सिवनी- कोरोना वायरस को लेकर भले ही शासन प्रशासन और जनता लापरवाह हो पर मैदानी शासकीय कर्मचारी कोरोना वायरस संक्रमण महामारी को लेकर सतर्कता बरतने के साथ साथ भयभीत भी है । अपने घरो की ओर लोट चुके अधिकांश प्रवासी मजदूर अलग -अलग प्रदेशो से लोट चुके हैं ।
वहीं जनता शासन प्रशासन की ढील के बाद से लापरवाह हो कर बेख़ौफ घूम रही हैं। राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला शासन प्रशासन के निर्देशों का पालन करनेऔर कराने में लगा है ।
शासन का राजस्व अभियान
कोरोना महामारी संक्रमण से देश प्रदेश और गांव -गांव तक हालात ठीक नहीं है। लोगो के सामने रोजगार की एक बडी समस्या खडी हो गई है। वर्तमान समय किसानों के लिए फसल बुआई करने का है और जनता पिछले तीन माहो के लॉकडाउन के कारण कई तरह के संकटो से झूझ रही है। किसानो के लिए वर्तमान मौका फसल बुआई का और सरकार की मानो तो यही समय सरकार का राजस्व अभियान किसानो के लिए बडी सौगात लेकर आया है। जिसमे राजस्व एंव पंचायत अमला डोरटू डोर अपने क्षेत्रान्तर्गत नामांतरण और बटवारा जैसे मामलो के आवेदन लेकर आरसीएमएस पर जमा करायेंगे। जहां पंजीकृत प्रकरणो का निराकरण मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 एंव लोक सेवा गारण्टी अधिनियम मे उल्लेखित निर्धारित समय सीमा में सुनिश्चित किये जाने का प्रावधान है जिसमे अविवादित नामांतरण प्रकरण 30 दिवस , विवादित नामांतरण प्रकरण 180 दिवस एंव अविवादित बटवारा प्रकरण 90 दिवस समय सीमा निर्धारित की गई है। जिसमे निराकरण का क्षेत्राधिकार राजस्व न्यायालय मे ही किया जाना है।
पिछले अभियान के नहीं हुये सतप्रतिशत निराकरण
फरवरी महीने में शासन के द्वारा आपकी सरकार आपके द्वार अभियान चलाकर किसानों के नामांतरण बंटवारा संबंधी आवेदन भी गांव गांव अभियान चलाकर लिए गए थे आपकी सरकार आपके द्वार अभियान के तहत राजस्व विभाग और पंचायत विभाग के द्वारा ऐसे आवेदन लिए गए थे जो आविवादित थे अभियान में उपस्थित जनप्रतिनिधि और ग्राम वासियों के समक्ष आवेदनों के प्रकरणो का विवादित और आविवादित की स्थिति का मौके पर ही चयन करने के बाद आविवादित प्रकरणों को सीधे आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज कराया गया था जिसमें भी समय सीमा निर्धारित की गई थी
परंतु किसानों के द्वारा दिए गए आवेदनों और राजस्व विभाग और पंचायत विभाग के द्वारा संकलित किए गए आविवादित नामांतरण बंटवारा प्रकरणों का सत प्रतिशत निराकरण राजस्व न्यायालय से नहीं हो पाया है और एक बार फिर सरकार राजस्व शिविर के माध्यम से नामांतरण बंटवारा संबंधी अभियान चलाकर आवेदन किसानों से राजस्व और पंचायत विभाग के माध्यम से जमा कराने में लगी है वर्तमान स्थिति मे गांव के मजदूर ग्रामपंचायत स्तर पर मनरेगा योजना अंतर्गत कार्यो के एंव किसान किसानी के कार्य में व्यस्त हैं और और जो शिविर में उपस्थित हो रहे हैं उनके सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि पिछले अभियान में दिए गए आवेदनों के निराकरण हुए नहीं हैं और अब दोबारा फिर क्यों आवेदन लिए जा रहे हैं सरकार प्रदेश की जनता और किसानों के लिए अभियान चलाकर उनकी समस्याओं को शिथिल बनाने में लगी है लेकिन प्रशासन के द्वारा इन अभियानों में प्राप्त आवेदनों का समय सीमा पर सत प्रतिशत निराकरण नहीं होना सरकार की योजनाओं और सरकार के अभियानों मे जनता का रुझान कम देखने को मिल रहा है। राजस्व विभाग और पंचायत विभाग अभियान के तहत शिवर लगाकर शासन प्रशासन के आदेशों और निर्देशों का पालन कर रहा है लेकिन आवेदन देने वाली जनता पिछले आवेदनों के शत-प्रतिशत निराकरण नहीं होने से वर्तमान में आवेदन देने के रूख में नहीं है सरकार के राजस्व अभियान शिविरों में मौजूद किसानों की संख्या बता रही है कि किसान किसानी में व्यस्त हैं या फिर उन्हें सरकार के ऐसे अभियानों मैं दिलचस्पी नहीं है।
