रेलवे में सफेद नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों के कमर्शियल इस्तेमाल पर उठे सवाल
एसोसिएशन ने जीएम को सौंपा ज्ञापन, परमिट-फिटनेस और बीमा की जांच की मांग
दैनिक रेवांचल टाईम्स - जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे में अधिकारियों एवं शासकीय कार्यों के लिए अनुबंधित निजी वाहनों के उपयोग को लेकर सवाल उठे हैं। एसोसिएशन ने सफेद नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों के कथित व्यावसायिक एवं शासकीय उपयोग का मुद्दा उठाते हुए पश्चिम मध्य रेलवे के जनरल मैनेजर को ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अंकुश चौधरी ने अनुबंधित वाहनों के पंजीयन, परमिट, फिटनेस और बीमा सहित आवश्यक दस्तावेजों की जांच की मांग की है।
रेलवे में नियमों के उल्लंघन का दावा एसोसिएशन की ओर से किया गया है। संबंधित वाहनों की वास्तविक पंजीयन श्रेणी, परमिट तथा अनुबंध की शर्तों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सफेद और पीली नंबर प्लेट को लेकर उठाया सवाल
ज्ञापन में एसोसिएशन ने निजी और व्यावसायिक वाहनों की श्रेणी को लेकर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का आरोप है कि रेलवे में अधिकारियों एवं अन्य शासकीय कार्यों के लिए कुछ ऐसे वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो निजी श्रेणी में पंजीकृत हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि ऐसे वाहनों का इस्तेमाल किराये अथवा व्यावसायिक परिवहन के रूप में हो रहा है तो संबंधित वाहन की वैधानिक स्थिति तथा उसके लिए आवश्यक परमिट, फिटनेस और बीमा दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।
निजी श्रेणी में पंजीकृत वाहन यदि सरकारी अनुबंध के तहत नियमित रूप से उपयोग किया जा रहा है, तो उसका वैधानिक आधार और आवश्यक दस्तावेज क्या हैं?
दुर्घटना हुई तो जिम्मेदारी किसकी?
एसोसिएशन ने ज्ञापन में दुर्घटना की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाया है। उसका कहना है कि यदि किसी अनुबंधित वाहन के आवश्यक दस्तावेजों में कमी हो और उससे दुर्घटना हो जाए तो उससे उत्पन्न कानूनी एवं वित्तीय जवाबदेही किसकी होगी, यह रेलवे प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए।
ज्ञापन में यह भी पूछा गया है कि रेलवे द्वारा अनुबंधित वाहनों को काम पर लेने से पहले उनके पंजीयन, परमिट, फिटनेस, बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया जाता है तथा बाद में इनकी वैधता की निगरानी की क्या व्यवस्था है।
सरकारी राजस्व का मुद्दा भी उठाया
एसोसिएशन ने मामले को सरकारी राजस्व से भी जोड़ा है। उसका तर्क है कि यदि कोई वाहन निजी श्रेणी में पंजीकृत होने के बावजूद ऐसी गतिविधि में इस्तेमाल हो रहा है जिसके लिए अलग कर, परमिट अथवा अन्य वैधानिक आवश्यकताएं लागू होती हैं, तो इसकी जांच संबंधित सक्षम प्राधिकारी से कराई जानी चाहिए।
अंकुश चौधरी ने मांग की है कि पश्चिम मध्य रेलवे में अधिकारियों एवं शासकीय कार्यों के लिए अनुबंधित वाहनों के दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि उन्हें किन नियमों, अनुबंध शर्तों और अनुमतियों के आधार पर उपयोग में लिया जा रहा है।
जीएम से मांगा स्पष्ट जवाब
1. अनुबंधित वाहनों के पंजीयन की श्रेणी और उपयोग की प्रकृति का सत्यापन कैसे किया जाता है?
2. आवश्यक परमिट, फिटनेस और बीमा दस्तावेजों की जांच किस अधिकारी अथवा शाखा की जिम्मेदारी है?
3. अनुबंध के दौरान इन दस्तावेजों की वैधता का नियमित सत्यापन होता है या नहीं?
4. आवश्यक दस्तावेजों में कमी वाले वाहन से दुर्घटना होने की स्थिति में जवाबदेही कैसे तय होगी?
5. एसोसिएशन की शिकायत में उल्लिखित वाहनों की जांच कराई जाएगी या नहीं?
उच्च स्तर पर मामला उठाने की चेतावनी
एडवोकेट अंकुश चौधरी ने कहा कि एसोसिएशन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि रेलवे में नियमों के पालन और व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो उसे सुधारा जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने कहा है कि रेलवे प्रशासन द्वारा स्थिति स्पष्ट नहीं किए जाने अथवा आवश्यक कार्रवाई नहीं होने पर मामले को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ये रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान एडवोकेट राहुल अगरिया, एडवोकेट विनय सोनकर, एडवोकेट मोहित प्यासी, एडवोकेट रोहित गुप्ता, एडवोकेट जितेंद्र सिंह, एडवोकेट रशीद खान, एडवोकेट इमरान खान, एडवोकेट सनी पसेरिया, राहुल झरिया, अजय यादव, अनुज पटेल, शिवेंद्र मिश्रा, सौरभ सोनकर, नितेश भरतिया, एडवोकेट अनुराग मरावी, एडवोकेट अनुज जिज्ञासु, अबराज सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
एसोसिएशन की ओर से उठाए गए आरोपों और सवालों पर पश्चिम मध्य रेलवे का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित अनुबंधित वाहनों के उपयोग और दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति क्या है।
