डिंडौरी के साल जंगलों पर ‘बोरर’ का हमला, 19.50 लाख कीट किए नष्ट
डेढ़ लाख से अधिक पेड़ों पर लाल निशान लगाए जाने का दावा, 1997-98 के महासंकट की याद ने बढ़ाई चिंता
डिंडौरी। जिले के समृद्ध और घने साल (सखुआ) जंगलों में साल बोरर (Hoplocerambyx spinicornis) के बढ़ते प्रकोप ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वस्थ साल वृक्षों को संक्रमण से बचाने की कवायद के तहत जिले के आठ विशेष संग्रहण केंद्रों पर ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए करीब 19 लाख 50 हजार कीटों को गुरुवार को नष्ट किया गया।
एकत्र किए गए कीटों की मालाएं बनाकर उन्हें लकड़ियों के बीच रखा गया और पंचनामा तैयार करने के बाद नष्ट करने की कार्रवाई की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अकेले करंजिया संग्रहण केंद्र पर करीब 3 लाख 50 हजार कीट नष्ट किए गए।
कीट नष्ट
पर कार्रवाई
पेड़ चिन्हित होने का दावा
डीएफओ अशोक कुमार सोलंकी के अनुसार मानसून की शुरुआती बारिश के आसपास साल बोरर पेड़ों के तनों से बाहर निकलकर स्वस्थ साल वृक्षों में अंडे देता है। अंडों से निकलने वाले लार्वा तने के भीतर प्रवेश कर पेड़ को अंदर से नुकसान पहुंचाते हैं। गंभीर संक्रमण की स्थिति में पेड़ धीरे-धीरे सूख सकता है।
वन विभाग की ओर से कबीर गांव, जगतपुर, चौरादादर, करंजिया, खारी डीह, गोपालपुर, गौरा कन्हारी और ठाड़ पत्थरा में संग्रहित कीटों को पंचनामे की मौजूदगी में नष्ट करने की कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।
1997-98 के प्रकोप की याद ने बढ़ाई चिंता
उपलब्ध विवरण के अनुसार साल बोरर का बड़ा प्रकोप वर्ष 1997-98 में तत्कालीन मंडला-डिंडौरी क्षेत्र में भी सामने आया था। उस दौरान बड़े वन क्षेत्र में लाखों साल वृक्ष प्रभावित हुए थे और व्यापक स्तर पर कीट नियंत्रण एवं प्रभावित पेड़ों को हटाने की कार्रवाई की गई थी।
कबीर वन परिक्षेत्र में प्रभावित पेड़ों की कटाई शुरू
कबीर वन परिक्षेत्र में चिन्हित प्रभावित पेड़ों को हटाने का काम शुरू होने की जानकारी है। वन अमले और कार्य में लगे मजदूरों के अनुसार पहले चरण में चार हजार से अधिक चिन्हित पेड़ों को काटा जा रहा है। प्रभावित तनों की कटाई के दौरान लकड़ी का बुरादा और जीवित कीट मिलने की बात भी सामने आई है।
उपलब्ध जानकारी में दावा किया गया है कि जिले में करीब डेढ़ लाख से अधिक पेड़ों को लाल निशान लगाकर चिन्हित किया जा चुका है और प्रभावित पेड़ों को दिसंबर तक हटाने की योजना है। इतने बड़े आंकड़े को देखते हुए वास्तविक प्रभावित क्षेत्र, पेड़ों की संख्या और कटाई की अंतिम सीमा वन विभाग के आधिकारिक आकलन से स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।
साल बोरर के प्रकोप के बीच वन विभाग के सामने संक्रमित वृक्षों की पहचान, कीट नियंत्रण और स्वस्थ साल वृक्षों को संक्रमण से बचाना बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले महीनों में संक्रमण की वास्तविक व्यापकता और नियंत्रण अभियान के परिणाम पर नजर रहेगी।
