डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में 60.65 लाख के संदिग्ध भुगतान का खुलासा, क्लर्क निलंबित, पूर्व CMHO को नोटिस
सात वर्षों के भुगतान की जांच में मिलीं गंभीर अनियमितताएं, IFMIS पोर्टल पर बिना सत्यापन बिल स्वीकृत करने के आरोप
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – डिंडौरी। जिले के स्वास्थ्य विभाग में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में वर्ष 2017 से 2024 के बीच 60 लाख 65 हजार 590 रुपये के कथित फर्जी एवं नियम विरुद्ध भुगतान का खुलासा प्रशासनिक जांच में हुआ है। भोपाल स्थित कोष एवं लेखा आयुक्त कार्यालय के निर्देशों पर कराई गई जांच के बाद कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सहायक ग्रेड-3 के कर्मचारी गुलाब प्रसाद साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं तत्कालीन प्रभारी सीएमएचओ डॉ. रमेश मरावी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
IFMIS पोर्टल पर बिना सत्यापन लाखों के भुगतान का मामला
भोपाल से प्राप्त निर्देशों के बाद गठित जांच दल ने 28 सितंबर 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। जांच में सामने आया कि संबंधित शाखा द्वारा देयकों एवं अभिलेखों का आवश्यक भौतिक सत्यापन किए बिना ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। सरकारी भुगतान की IFMIS प्रणाली में कर्मचारियों के एरियर एवं अन्य बिलों को स्वीकृत करने में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
जांच में तत्कालीन प्रभारी सीएमएचओ डॉ. रमेश मरावी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। वर्तमान में जिला अस्पताल में सिविल सर्जन के पद पर कार्यरत डॉ. मरावी पर आरोप है कि मार्च 2021 से अगस्त 2025 के कार्यकाल के दौरान उन्होंने संबंधित दस्तावेजों की पर्याप्त जांच किए बिना डिजिटल माध्यम से बिलों को स्वीकृति प्रदान की। इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू निलंबित
जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की है। उन पर संदिग्ध भुगतान संबंधी फाइलों को निर्धारित नियमों का पालन किए बिना आगे बढ़ाने के आरोप हैं। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समनापुर निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त सुपरवाइजर प्रकाश सिंह परस्ते पर भी आवश्यक एवं वैध दस्तावेजों के अभाव में बिल आगे बढ़ाने संबंधी आरोप लगाए गए हैं। जांच में कुछ सेवानिवृत्त तथा अन्य जिलों में स्थानांतरित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। उनके विरुद्ध पृथक वैधानिक कार्रवाई प्रस्तावित होने की जानकारी सामने आई है।
कार्रवाई के बाद कार्यालय में हलचल, संबंधित कक्षों में ताले
निलंबन एवं नोटिस की कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में हलचल की स्थिति बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार कार्रवाई के बाद संबंधित कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले और उनके कक्षों में ताले लगे पाए गए।
वहीं निलंबित कर्मचारी गुलाब प्रसाद साहू ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि जांच दल ने उनका पक्ष सुने बिना और पूर्व सूचना दिए बिना एकतरफा कार्रवाई की है। हालांकि उनके इस दावे पर प्रशासन की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना शेष है।
अब रिकवरी और कानूनी कार्रवाई पर नजर
मामले में वित्तीय उत्तरदायित्व निर्धारित करने, कथित अनियमित भुगतान की राशि की वसूली तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की अंतिम जवाबदेही विभागीय एवं वैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर निर्धारित होगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2017 से 2024 के बीच इतने बड़े स्तर पर संदिग्ध भुगतान होते रहे तो संबंधित शाखाओं और वित्तीय निगरानी व्यवस्था को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं हुई? अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच केवल निलंबन और नोटिस तक सीमित रहती है या पूरी भुगतान प्रक्रिया की जवाबदेही तय कर सरकारी राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाती है।
