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जादू-टोने के शक में 80 वर्षीय वृद्ध की हत्या, भैंसवासी गांव से आरोपी गिरफ्तार

जादू-टोने के शक में 80 वर्षीय वृद्ध की हत्या, भैंसवासी गांव से आरोपी गिरफ्तार

गले पर मिले धारदार हथियार के निशान; पुलिस का दावा—पशुओं की मौत को लेकर वृद्ध पर था संदेह

दैनिक रेवांचल टाइम्स, घुघरी/मंडला। जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भैंसवासी में जादू-टोने के संदेह ने कथित तौर पर एक बुजुर्ग की जान ले ली। करीब 80 वर्षीय सोहन सिंह सरोते अपने घर में मृत अवस्था में मिले। उनके गले पर धारदार हथियार से हमले के निशान पाए गए। पुलिस ने मामले में गांव के ही लगभग 60 वर्षीय धौकल धुर्वे को गिरफ्तार किया है।



पशुओं की मौत के बाद गहराया था शक

पुलिस अधीक्षक राजेश रघुवंशी के अनुसार, आरोपी को संदेह था कि सोहन सिंह सरोते जादू-टोना करते हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपी के घर गाय और भैंस की मौत हुई थी और वह कथित रूप से इन घटनाओं के लिए वृद्ध को जिम्मेदार मानने लगा था।

घर में मृत मिले वृद्ध, गले पर धारदार हथियार के निशान

पुलिस को सूचना मिली कि सोहन सिंह सरोते अपने घर में मृत पड़े हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि उनके गले पर धारदार हथियार से वार के निशान थे। परिजनों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस का संदेह धौकल धुर्वे पर गया। पुलिस का कहना है कि शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने घटना से इनकार किया, लेकिन जांच के दौरान कथित रूप से खून से सने कपड़े मिलने के बाद उससे दोबारा पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना स्वीकार किया।

एक शक ने ले ली एक जिंदगी

इस घटना का सबसे गंभीर पहलू केवल हत्या नहीं, बल्कि वह अंधविश्वासी सोच है जिसमें बीमारी, पशुओं की मौत या पारिवारिक संकट जैसे मामलों को वैज्ञानिक कारणों के बजाय जादू-टोने से जोड़ दिया जाता है। ऐसे संदेह जब हिंसा का रूप लेते हैं तो उनका परिणाम जानलेवा हो सकता है।

अंधविश्वास से उपजता है डर, विवाद और हिंसा

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लंबे समय से यह कहा जाता रहा है कि बीमारी, पशुओं की अचानक मौत या अन्य अनहोनी की स्थिति में चिकित्सकीय, पशु-चिकित्सकीय और वैज्ञानिक जांच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। महज संदेह, अफवाह या परंपरागत मान्यताओं के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी मानना गंभीर सामाजिक तनाव पैदा कर सकता है।

अंधविश्वास का नुकसान केवल आर्थिक या सामाजिक स्तर तक सीमित नहीं रहता। कई मामलों में इससे परिवारों के बीच दुश्मनी, सामाजिक बहिष्कार, मारपीट और हत्या जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं।

शिक्षा और वैज्ञानिक सोच की जरूरत

भैंसवासी की यह घटना फिर सवाल खड़ा करती है कि महज शक के आधार पर किसी व्यक्ति को जादू-टोना करने वाला मानकर निशाना क्यों बनाया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के साथ वैज्ञानिक सोच, स्वास्थ्य जागरूकता और कानूनी जानकारी को लगातार मजबूत करने की जरूरत है।

जागरूकता अभियान जरूरी

प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के साथ सामाजिक संगठनों द्वारा गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि बीमारी, पशुओं की मौत या घरेलू परेशानी जैसी घटनाओं को जादू-टोने से जोड़ने के बजाय उनके वास्तविक कारणों को समझा जा सके।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और अदालत में आरोप सिद्ध होना शेष है।

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला

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