे शिक्षकों को स्थानांतरण ना करना, अपने मातहथों को सकेल कर रखना,वक्त आने पर ढाल के रूप में उपयोग करना।जिसका जीता जागता उदाहरण अभी-अभी सबके सामने आया हैं।गरीब की योजना से भ्रष्टाचार करने वाले व जिला को खोखला करने वाले अधिकारियों का जब भंडाफोड़ हो रहा हैं तब कुछ संघ वाले धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपकर बचाने की कोशिश क्यों की जा रहीं हैं।कहीं ना कहीं उनका भी कोई स्वार्थ तो नहीं हैं,कारण जो भी हो,पर नया अधिकारी आएगा निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम करेगा।जब वो अपने पद के प्रति समर्पित होकर इमानदारी से काम करने की कोशिश कर रहें हैं तो उनको धमकी और हटाने के लिए कई हथकंडे रचे जा रहे हैं।
जैसे राजा वैसी प्रजा या,अंधेर नगरी,चौपट राजा
बिछिया विकासखंड के आजाद अध्यापक संघ का क्या स्वार्थ हैं जो अधिकारी अच्छा काम कर रहा हैं तो उन्हें हटाने के लिए कहीं ना कहीं उनका स्वार्थ तो नहीं हैं। अगर नहीं हैं तो उन्हें इस पचड़े में क्यों पड़ रहें हैं। श्री मेश्राम रिटायर हो गए हैं सरकारी कमरा रिक्त करने का अभ्यावेदन दे चुके हैं,सेवा निवृत्त होने के बाद मिलने वाले सारे स्वत्वों का भुगतान हो चुका हैं।पूर्व बीईओ का बिछिया से मोह भंग क्यों नहीं हो रहा हैं।इतने लंबे वर्षों से बिछिया में रहकर कार्य कर रहें थे,आपको दो बड़े-बड़े विद्यालयों का प्राचार्य का दायित्व दिया गया हैं,वहां कार्य करें और नया कार्य करके अपनी प्रतिभा व कौशल को उजागर करना चाहिए। आप के कार्यकाल में छात्रावासों,विद्यालयों की स्थिति ठीक नहीं चली, सब भगवान भरोसे ही चली हैं। पूर्व बीईओ को श्री जाटव जी से डरने की जरूरत क्या हैं।श्री जाटव अपना काम कर रहे हैं और पूर्व बीईओ को अपना काम करना चाहिए जो उन्हें दायित्व सौंपा गया हैं,शिक्षकों को अपना काम करना चाहिए,जिला प्रशासन, सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, शिक्षक समिति के सभापति से शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए वर्षों से पदस्त विकास खण्डों से दूसरे विकास खण्डों में बीईओ का स्थानांतरण कर देना चाहिए।
जिससे ऐसे अधिकारी राजनीति करके अपनी दादा गिरी ना चला सकें।
जनप्रतिनिधियों को अपना काम करने दें, अधिकारी कर्मचारी सिर्फ अपना काम करें ना कि निज स्वार्थ में लगे रहे।शासन प्रशासन के नियमानुसार अधिकारी कर्मचारियों को अपने दायित्व का निर्वाहन करना चाहिए।
ना काहू से दोस्ती,ना काहू से बैर
जो साफ स्वच्छ छवि का अधिकारी होता हैं उसे डरने की जरूरत नहीं होती।जो अधिकारी गलत कार्य करके डर रहा हैं वह अन्य संघ को ढाल बनाकर धरना प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम करवाकर ईमानदार अधिकारी के विरुद्ध षडयंत्र रचा जाता हैं।जिला प्रशासन को चाहिए की बिछिया बीईओ कार्यालय में उठकर-पटक चल रहीं हैं उसकी निष्पक्ष जांच करा दिया जाए तो सब सच सामने आ जाएगा और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।


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