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प्रशासनिक मिलीभगत या भू-माफिया का दबाव? जांच के बाद भी रोक हटी, अवैध कॉलोनी मामले में फैसले की जगह राहत से उठे सवाल

 




दैनिक रेवाँचल टाईम्स - विशेष संवाददाता, निवास मंडला जिले मुख्यालय से लेकर विकास खंड और फिर गांव कस्बों तक भू माफियाओं का साम्राज्य फैला हुआ है और अवैध निर्माण कब्जा प्लाटिंग जैसे काम जोरो पर है और स्थानीय प्रशासन जिला प्रशासन और जिम्मेदार मोंन साधे नज़र आ रहे हैं और जिससे अबेध गतिविधियां तेज़ी बढ़ रही हैं!




     वही सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार निवास क्षेत्र में फल-फूल रहे अवैध प्लॉटिंग और बिना वैधानिक स्वीकृतियों के कॉलोनियां विकसित करने के खेल में अब नया मोड़ आ गया है। एक तरफ जहां राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट में बिना डायवर्जन, बिना टीएनसीपी (TNCP) ले-आउट और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में प्लॉट बेचने की पुष्टि हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर मामले पर ठोस फैसला सुनाने के बजाय पूर्व में लगाई गई रोक को ही हटा दिया गया है। प्रशासन के इस रुख से स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं में भारी रोष है और अब सीधे तौर पर प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

जांच में पुष्टि, फिर भी मेहरबानी क्यों?

ग्राम आमाडोंगरी वार्ड क्रमांक 02और तालाब मोहल्ला (वार्ड क्रमांक 08) में अवैध कॉलोनी निर्माण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई थी। इसके बाद हुई मौका जांच में यह साफ हो गया था कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के दर्जनों प्लॉट बेचे जा रहे हैं। जांच के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि भू-माफियाओं पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी और अवैध रजिस्ट्रियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा।

लेकिन इसके विपरीत, पूर्व में लगाई गई रोक को हटा दिए जाने से अब कई तरह की चर्चाएं गर्म हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जांच में ही अनियमितताएं सिद्ध हो चुकी हैं, तो रोक हटाने का आधार क्या है? क्या यह प्रशासनिक ढिलाई है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी अंदरूनी साठगांठ है?

जनता में गहराता अविश्वास

रोक हटने के बाद क्षेत्र में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी भी भू-माफियाओं के इस कारोबार में किसी न किसी रूप में शामिल हैं? या फिर इस बेखौफ अवैध कारोबार में किसी का अप्रत्यक्ष निवेश जुड़ा हुआ है, जिसके दबाव में नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया गया?

नागरिकों का कहना है कि यदि सरकारी जांच रिपोर्टों का भी यही हश्र होना है, तो आम जनता की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

वरिष्ठ स्तर पर शिकायत की तैयारी

रोक हटाए जाने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिशों से नाराज शिकायतकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने अब इस पूरे प्रकरण को उच्च स्तर पर ले जाने का मन बना लिया है। बताया जा रहा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच और अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए संभागायुक्त, कलेक्टर मंडला, लोकायुक्त तथा ईओडब्ल्यू (EOW) का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जा रही है।

अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस मामले पर संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करता है या फिर भू-माफिया इसी तरह प्रशासनिक तंत्र को ठेंगा दिखाते रहेंगे।

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