निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया की बढ़ीं मुश्किलें, गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी
सह-आरोपियों के खिलाफ भी वारंट, ₹10 हजार का इनाम; हाईकोर्ट में 21 सितंबर को सुनवाई, LOC की प्रक्रिया की भी चर्चा
मुख्य बातें
- नेहा पच्चीसिया के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी होने का उल्लेख।
- सह-आरोपी क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ हनफी के खिलाफ भी वारंट।
- मामला कुठला थाना, अपराध क्रमांक 738/2026 से संबंधित बताया गया है।
- नेहा पच्चीसिया की गिरफ्तारी पर ₹10,000 का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी।
- हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में 21 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई।
कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के बीच निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया से संबंधित मामले में नए दस्तावेज सामने आने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। सामने आए दस्तावेजों के अनुसार नेहा पच्चीसिया के साथ सह-आरोपी क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ हनफी के खिलाफ भी अलग-अलग गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं।
गिरफ्तारी वारंट के बाद बढ़ी कानूनी सरगर्मी
उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक शुक्रवार देर शाम सार्वजनिक हुए पुलिस दस्तावेजों पर 18 सितंबर 2026 की तारीख दर्ज है। वारंट में संबंधित थाना पुलिस और जांच अधिकारियों को आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए जाने का उल्लेख है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के प्रावधान लगाए जाने की बात कही गई है। वारंट जारी होने के बाद पुलिस की आगे की कार्रवाई पर भी निगाह बनी हुई है।
21 सितंबर को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई
पुलिस कार्रवाई के बीच निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में याचिका दायर कर कार्रवाई को चुनौती दी गई है। दी गई जानकारी के अनुसार WP No. 37216 of 2026 पर सुनवाई करते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने राज्य शासन और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है।
मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित बताई गई है। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत पर भी न्यायालय के समक्ष विचार हो सकता है।
₹10 हजार का इनाम, LOC को लेकर भी हलचल
मामले में नेहा पच्चीसिया को निलंबित किए जाने के बाद पुलिस द्वारा उनकी तलाश की जा रही है। उनकी सुरागकशी और गिरफ्तारी के लिए ₹10,000 का नकद इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि देश छोड़कर जाने की आशंका को देखते हुए पुलिस स्तर पर लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि इस संबंध में अंतिम आधिकारिक स्थिति संबंधित सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
नेहा पच्चीसिया की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने न्यायालय के समक्ष कार्रवाई को चुनौती देते हुए अपना पक्ष रखा है।
बचाव पक्ष की प्रमुख दलीलें
- याचिकाकर्ता को कथित रूप से दुर्भावनापूर्ण तरीके से मामले में फंसाए जाने का दावा।
- शुरुआती एफआईआर में सीधी भूमिका या आपराधिक षड्यंत्र के ठोस आधार नहीं होने की दलील।
- अन्य सह-आरोपियों के साथ प्रत्यक्ष संबंध अथवा सांठगांठ रिकॉर्ड पर नहीं होने का दावा।
- अंतिम निर्णय तक कठोर या दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने की मांग।
दो बच्चों की एकल अभिभावक होने का पक्ष भी रखा
बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि याचिकाकर्ता दो छोटे बच्चों की एकल अभिभावक हैं। वकीलों की ओर से दलील दी गई कि मौजूदा कानूनी कार्रवाई के कारण बच्चों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। इसी आधार पर अंतिम निर्णय तक किसी कठोर अथवा coercive कार्रवाई से संरक्षण की मांग की गई है।
अब कोर्ट और पुलिस के अगले कदम पर नजर
गिरफ्तारी वारंट जारी होने और हाईकोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख करीब आने से यह मामला एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। अब निगाहें 21 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट में होने वाली कार्यवाही और उसके बाद पुलिस द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर रहेंगी।
