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नैनपुर में बेसहारा वृद्ध के अंतिम संस्कार के लिए जेसीबी नहीं मिलने की शिकायत, फावड़े से खोदा गड्ढा

दैनिक रेवाँचल टाईम्स

नैनपुर में बेसहारा वृद्ध के अंतिम संस्कार के लिए जेसीबी नहीं मिलने की शिकायत, फावड़े से खोदा गड्ढा

मंडला, नैनपुर। नैनपुर नगर पालिका परिषद में एक बेसहारा वृद्ध के अंतिम संस्कार के दौरान जेसीबी उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आई है। लगभग 70 वर्षीय बुधराम हरिजन की मृत्यु के बाद कर्मचारियों को फावड़े से गड्ढा खोदना पड़ा। नागरिक मंच की मदद से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। इस घटना को लेकर नगर पालिका की संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था और ठेकेदारी कार्यों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठे हैं।

नैनपुर में बेसहारा वृद्ध के अंतिम संस्कार के लिए जेसीबी नहीं मिलने की शिकायत, फावड़े से खोदा गड्ढा

लगभग पांच महीने अस्पताल में हुई देखभाल

ओडिशा के जिला कालाहांडी के ग्राम नारला निवासी बुधराम हरिजन, पिता दामोदर हरिजन, बेहद अभावपूर्ण परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे थे। बताया गया कि परिवार में उनकी विधवा बहन के अलावा कोई सहारा नहीं था। दोनों भीख मांगकर जीवनयापन करते थे।

21 मई की रात रेलवे पटरी के पास असहाय अवस्था में मिले बुधराम को सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से सिविल अस्पताल नैनपुर पहुंचाया गया था। लगभग पांच महीने तक नागरिक मंच और अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने उनकी देखभाल की। उनकी स्थिति को देखते हुए उज्जैन के वृद्धाश्रम भेजने की प्रक्रिया भी चल रही थी, लेकिन इससे पहले ही उनकी मृत्यु हो गई।

नागरिक मंच ने मशीन दूसरे काम पर भेजने की बात कही

नागरिक मंच के अनुसार, अंतिम संस्कार के लिए जेसीबी से गड्ढा खोदने के बाद मशीन को दूसरी जगह काम पर लगा दिया गया। इसके बाद नगर पालिका कर्मचारियों को फावड़े से गड्ढा खोदना पड़ा। अंतिम संस्कार के दौरान मशीन की उपलब्धता और तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

टेंडर और भुगतान के रिकॉर्ड की जांच का सवाल

दी गई जानकारी के मुताबिक, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक जेसीबी कार्य के लिए नगर पालिका का टेंडर स्वीकृत था। सालभर में इस मद में 15 लाख रुपये से अधिक भुगतान किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, इस राशि की आधिकारिक अभिलेखों से पुष्टि आवश्यक है।

मामले में टेंडर की शर्तों, मशीन की लॉगबुक, कार्यादेश और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जरूरत उठाई गई है, ताकि स्पष्ट हो सके कि मशीन का संचालन किन निर्देशों के तहत हुआ और अंतिम संस्कार के समय उसकी उपलब्धता क्यों प्रभावित हुई।

ठेकेदारी व्यवस्था और जवाबदेही पर उठे सवाल

नागरिक मंच ने नगर पालिका में ठेकेदारों के प्रभाव और कामकाज की प्राथमिकताओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ये आरोप जांच का विषय हैं। नगर पालिका में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के काम होने के दावों के बीच यह मामला जरूरत के समय सार्वजनिक संसाधनों की उपलब्धता से जुड़ी जवाबदेही को सामने लाता है।

घटना के बाद निराश्रित व्यक्तियों की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए स्पष्ट प्रक्रिया, आपात परिस्थितियों में संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों तथा ठेकेदारों की भूमिका की समीक्षा जैसे सवाल भी उठे हैं।

बुधराम हरिजन का अंतिम संस्कार नागरिक मंच की मदद से पूरा हुआ, लेकिन जेसीबी नहीं मिलने की शिकायत पर परिस्थितियां स्पष्ट होना जरूरी है। शिकायत सही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में निराश्रित व्यक्तियों के अंतिम संस्कार के लिए तत्काल सहायता सुनिश्चित करने की जरूरत है।

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