नैनपुर शासकीय महाविद्यालय में प्राचार्य के खिलाफ फूटा छात्रों का गुस्सा, 18 लाख के फंड पर उठे सवाल
टूटे वॉशरूम, खुले बिजली के तार और छात्रावास में ठेकेदार के रहने के आरोप; तीन सदस्यीय जांच टीम पहुंची कॉलेज, प्राचार्य ने दी सफाई
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला/नैनपुर। मंडला जिले के नैनपुर विकासखंड स्थित शासकीय महाविद्यालय में प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्थाओं, मूलभूत सुविधाओं की कमी और जनभागीदारी मद के 18 लाख रुपये के हिसाब-किताब को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों की शिकायतें भी सामने आने के बाद मामला जांच तक पहुंच गया है।
विद्यार्थियों का आरोप है कि महाविद्यालय में भारी-भरकम फीस लेने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। परिसर में सफाई व्यवस्था बदहाल है, बिजली के खुले तार और टूटे बोर्ड दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं, जबकि छात्राओं के लिए बनाए गए वॉशरूम की स्थिति भी चिंताजनक है।
पहले भी हो चुका विरोध, प्राचार्य का पुतला तक जला चुके हैं विद्यार्थी
महाविद्यालय में प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष भी विद्यार्थियों ने प्राचार्य के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए जमकर हंगामा किया था और उनका पुतला जलाकर नाराजगी जताई थी। शिक्षकों द्वारा भी प्राचार्य के खिलाफ लिखित शिकायतें किए जाने की बात सामने आई है।
अब एक बार फिर छात्र-छात्राओं ने कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर आवाज उठाई है। विद्यार्थियों का कहना है कि लंबे समय से शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
18 लाख रुपये के जनभागीदारी फंड का हिसाब मांग रहे विद्यार्थी
छात्रों ने आरोप लगाया है कि महाविद्यालय में जनभागीदारी मद से संबंधित 18 लाख रुपये की राशि के उपयोग का स्पष्ट हिसाब सामने नहीं आया है। विद्यार्थियों ने इस राशि के खर्च और उससे कराए गए कार्यों की पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई है।
हालांकि, इस राशि में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता होने की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। वित्तीय अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
चार से साढ़े चार हजार फीस, फिर भी पंखे और वॉशरूम बदहाल
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा प्रदर्शनी भारद्वाज ने महाविद्यालय की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए बताया कि विद्यार्थियों से लगभग 4,000 से 4,500 रुपये तक फीस ली जाती है, लेकिन कक्षाओं में पंखे तक ठीक से नहीं चलते।
छात्रा ने आरोप लगाया कि गर्ल्स वॉशरूम के दरवाजे टूटे हुए हैं और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। छात्राओं को इस कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समस्याओं की शिकायत लेकर जाने पर प्राचार्य का व्यवहार उचित नहीं रहता।
परिसर में गुटखा, सिगरेट और शराब की बोतलें मिलने के आरोप
विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर में गंदगी के साथ गुटखा, सिगरेट और शराब की खाली बोतलें मिलने की शिकायत की है। उनका आरोप है कि परिसर में साफ-सफाई और अनुशासन की पर्याप्त निगरानी नहीं हो रही है।
छात्र अंकित वंदेबार ने आरोप लगाया कि प्राचार्य स्वयं गुटखा खाते हैं और विद्यार्थियों की शिकायतों पर संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं देते। इन आरोपों को लेकर भी विद्यार्थियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मंडला से पहुंची तीन सदस्यीय जांच टीम, तीन स्तरों पर मिलीं शिकायतें
विवाद बढ़ने के बाद मंडला से तीन सदस्यीय जांच टीम नैनपुर शासकीय महाविद्यालय पहुंची। जांच अधिकारी डॉ. भुवनेश्वर के अनुसार महाविद्यालय से संबंधित तीन स्तरों पर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें विद्यार्थियों, जनभागीदारी समिति के सदस्यों और महाविद्यालय के लगभग 12 से 13 प्राध्यापकों की शिकायतें शामिल हैं।
