नैनपुर छात्रावास कांड में बड़ी कार्रवाई: अधीक्षक अनिल उइके निलंबित, 8 छात्र निष्कासित
चोरी के शक में तीन जूनियर छात्रों से मारपीट और हाथों पर जलते अंगारे रखने का मामला; विभागीय जांच के बाद कार्रवाई
मंडला/नैनपुर। नैनपुर विकासखंड के पाठासिहोरा स्थित राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह शासकीय जनजातीय बालक छात्रावास में जूनियर विद्यार्थियों के साथ हुई कथित मारपीट और प्रताड़ना के मामले में जनजातीय कार्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच के बाद छात्रावास अधीक्षक अनिल कुमार उइके को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं मारपीट और अनुशासनहीनता में शामिल पाए गए 8 छात्रों को छात्रावास से निष्कासित किया गया है।
मामला 21 सितंबर की रात का बताया गया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, छात्रावास में रहने वाले तीन जूनियर विद्यार्थियों पर रुपए चोरी करने का संदेह जताया गया। आरोप है कि इसके बाद कुछ सीनियर छात्रों ने उन्हें रात में उठाकर बेल्ट से पीटा और उनकी हथेलियों पर सुलगते अंगारे रखे।
घटना के बाद बच्चों के हाथों पर चोट और जलने के निशान सामने आए। परिजनों तक जानकारी पहुंचने के बाद मामला छात्रावास से बाहर आया और विद्यार्थियों की सुरक्षा तथा छात्रावास की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।
विभागीय जांच से जुड़ी सामने आई जानकारी के अनुसार घटना की रात चौकीदार ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जबकि छात्रावास अधीक्षक अनिल कुमार उइके भी बिना पूर्व सूचना मुख्यालय से अनुपस्थित पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि छात्रों के बीच हुई गंभीर घटना की जानकारी समय रहते उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई गई।
जनजातीय कार्य विभाग ने छात्रावास जैसी संवेदनशील संस्था में विद्यार्थियों की सुरक्षा, निगरानी और घटना की सूचना देने में सामने आई लापरवाही को गंभीरता से लिया। विभागीय कार्रवाई के तहत माध्यमिक शिक्षक एवं छात्रावास अधीक्षक अनिल कुमार उइके को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
मामले में केवल प्रशासनिक स्तर पर ही कार्रवाई नहीं हुई है। जांच में मारपीट और अनुशासनहीनता में शामिल पाए गए 8 विद्यार्थियों को छात्रावास से निष्कासित कर दिया गया है। चूंकि मामला नाबालिग विद्यार्थियों से संबंधित है, इसलिए उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
इस घटना ने छात्रावासों में रात के समय विद्यार्थियों की सुरक्षा, अधीक्षक और चौकीदार की अनिवार्य उपस्थिति तथा जूनियर विद्यार्थियों की निगरानी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी गंभीर घटना छात्रावास के भीतर कैसे हुई और समय रहते जिम्मेदारों तक इसकी जानकारी क्यों नहीं पहुंची, इन पहलुओं पर भी जवाबदेही तय किए जाने की आवश्यकता सामने आई है।
सरकारी छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थी विभाग की प्रत्यक्ष देखरेख में होते हैं। ऐसे में परिसर के भीतर विद्यार्थियों के साथ हिंसा की घटना को रोकने के लिए नियमित निगरानी, रात्रिकालीन उपस्थिति और शिकायत की तत्काल रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बेहद जरूरी है।
अधीक्षक के निलंबन और 8 छात्रों के निष्कासन के बाद अब सवाल यह है कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए जिले के छात्रावासों में सुरक्षा और रात्रिकालीन निगरानी व्यवस्था को कितना मजबूत किया जाता है।
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