खुलेआम उड़ रही है सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां
एक जून से बाजार खुलने के बाद सड़कों में इतनी ज्यादा भीड़ बढ़ गई है जितनी कोरोना संक्रमण के पहले भी नहीं थी। जिला प्रशासन की तरफ से कोरोना की रोकथाम को लेकर नियम तो बहुत बनाए गए हैं, लेकिन दुकानदार और लोग उन नियमों का पालन करते नजर नही आ रहे है। प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों की सभी दुकानों पर खुलेआम सोशल डिस्टसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
हालाते राजधानी
बात भोपाल की करें तो कोरोना वायरस ने तेज रफ़्तार पकड़ ली हैं, रोजाना शहर में संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिला रहा है। इसके बाद भी सड़क से लेकर बाजार तक ऐसी भीड़ उमड़ रही है कि लोगों में कोरोना का डर ही खत्म हो गया है। लोग न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं और न ही मास्क ठीक से लगा रहे हैं। इसी तरह से लापरवाही की तो कोरोना वायरस का संक्रमण घर तक पहुंच सकता है।
पुलिस प्रशासन और जनता अब लापरवाह
कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ था तो दुकानदारों ने सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाने के लिए जमीन पर गोले बना दिए थे। बिना मास्क किसी को भी दुकान के पास नहीं आने दिया जा रहा था। अब पुलिस, प्रशासन, दुकानदार व जनता सभी बेपरवाह बने हुए हैं। यहां पर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है।
विश्लेषण के मायने
एक रिपोर्ट में किये गये विश्लेषण के तहत 45 देशों को शामिल किया गया है जिसमें तीन समूह बनाए गए हैं. जिसमें पहला है ऑन ट्रैक यानी सही रास्ते पर. दूसरा है चेतावनी यानी वार्निंग साइन और तीसरा है डेंजर जोन. भारत डेंजर जोन में है. भारत के साथ इंडोनेशिया, चिली और पाकिस्तान, स्वीडन, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और कनाडा सरीखे देश शामिल हैं.वही मध्यप्रदेश मे भी कई जिलो के हालात बहत्तर आज भी नहीं है रोजाना कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के मरीज़ निकल ही रहे हैं।
इनका कहना है
""हमें नामांतरण बंटवारा करने का कोई परहेज नहीं है माननीय प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जी के निर्देशों का पूर्ण तरह पालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होना चाहिए, आज जब हर गांव में सैंकड़ों की संख्या में अन्य राज्यो से प्रवासी आकर होम कोरेन्टीन है, तो उनके घर जाना बीमारी बढ़ाने ने में सहयोग करना होगा। हम पटवारी साथीयो की जान जोखिम में नही डाल सकते ।जब सारी व्यवस्थाएं ऑनलाइन है तो फिर शिविर लगाने की क्या आवश्यकता । साथ ही यदि शासन ,प्रशासन किसानो का वास्तविक निराकरण चाहती है
तो, पटवारीयो को संसाधन क्यों उपलब्ध नही कराती ।पटवारी के पास मोबाइल तक शासन से नही मिला है और सारी योजनाएं ऑन लाइन app व बिना लैपटॉप के चलते नही, वहीं सरकार के अभियान साल में दो बार पटवारियो से शुरू होकर तहसील के बाबू तक पहुंच कर खत्म हो जाते है....
उपेंद्रसिंह बाघेल प्रदेश अध्यक्ष मध्य प्रदेश पटवारी संघ
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Revanchal Times Weekly News Paper

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