नौनिहालों की दहलीज पर कचरे का अंबार: स्कूल-आंगनबाड़ी के सामने गंदगी, जिम्मेदारों से जवाब मांग रहा सिंगोड़ी
चार दशक से अधिक पुराने शासकीय उर्दू स्कूल के सामने सफाई व्यवस्था पर सवाल; छात्रावास और राशन दुकान के आसपास भी गंदगी की शिकायत
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - छिंदवाड़ा। एक तरफ स्वच्छता और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया जा रहा है, वहीं सिंगोड़ी में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास जमा कचरे को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां 30 अक्टूबर 1984 को स्थापित शासकीय उर्दू माध्यमिक शाला संचालित है, जहां कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल के सामने ही आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित बताया गया है। इसी क्षेत्र में कचरे और गंदगी के जमा होने की शिकायत सामने आई है।
स्कूल और आंगनबाड़ी जैसे संवेदनशील स्थानों के आसपास साफ-सफाई की व्यवस्था विशेष महत्व रखती है। छोटे बच्चे प्रतिदिन यहां पहुंचते हैं। ऐसे में आसपास कचरे का जमाव न केवल क्षेत्र की तस्वीर खराब करता है, बल्कि दुर्गंध, मक्खी-मच्छर और अस्वच्छ वातावरण जैसी परेशानियों को भी जन्म दे सकता है।
इसी परिसर के सामने आंगनबाड़ी केंद्र होने के कारण मामला और संवेदनशील हो जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों के साथ गर्भवती एवं धात्री महिलाएं भी विभिन्न सेवाओं के लिए पहुंचती हैं। ऐसे स्थान के आसपास स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना संबंधित व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए।
समस्या केवल स्कूल और आंगनबाड़ी तक सीमित नहीं बताई जा रही है। पास में स्थित राजा शंकरशाह-रघुनाथशाह सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास तथा राशन दुकान के आसपास भी गंदगी होने की शिकायत है।
छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों के साथ राशन लेने आने वाले ग्रामीणों को भी इसी क्षेत्र से गुजरना पड़ता है। ऐसे में सवाल है कि नियमित सफाई और कचरा उठाव की व्यवस्था यहां प्रभावी क्यों दिखाई नहीं दे रही?
स्कूल, आंगनबाड़ी, छात्रावास और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के आसपास यदि लंबे समय तक कचरा जमा रहता है तो संबंधित स्थानीय व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार विभाग और स्थानीय प्रशासन मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करें कि यहां नियमित कचरा संग्रहण की क्या व्यवस्था है, सफाई कितनी बार होती है और कचरा आखिर यहां जमा कैसे हो रहा है।
खबर सामने आने के बाद केवल एक बार सफाई कर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। स्कूल और आंगनबाड़ी के आसपास नियमित कचरा उठाव, सार्वजनिक स्थान पर कचरा फेंकने से रोकने की व्यवस्था और निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत है।
चार दशक से अधिक समय से बच्चों को शिक्षा दे रही संस्था के सामने कचरे का जमाव यदि नियमित समस्या बन चुका है तो यह केवल सफाई का मामला नहीं, बल्कि बच्चों को मिलने वाले वातावरण से भी जुड़ा सवाल है।
अब निगाह संबंधित स्थानीय निकाय, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा प्रशासन पर है कि शिकायत की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कब होता है और स्कूल-आंगनबाड़ी सहित पूरे परिसर को नियमित रूप से साफ रखने की स्थायी व्यवस्था कब सुनिश्चित की जाती है।
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