परिवारजनों एवं ग्रामीणों के साथ विधि-विधान से किया बैल पूजन,ग्रामीण संस्कृति और किसान परंपराओं को बताया हमारी पहचान
रेवांचल टाइम्स सौसर
भारतीय जनता पार्टी जिला पांढुर्णा के जिला अध्यक्ष संदीप मोहोड ने अपने पैतृक ग्राम मुंगोरली पहुंचकर परिवारजनों एवं ग्रामवासियों के साथ पारंपरिक उत्साह, श्रद्धा और आत्मीयता के साथ पोला पर्व मनाया। अपने पैतृक गांव की मिट्टी,संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से गहरा जुड़ाव रखने वाले श्री संदीप मोहोड ने गांव पहुंचकर पोला पर्व की पारंपरिक रीति-रिवाजों में सहभागिता की तथा विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक बैल पूजन किया।
पोला पर्व के अवसर पर पूरा मुंगोरली गांव पारंपरिक उत्साह से सराबोर नजर आया। गांव में किसानों और ग्रामीण परिवारों ने अपने-अपने बैलों को सजाया तथा उनकी पूजा-अर्चना कर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। इसी पारंपरिक वातावरण के बीच जिला अध्यक्ष संदीप मोहोड ने भी अपने परिवार के साथ पोला पर्व मनाते हुए अपनी पारिवारिक एवं ग्रामीण जड़ों से जुड़े संस्कारों को जीवंत किया।
पैतृक ग्राम मुंगोरली से विशेष आत्मीय जुड़ाव
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष संदीप मोहोड ने कहा कि पैतृक ग्राम केवल एक गांव नहीं होता,बल्कि यह हमारे परिवार की जड़ों, संस्कारों, स्मृतियों और अपनी मिट्टी से जुड़े भावनात्मक रिश्ते का प्रतीक होता है। मुंगोरली मेरी पैतृक भूमि है और इस गांव की मिट्टी, यहां के लोगों और यहां की परंपराओं से मेरा विशेष आत्मीय जुड़ाव है। अपने गांव में परिवार और ग्रामीणजनों के साथ पारंपरिक पर्व मनाने का आनंद और अपनापन अलग ही होता है।
उन्होंने कहा कि बचपन से चली आ रही गांव की परंपराएं और पारिवारिक संस्कार जीवन में हमेशा विशेष स्थान रखते हैं। पैतृक ग्राम की संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाना केवल हमारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हमारे संस्कारों और अपनी जड़ों के प्रति सम्मान भी है।
किसान और बैल के रिश्ते का पर्व है पोला
जिला अध्यक्ष संदीप मोहोड ने कहा कि पोला पर्व हमारी कृषि प्रधान भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है। किसान के जीवन में बैलों का सदियों से विशेष महत्व रहा है। खेतों में किसान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत करने वाले बैलों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करने का यह पर्व हमारी ग्रामीण जीवनशैली की सुंदर परंपरा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में खेती के तौर-तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन किसान, खेती, पशुधन और प्रकृति के बीच का संबंध आज भी हमारी ग्रामीण संस्कृति की आत्मा है। पोला जैसे लोकपर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को हमारी गौरवशाली परंपराओं एवं संस्कारों से परिचित कराते हैं।
परंपराओं को जीवंत रखना हम सभी का दायित्व
मोहोड ने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हमारी पुरानी परंपराएं और लोकपर्व समाज को एक साथ जोड़ने का कार्य करते हैं। ऐसे पर्वों के माध्यम से परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और ग्रामीणजन एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां साझा करते हैं। इससे सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा और ग्रामीण एकता भी मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए भी हम अपनी जड़ों और परंपराओं को नहीं भूलते। आने वाली पीढ़ियों को भी इन पर्वों के महत्व और हमारी ग्रामीण विरासत से जोड़ना आवश्यक है।
पैतृक ग्राम मुंगोरली में परिवारजनों एवं ग्रामवासियों के बीच पोला पर्व मनाते हुए जिला अध्यक्ष संदीप मोहोड ने सभी किसान भाइयों, मातृशक्ति, युवाओं एवं समस्त ग्रामवासियों को पोला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर मोहोड परिवार के सदस्य, ग्राम के वरिष्ठजन, किसान भाई, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।