शीतलपानी स्कूल में मरम्मत राशि के आहरण पर विवाद, अध्यक्ष ने लगाए नियमों की अनदेखी के आरोप
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – बजाग। विकासखंड शिक्षा केंद्र बजाग अंतर्गत वनग्राम शीतलपानी की प्राथमिक शाला में मरम्मत कार्य के लिए आवंटित शासकीय राशि के आहरण और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आया है। शाला प्रबंधन समिति के वर्तमान अध्यक्ष रामकुमार ने तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक दीपेंद्र मीणा पर उनकी जानकारी, सहमति और सील-साइन के बिना मरम्मत राशि आहरित करने का आरोप लगाया है।
हालांकि शिक्षक दीपेंद्र मीणा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि राशि पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में स्वीकृत हुई थी और उनके हस्ताक्षर से ही आहरण किया गया। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच अब बैंक अभिलेखों, स्वीकृति आदेश और वास्तविक निर्माण कार्य की जांच की मांग उठ रही है।
वर्तमान अध्यक्ष रामकुमार का आरोप है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना शाला मरम्मत की राशि निकाली गई। वहीं शिक्षक दीपेंद्र मीणा के अनुसार 96 हजार रुपये प्राप्त हुए थे और राशि पूर्व अध्यक्ष के हस्ताक्षर से आहरित की गई थी।
अध्यक्ष बोले—मेरी जानकारी के बिना कैसे निकाली राशि?
शाला प्रबंधन समिति के वर्तमान अध्यक्ष रामकुमार के अनुसार उन्हें अध्यक्ष का दायित्व सौंपे हुए एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है। उनका आरोप है कि प्राथमिक शाला में मरम्मत कार्य के लिए स्वीकृत राशि के संबंध में उन्हें समय पर कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही राशि आहरण के लिए उनकी सहमति ली गई।
रामकुमार ने बताया कि जब उन्हें बैंक खाते से राशि निकाले जाने की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक दीपेंद्र मीणा से इस संबंध में सवाल किए। उनके मुताबिक शिक्षक ने बताया कि मरम्मत कार्य की राशि पूर्व अध्यक्ष रुक्मिणी बाई के कार्यकाल में स्वीकृत हुई थी।
अध्यक्ष रामकुमार का कहना है कि पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में न तो मरम्मत कार्य कराया गया था और न ही राशि आहरित की गई थी। ऐसे में यदि राशि का आहरण उनके वर्तमान कार्यकाल में हुआ, तो उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?
उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक उन्हें इस मामले की जानकारी से दूर रखा गया। हालांकि राशि आहरण की वास्तविक तिथि, हस्ताक्षर और अपनाई गई प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित बैंक एवं विभागीय दस्तावेजों की जांच से ही हो सकेगी।
डेढ़ लाख के आवंटन और खर्च का हिसाब मांग रहे अध्यक्ष
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिक शाला शीतलपानी में मरम्मत कार्य के लिए पूर्व वर्ष में शासन की ओर से लगभग डेढ़ लाख रुपये की राशि आवंटित किए जाने की बात सामने आई है।
अध्यक्ष रामकुमार का आरोप है कि अप्रैल 2026 में मरम्मत कार्य कराए जाने की जानकारी देते हुए लगभग 70 से 80 हजार रुपये खर्च होने की बात कही गई थी। दूसरी ओर शिक्षक दीपेंद्र मीणा ने कुल 96 हजार रुपये प्राप्त होने की बात कही है।
इस प्रकार स्वीकृत राशि, वास्तव में प्राप्त राशि, आहरण और खर्च के संबंध में अलग-अलग जानकारियां सामने आने से वित्तीय अभिलेखों का सत्यापन आवश्यक हो गया है।
लगभग 1.50 लाख रुपये : मरम्मत के लिए कथित स्वीकृत राशि।
70 से 80 हजार रुपये : अध्यक्ष के अनुसार बताया गया मरम्मत खर्च।
96 हजार रुपये : शिक्षक दीपेंद्र मीणा के अनुसार प्राप्त राशि।
इन आंकड़ों का आधिकारिक सत्यापन शेष है।
मरम्मत की गुणवत्ता पर सवाल, भवन का कार्य अधूरा होने का आरोप
प्राथमिक शाला शीतलपानी में विवाद केवल राशि के आहरण तक सीमित नहीं है। विद्यालय भवन में कराए गए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित एस्टीमेट के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अध्यक्ष रामकुमार के अनुसार पुराने विद्यालय भवन का जीर्णोद्धार कार्य अब तक पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि मरम्मत कार्य निर्धारित एस्टीमेट के अनुरूप नहीं कराया गया।
छत की ढलाई और पलस्तर में उपयोग की गई निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा विद्यालय के दरवाजे और खिड़कियां अब भी क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई है।
