एसडीएम घुघरी के खिलाफ पटवारी संघ ने खोला मोर्चा
कलेक्ट्रेट पहुंचा पटवारियों का हुजूम, दुर्व्यवहार, दबाव और कथित धमकी के लगाए गंभीर आरोप
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला। जिले में पटवारी और प्रशासन के बीच चल रहा टकराव अब खुलकर सामने आने लगा है। कुछ दिन पहले मंडला एसडीएम के विरोध में पटवारियों के कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद शनिवार को घुघरी एसडीएम के खिलाफ भी पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया।
जिला पटवारी संघ अध्यक्ष गीतेन्द्र ‘गीतू’ बैरागी के नेतृत्व में घुघरी क्षेत्र के दर्जनों पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर एसडीएम घुघरी संस्कार बावेरिया की कार्यप्रणाली एवं कथित आचरण को लेकर सवाल उठाए।
दुर्व्यवहार, दबाव, अपमान और कथित धमकी का आरोप
पटवारी संघ ने ज्ञापन में दुर्व्यवहार, अनावश्यक दबाव, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, मानसिक प्रताड़ना तथा कथित धमकी जैसे आरोप लगाए हैं। संघ ने संबंधित कार्रवाई को निरस्त करने और एसडीएम के कथित आचरण की समीक्षा किए जाने की मांग की है।
स्वामित्व योजना बनी टकराव की वजह?
ज्ञापन में पटवारी संघ ने कहा है कि प्रांतीय आह्वान के तहत पटवारी स्वामित्व योजना से संबंधित कार्यों से पृथक हैं और इसकी जानकारी जिला कार्यालय मंडला तथा तहसील स्तर पर पूर्व में ज्ञापनों के माध्यम से दी जा चुकी है।
संघ का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित पटवारियों पर योजना का काम करने के लिए लगातार दबाव बनाया गया। संघ ने इसी मुद्दे को वर्तमान विवाद की प्रमुख वजह बताया है।
मुंगवानी की घटना को लेकर गंभीर आरोप
ज्ञापन के अनुसार ग्राम पंचायत मुंगवानी में पटवारी अनिल नंदा से संबंधित घटना को लेकर संघ ने आरोप लगाया है कि उन पर कार्य करने के लिए कथित रूप से दबाव बनाया गया। विरोध करने पर नायब तहसीलदार मोहगांव के समक्ष निलंबित कराने की धमकी तथा अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है।
शाम 7 बजे फोन, फिर कार्रवाई का आरोप
संघ के अनुसार ग्राम देवगांव, पटवारी हल्का नंबर 27, राजस्व निरीक्षक मंडल मोहगांव के पटवारी धनश्याम आर्मो पर शाम करीब 7 बजे कार्य को लेकर दबाव बनाया गया। संघ का आरोप है कि कार्य करने से इनकार के बाद नायब तहसीलदार मोहगांव के फोन से कथित रूप से धमकी दी गई।
ज्ञापन में दावा किया गया है कि इसके बाद स्वामित्व योजना सहित अन्य कार्यों का हवाला देते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई। संघ अब इस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
निलंबन आदेश पर सवाल—क्या बिना नोटिस सीधे कार्रवाई हुई?
पटवारी संघ ने संबंधित निलंबन आदेश की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संघ के मुताबिक फार्मर आईडी, सीएम हेल्पलाइन और स्वामित्व योजना से जुड़े मामलों को कार्रवाई का आधार बनाया गया।
संघ का दावा है कि निलंबन आदेश में सीएम हेल्पलाइन की तीन शिकायतों का उल्लेख किया गया, जबकि ये शिकायतें कथित रूप से एक ही परिवार के सदस्यों की थीं। संघ ने शिकायतों की परिस्थितियों और उनकी वास्तविकता की समीक्षा की मांग भी उठाई है।
पटवारी संघ ने कार्रवाई को प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए पूर्व में जारी शासन के पत्र का हवाला दिया है। संबंधित कार्रवाई की वैधानिकता का अंतिम निर्धारण सक्षम प्रशासनिक अथवा न्यायिक प्राधिकारी के रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर ही होगा।
पटवारी संघ के प्रमुख आरोप और मांगें
- दुर्व्यवहार एवं अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप।
- अनावश्यक दबाव बनाकर कार्य कराने की कोशिश का दावा।
- निलंबित कराने की कथित धमकी का आरोप।
- निलंबन आदेश की प्रक्रिया पर सवाल।
- सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की परिस्थितियों पर सवाल।
- संबंधित कार्रवाई एवं एसडीएम के कथित आचरण की समीक्षा की मांग।
अब सवाल सिर्फ पटवारियों का नहीं, प्रशासनिक प्रक्रिया का भी
घुघरी तहसील के पटवारियों में संबंधित कार्रवाई को लेकर नाराजगी सामने आई है। एक ओर पटवारी संघ अपने सदस्यों पर अनावश्यक दबाव और कथित अभद्र व्यवहार के आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर की गई कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
ज्ञापन में लगाए गए आरोपों पर क्या होगी कार्रवाई?
कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि संघ द्वारा लगाए गए आरोपों और निलंबन प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है। आरोपों की पुष्टि या खंडन संबंधित रिकॉर्ड, विभागीय जांच और प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
