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प्रसूता को घर छोड़ने के बदले मांगे 2 हजार रुपये! 108 एंबुलेंस कर्मियों पर अवैध वसूली का आरोप, जांच के आदेश

प्रसूता को घर छोड़ने के बदले मांगे 2 हजार रुपये! 108 एंबुलेंस कर्मियों पर अवैध वसूली का आरोप, जांच के आदेश

पैसे नहीं देने पर नवजात सहित एंबुलेंस में बैठाने से इनकार करने का आरोप, बस से घर जाने को मजबूर हुआ परिवार; वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में



दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला/डिंडौरी। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला अस्पताल मंडला में प्रसव के बाद एक महिला को उसके नवजात शिशु सहित घर छोड़ने के बदले 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर दो हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। परिजनों का कहना है कि रुपये देने में असमर्थता जताने पर एंबुलेंस से घर पहुंचाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद प्रसूता को नवजात शिशु के साथ यात्री बस से अपने गांव लौटना पड़ा। शुक्रवार को घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

सामान्य प्रसव के बाद घर जाने के लिए मांगे रुपये

जानकारी के अनुसार डिंडौरी जिले के मेहदवानी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भुरकाटोला निवासी रमीला वरकड़े को प्रसव पीड़ा होने पर 5 अक्टूबर को जिला अस्पताल मंडला में भर्ती कराया गया था। 7 अक्टूबर को सामान्य प्रसव के बाद चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी।

रमीला के पति राजकुमार वरकड़े का आरोप है कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद 108 एंबुलेंस सेवा के एक कर्मचारी ने उनसे संपर्क किया और प्रसूता तथा नवजात को घर तक छोड़ने के बदले 2 हजार रुपये की मांग की।

परिजनों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने की बात कही तो कर्मचारी ने कथित तौर पर रकम घटाकर 1800 रुपये कर दी। लेकिन परिवार के पास इतनी राशि भी नहीं थी। आरोप है कि रुपये नहीं देने पर कर्मचारी ने उन्हें एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया।

नवजात को गोद में लेकर बस से लौटना पड़ा गांव

परिजनों के अनुसार अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद प्रसूता को घर पहुंचाने के लिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। ऐसे में परिवार नवजात शिशु को लेकर बस स्टैंड पहुंचा और यात्री बस के माध्यम से गांव के लिए रवाना हुआ।

इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव के तुरंत बाद महिला और नवजात शिशु को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय कथित तौर पर रुपये मांगने की घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी सामने आई है।

क्या गरीब मरीजों से की जा रही अवैध वसूली?

मामला सामने आने के बाद कुछ स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि अन्य जिलों से उपचार कराने आने वाले गरीब और आदिवासी परिवारों को परिवहन सुविधा के नाम पर परेशान किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सवाल यह उठ रहा है कि यदि पात्र प्रसूताओं के लिए शासन की निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध है, तो संबंधित परिवार को उसका लाभ क्यों नहीं मिल सका? क्या अस्पताल परिसर में एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी पर्याप्त नहीं है? और यदि कर्मचारी ने वास्तव में रुपये मांगे थे, तो उसके विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई हुई?

सीसीटीवी फुटेज की जांच, एंबुलेंस कंपनी से जवाब तलब

वायरल वीडियो सामने आने के बाद मंडला के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.के. मोहंती ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, ताकि संबंधित कर्मचारी की पहचान की जा सके। साथ ही 108 एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली अनुबंधित कंपनी के जिला समन्वयक से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

सीएमएचओ के अनुसार जांच में आरोप सही पाए जाने और संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी निर्धारित होने पर सेवा समाप्ति तथा पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर उठे सवाल

यह मामला केवल एक प्रसूता और उसके परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही से भी जुड़ा है। विशेषकर ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए प्रसव के बाद सुरक्षित परिवहन सुविधा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

अब देखना यह होगा कि जांच में एंबुलेंस कर्मियों पर लगे आरोपों की क्या सच्चाई सामने आती है और स्वास्थ्य विभाग भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

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