अध्यक्ष ने निर्माण कार्य का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक कार्य, खर्च और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्थिति स्पष्ट हो सके।
पूर्व अध्यक्ष के हस्ताक्षर से राशि निकाली : दीपेंद्र मीणा
मामले में आरोपों को लेकर शिक्षक दीपेंद्र मीणा ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि मरम्मत कार्य की राशि वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल में स्वीकृत नहीं हुई थी, बल्कि इसका आवंटन पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में हुआ था।
"वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल में राशि स्वीकृत नहीं हुई थी। पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में राशि आवंटित हुई है। 96 हजार प्राप्त हुए थे, उन्हीं के हस्ताक्षर से आहरण किया गया है।"
शिक्षक के इस बयान के बाद जांच का महत्वपूर्ण विषय यह भी है कि राशि के आहरण के समय शाला प्रबंधन समिति के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता कौन थे और बैंक खाते के संचालन के लिए उस समय कौन-सी प्रक्रिया प्रभावी थी।
बिना जानकारी और सहमति के राशि निकाली : रामकुमार
दूसरी ओर वर्तमान शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष रामकुमार ने शिक्षक द्वारा बताई गई आहरण प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में राशि निकाली गई, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई।
"मेरे बिना जानकारी और सहमति के शिक्षक द्वारा बैंक खाते से शाला मरम्मत की राशि निकाली गई है, जो कि नियम विरुद्ध है।"
अध्यक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
किसके हस्ताक्षर से हुआ आहरण? जांच से स्पष्ट होगी स्थिति
शासकीय विद्यालयों में मरम्मत कार्य के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का उपयोग संबंधित वित्तीय नियमों और अधिकृत प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाना आवश्यक है।
शीतलपानी प्राथमिक शाला के मामले में यह जांच का विषय है कि राशि किस तारीख को स्वीकृत हुई, वास्तव में कितनी राशि प्राप्त हुई, आहरण कब और किसके हस्ताक्षर से किया गया तथा उस समय शाला प्रबंधन समिति के बैंक खाते का संचालन करने के लिए कौन अधिकृत था।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित वित्तीय प्रक्रिया में वर्तमान अध्यक्ष की सहमति या हस्ताक्षर आवश्यक थे अथवा नहीं। बिना संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किए राशि आहरण को नियम विरुद्ध या नियमसम्मत घोषित करना उचित नहीं होगा।
स्वीकृति आदेश : मरम्मत कार्य की स्वीकृत राशि और आवंटन की तिथि।
बैंक अभिलेख : राशि प्राप्ति, आहरण की तिथि और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता।
समिति की भूमिका : पूर्व एवं वर्तमान अध्यक्ष का कार्यकाल और संबंधित वित्तीय अधिकार।
बिल और वाउचर : निर्माण सामग्री, मजदूरी एवं वास्तविक भुगतान का सत्यापन।
तकनीकी निरीक्षण : स्वीकृत एस्टीमेट, निर्माण की गुणवत्ता और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान।
शिक्षा विभाग की जांच से सामने आएगी वास्तविकता
फिलहाल शीतलपानी प्राथमिक शाला में मरम्मत राशि के आहरण और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
अध्यक्ष रामकुमार और शिक्षक दीपेंद्र मीणा के बयानों में राशि के आहरण और अध्यक्ष की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित शिक्षा विभाग द्वारा बैंक अभिलेखों, स्वीकृति आदेशों, समिति के दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।
यदि जांच में वित्तीय प्रक्रिया अथवा निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार जिम्मेदारी निर्धारित कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
शीतलपानी प्राथमिक शाला में मरम्मत कार्य के लिए आवंटित राशि और उसके आहरण को लेकर सामने आया विवाद अब विभागीय जांच की मांग तक पहुंच गया है। वर्तमान अध्यक्ष ने बिना सहमति राशि निकालने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं, जबकि शिक्षक ने पूर्व अध्यक्ष के हस्ताक्षर से राशि आहरित होने की बात कही है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और वित्तीय अभिलेखों तथा वास्तविक निर्माण कार्य का निष्पक्ष परीक्षण कर स्थिति कब तक स्पष्ट करता है।