बताया गया कि प्राध्यापकों ने भी प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर दस बिंदुओं में शिकायत प्रस्तुत की है।
जांच अधिकारी के अनुसार निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय में कई अव्यवस्थाएं सामने आईं। वॉशरूम की सफाई संतोषजनक नहीं मिली, पीने के पानी की व्यवस्था में कमी पाई गई और बिजली के बोर्ड टूटे होने की बात सामने आई। लाइब्रेरी एवं कंप्यूटर कक्ष के नियमित संचालन को लेकर भी सवाल उठे।
छात्रावास में वार्डन नहीं, ठेकेदार के रहने पर उठे गंभीर सवाल
जांच के दौरान महाविद्यालय के छात्रावास के उपयोग को लेकर भी विवाद सामने आया। प्राप्त जानकारी के अनुसार छात्रावास में वार्डन की व्यवस्था नहीं होने तथा वहां एक ठेकेदार के रहने की बात उठाई गई है।
विद्यार्थियों का आरोप है कि छात्रावास उनके आवासीय उपयोग के लिए बनाया गया है, लेकिन उसका इस्तेमाल एक ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है। छात्रों ने प्राचार्य और ठेकेदार की कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है।
वहीं, छात्रावास में ठेकेदार के रहने की लिखित अनुमति होने या नहीं होने का प्रश्न भी जांच का विषय है।
महाविद्यालय में उठे प्रमुख सवाल
- जनभागीदारी मद के 18 लाख रुपये की राशि का उपयोग किन कार्यों में हुआ?
- छात्राओं के वॉशरूम के टूटे दरवाजे और पानी की समस्या कब दूर होगी?
- कक्षाओं में पंखे, बिजली के बोर्ड और खुले तारों की मरम्मत क्यों नहीं हुई?
- लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष का नियमित संचालन क्यों नहीं हो रहा?
- छात्रावास में ठेकेदार को रहने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
- विद्यार्थियों और प्राध्यापकों की शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
प्राचार्य ने आरोपों को नकारा, बोले—कॉलेज में नियमित होती है सफाई
दूसरी ओर महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने कार्यालय में बातचीत के दौरान विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेज की लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष समय-समय पर खोले जाते हैं। पिछले दो से चार दिनों से नहीं खुलने के कारण वहां गंदगी दिखाई दे रही होगी।
प्राचार्य के अनुसार महाविद्यालय में प्रतिदिन सफाई होती है और लगभग आठ दिन के अंतराल पर टीम बनाकर विशेष सफाई भी कराई जाती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण कभी-कभी परिसर में गंदगी हो जाती है।
शिक्षकों द्वारा पढ़ाई नहीं कराने संबंधी आरोपों को भी उन्होंने गलत बताते हुए कहा कि वे स्वयं कक्षाओं का निरीक्षण करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महाविद्यालय में कार्यक्रमों की शुरुआत पूजा-पाठ और अगरबत्ती लगाकर की जाती है।
छात्रावास में रहने की अनुमति मैंने दी थी : प्राचार्य
छात्रावास में ठेकेदार के रहने के सवाल पर प्राचार्य ने कहा कि संबंधित व्यक्ति को वहां रहने की अनुमति उन्होंने स्वयं दी थी। हालांकि, इस अनुमति का प्रशासनिक आधार क्या है और छात्रावास के उपयोग संबंधी नियम क्या कहते हैं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब जांच रिपोर्ट और उच्च शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर
नैनपुर शासकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों, जनभागीदारी समिति के सदस्यों और प्राध्यापकों की ओर से सामने आई शिकायतों ने कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है।
एक ओर विद्यार्थी मूलभूत सुविधाओं और वित्तीय पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं प्राचार्य आरोपों को गलत बता रहे हैं। ऐसे में तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
अब देखना होगा कि जांच में किन शिकायतों की पुष्टि होती है और उच्च शिक्षा विभाग विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।
नोट : वित्तीय अनियमितता, प्राचार्य के व्यक्तिगत आचरण और छात्रावास के कथित दुरुपयोग से संबंधित बातें शिकायतकर्ताओं के आरोप हैं। प्राचार्य ने आरोपों से इनकार किया है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
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