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पंचायत के हिसाब-किताब पर सवाल: ग्राम सभा में आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा नहीं देने का आरोप

दैनिक रेवांचल टाईम्स | घुघरी-मंडला

पंचायत के हिसाब-किताब पर सवाल, ग्राम सभा में आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा नहीं देने का आरोप

पांडकला पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच की मांग

दैनिक रेवांचल टाईम्स - घुघरी, मंडला। ग्राम पंचायत पांडकला के पोषक ग्राम सैलवारा में पंचायत के कामकाज और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय राशि के दुरुपयोग की शिकायत करते हुए कलेक्टर मंडला को लिखित आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

शिकायत की प्रतिलिपि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मंडला एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत घुघरी को भी दिए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी

खबर में उल्लिखित वित्तीय अनियमितता और शासकीय राशि के दुरुपयोग संबंधी बातें ग्रामीणों की शिकायत और आरोपों पर आधारित हैं। स्वतंत्र जांच एवं प्रशासनिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

ग्राम सभा में नहीं रखा गया आय-व्यय का पूरा हिसाब?

ग्रामीणों के अनुसार 24 अगस्त 2026 को ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बैठक में पंचायत के आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा ग्राम सभा के सामने प्रस्तुत किए जाने की अपेक्षा थी, लेकिन पूरा वित्तीय विवरण सामने नहीं रखा गया।

ग्रामीणों के मुताबिक इसके बाद ग्राम सभा को स्थगित कर 27 अगस्त 2026 की अगली तारीख निर्धारित की गई। उनका आरोप है कि निर्धारित तिथि पर सरपंच एवं सचिव के उपस्थित नहीं होने के कारण आय-व्यय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

ग्रामीणों का सीधा सवाल

यदि पंचायत के वित्तीय कार्य नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से हुए हैं तो ग्राम सभा के समक्ष आय-व्यय का पूरा विवरण रखने में परेशानी क्या है?

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस संबंध में उपस्थित ग्रामीणों एवं पंचायत सदस्यों ने पंचनामा तैयार किया और मामले की शिकायत जनपद पंचायत घुघरी के समक्ष की।

जांच दल पहुंचा पंचायत, लेकिन ग्रामीण संतुष्ट नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद जनपद पंचायत घुघरी की ओर से जांच दल गठित कर पांडकला भेजा गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार जांच दल ने ग्राम सभा के समक्ष लिखित शिकायत के आधार पर पूछताछ की।

हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के दौरान उनसे कहा गया कि शिकायत बिंदुवार नहीं है, इसलिए उस आधार पर जांच करना संभव नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने इस कथित जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए उच्च स्तर से स्वतंत्र एवं बिंदुवार जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों की मांग: शिकायत के प्रत्येक बिंदु की दस्तावेजों के साथ जांच हो और संबंधित विकास कार्यों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए।

मनरेगा के बिल-वाउचर और मस्टर रोल की जांच की मांग

शिकायत में मनरेगा से जुड़े कार्यों को भी प्रमुखता से उठाया गया है। ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों से संबंधित बिल-वाउचर, मस्टर रोल, मजदूरी भुगतान एवं अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ अभिलेखों और कार्यों की वास्तविकता का भौतिक सत्यापन किया जाना आवश्यक है। उनका कहना है कि केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय यह देखा जाए कि स्वीकृत कार्य वास्तव में मौके पर हुए हैं या नहीं और दर्ज भुगतान के अनुपात में वास्तविक कार्य मौजूद है या नहीं।

मस्टर रोल
नाम और मजदूरी भुगतान की जांच
बिल-वाउचर
खरीदी एवं भुगतान का मिलान
निर्माण कार्य
मौके पर भौतिक सत्यापन
भुगतान रिकॉर्ड
स्वीकृति और भुगतान की जांच

दस्तावेजों और जमीनी काम के मिलान से खुल सकती है तस्वीर

शिकायत के केंद्र में पंचायत की वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य, मनरेगा कार्य, सामग्री खरीदी, मजदूरी भुगतान, बिल-वाउचर, मस्टर रोल, भुगतान विवरण, स्वीकृति आदेश एवं अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के साथ संबंधित कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाना चाहिए। ग्राम सभा में प्रस्तुत किए गए वित्तीय विवरण और पंचायत के मूल अभिलेखों का आपस में मिलान करने की भी मांग की गई है।

सवाल सिर्फ शिकायत का नहीं, पंचायत की जवाबदेही का

ग्राम पंचायतों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से विकास और ग्रामीण हित के कार्यों पर सार्वजनिक राशि खर्च होती है। ऐसे में पंचायत के आय-व्यय और विकास कार्यों से संबंधित जानकारी की पारदर्शिता को लेकर ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवाल जवाबदेही से जुड़े हैं।

ग्रामीण बोले—दस्तावेज और मौके की स्थिति का हो मिलान

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि सभी कार्य नियमानुसार हुए हैं तो निष्पक्ष दस्तावेजी जांच और भौतिक सत्यापन से स्थिति स्वयं स्पष्ट हो जाएगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने कलेक्टर मंडला से ग्राम पंचायत पांडकला की शिकायत के प्रत्येक बिंदु की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विशेष रूप से मनरेगा के मस्टर रोल, बिल-वाउचर, भुगतान अभिलेख, निर्माण कार्य, सामग्री खरीदी और पंचायत के आय-व्यय से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

जांच के दायरे में लाने की मांग
24 अगस्त 2026 की ग्राम सभा की कार्यवाही
27 अगस्त 2026 की निर्धारित बैठक और उपस्थिति
ग्रामीणों द्वारा तैयार किया गया कथित पंचनामा
पंचायत का आय-व्यय रिकॉर्ड
मनरेगा मस्टर रोल एवं मजदूरी भुगतान
सामग्री खरीदी एवं बिल-वाउचर
निर्माण एवं विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन

शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जांच में यदि सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक अथवा किसी अन्य जिम्मेदार की भूमिका में अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब प्रशासन की जांच पर निगाह

फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। दस्तावेजों के परीक्षण के साथ कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए वित्तीय सवालों की वास्तविक स्थिति क्या है।

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