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पटवारी जीतू बैरागी के तीन आवेदन के बाद भी कार्रवाई का इंतजार, प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला

पटवारी जीतू बैरागी के तीन आवेदन के बाद भी कार्रवाई का इंतजार, प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

बार-बार आवेदन और निवेदन देने का दावा; निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार निर्णय देने की मांग

मंडला। शासन-प्रशासन से अपनी शिकायत पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई की उम्मीद लगाए पटवारी जीतू बैरागी द्वारा बार-बार आवेदन और निवेदन दिए जाने के बावजूद मामले में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का दावा किया गया है। आवेदक का कहना है कि वह संबंधित अधिकारियों के समक्ष लगातार अपनी बात रख रहा है, लेकिन उसे अब तक मामले के निराकरण की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।

आवेदन पहुंचे जिम्मेदारों तक, लेकिन कार्रवाई का इंतजार

आवेदक के मुताबिक मामले में एक-दो नहीं बल्कि अलग-अलग समय पर तीन आवेदन/पत्र दिए जा चुके हैं। इनमें संबंधित अधिकारियों का ध्यान मामले की ओर आकर्षित करते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। इसके बावजूद ठोस निर्णय सामने नहीं आने से आवेदक ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

बार-बार आवेदन क्यों? आवेदक को मिले स्पष्ट जवाब

किसी शिकायत अथवा आवेदन पर अंतिम निर्णय क्या हुआ, प्रकरण किस अधिकारी या शाखा के पास लंबित है और यदि कार्रवाई संभव नहीं है तो उसका कारण क्या है—इन बिंदुओं की स्पष्ट जानकारी आवेदक को मिलने से स्थिति साफ हो सकती है। लंबे समय तक केवल आवेदन और निवेदन का क्रम चलते रहने से शिकायतकर्ता के सामने अनिश्चितता बनी रहती है।

फाइल कहां अटकी? यही सबसे बड़ा सवाल

आवेदक का सवाल है कि जब संबंधित अधिकारियों को बार-बार लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है तो प्रकरण की वर्तमान स्थिति क्या है? आवेदन पर जांच शुरू हुई या नहीं, किसी अधिकारी को जांच सौंपी गई या नहीं और यदि जांच हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा—इन सवालों का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।

आवेदक ने फिर मांगी निष्पक्ष जांच

जीतू बैरागी ने शासन-प्रशासन से एक बार फिर प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, उपलब्ध आवेदन और दस्तावेजों का परीक्षण करने तथा तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई कर स्पष्ट निर्णय देने की मांग की है।

इन सवालों का जवाब जरूरी

तीन आवेदन/पत्रों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
प्रकरण वर्तमान में किस अधिकारी अथवा शाखा के पास है?
क्या मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं?
यदि जांच लंबित है तो उसके निराकरण की समय-सीमा क्या है?
आवेदक को लिखित रूप से निर्णय कब मिलेगा?

मूल विवाद पर विभागीय पक्ष भी जरूरी

आवेदक द्वारा उठाए गए मूल मामले का पूरा विवरण और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि कार्रवाई में वास्तविक देरी हुई है या प्रकरण किसी प्रशासनिक अथवा जांच प्रक्रिया में लंबित है। इसलिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण है।

आखिर कितने आवेदन के बाद मिलेगा जवाब?

लगातार आवेदन देने के बाद अब आवेदक की निगाह प्रशासन के अगले कदम पर है। सवाल किसी एक आवेदन का नहीं, बल्कि शिकायत के समयबद्ध निराकरण और आवेदक को उसकी स्थिति से अवगत कराने का भी है। जांच में जो तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाना ही पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

फिलहाल जीतू बैरागी को अपने आवेदनों पर स्पष्ट कार्रवाई और जवाब का इंतजार है। अब देखना होगा कि प्रशासन प्रकरण की जांच और निराकरण की दिशा में आगे बढ़ता है या आवेदक को एक और आवेदन लेकर अधिकारियों के दरवाजे तक पहुंचना पड़ता है।

दैनिक रेवांचल टाइम्स
मंडला | प्रशासन | शिकायत | जांच एवं कार्रवाई की मांग

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