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श्रावण मास का आध्यात्मिक अर्थ


दैनिक रेवांचल टाईम्स - श्रावण शब्द श्रवण से बना है जिसका अर्थ है सुनना यह महीना आध्यात्मिक कथाएं ज्ञान और ईश्वर का गुणगान करने के लिए समर्पित है जिस प्रकार वर्षा तपती धरती को ठंडक पहुंचाती है उसी प्रकार ज्ञान का श्रवण हमारे अशांत मन को विश्राम और शांति प्रदान करता है




 पंडित संदीप ज्योतिषी ही ने बताया किसावन के पहले दिन आयुष्मान योग का निर्माण हो रहा है योग को उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु प्रदान करने वाला माना गया है इस योग में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना और महामृत्युंजय का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी होता है


 श्रावण मास का महत्व


 सावन में रुद्राभिषेक सामूहिक पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन बेलपत्र अर्पण सावन सोमवार व्रत महामृत्युंजय जाप तथा शिव महापुराण कथा श्रवण का विशेष धार्मिक महत्व है इस मास में किए गए धार्मिक अनुष्ठानों को अत्यंत पुंडी माना जाता है सावन भर भगवान शिव की उपासना करना विशेष फलदाई माना जाता है श्रावण मास में सत्संग मोन और ध्यान सेवा भजन कीर्तन आध्यात्मिक कथाएं सुनना मन और आत्मा के लिए लाभदायक है 


 तीन पत्तियों वाला बेलपत्र का महत्व


 शिव महापुराण के अनुसार बेलपत्र की तीन पत्तियां सृष्टि के तीन गुण सत्व रज़ और तम का प्रतिनिधित्व करती हैं सतव त्शुद्धता और ज्ञान का प्रतीक है रज क्रियाशीलता और ऊर्जा का जबकि तम स्थिरता और विश्राम का दोतक माना जाता है भगवान शिव इन तीनों गुना से परे माने जाते हैं ऐसे में जब भक्त बेलपत्र अर्पित करता है तो वह अपने भीतर मौजूद इन सभी गुनौ को  भगवान को समर्पित करने का भाव व्यक्त करता है बेलपत्र की तीन पत्तियों को ब्रह्मा विष्णु महेश का स्वरूप भी माना गया है यानी एक ही पत्ती के माध्यम से सृजन पालन और संहार की शक्तियों का सम्मान किया जाता है यही कारण है कि शिव पूजन में इसे अत्यंत शुभ और अनिवार्य माना गया है हमेशा साफ ताजी और बिना कटे-फटे बेलपत्र ही चढ़ाने चाहिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र को भगवान शिव का प्रिया माना गया है कहा जाता है कि बेल वृक्ष की उत्पत्ति माता लक्ष्मी की तपस्या से हुई थी इसलिए यह है अत्यंत पवित्र माना जाता है मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से चढ़ाया गया बिलपत्र भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करता है और भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति करता है बेलपत्र भगवान शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक मानी जाती है जो ज्ञान शक्ति और विवेक का प्रतिनिधित्व करती है इसलिए तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करना पूर्ण पूजा का प्रतीक माना जाता है


 पार्थिव शिवलिंग का महत्व 


 श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है इस पावन काल में श्रद्धा पूर्वक अपने हाथों से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करना तथा उसका विधिवत पूजन रुद्राभिषेक करना अत्यंत फलदाई एवं कल्याणकारी माना गया है पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करने वाले भक्तों के विषय में कहा जाता है कि उनके हाथों की अमंगलकारी हस्तरेखाएं मिटाने लगती है और भगवान शिव की कृपा उनके जीवन में मंगल सौभाग्य एवं आध्यात्मिक उन्नति का संचार करती हैं

30 जुलाई से 28 अगस्त तक भगवान शिव की आराधना करें 


  भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार 30 जुलाई से  प्रारंभ हो रहा श्रावण मास अनेक अद्भुत और दुर्लभ ग्रह नक्षत्र के संयोगों से युक्त रहेगा 

  पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया इस बार श्रवण की शुरुआत अकल्पनीय महायोग के साथ के  हो रही है पूरे श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार पर भी विशेष शुभ योग का निर्माण हो रहा है ऐसे में भगवान शिव को प्रिय यह महीना जलाभिषेक रुद्राभिषेक महामृत्युंजय जाप तथा भगवान शिव की साधना आराधना का महीना माना जाता है इसमें शुरू की गई शिव आराधना निश्चित ही मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है कोई भी भक्त 30 जुलाई से 28 अगस्त श्रावण पूर्णिमा तक भक्ति भाव से यथा विधि अगर भगवान शिव की आराधना करें तो इच्छित फल की प्रति कर सकते हैं श्रवण के इस मास में चार सोमवार पड़ेंगे और हर सोमवार विशेष महासंयोग से युक्त रहेंगे 

     ‌‌ पंडित संदीप ज्योतिषी अमरकटंक ने बताया कि 3 अगस्त को श्रावण महीने का पहला सोमवार शुक्रमा और धति योग का अद्भुत संगम इस दिन आरोग्य व सौभाग्य की वृद्धि के लिए शिव की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी 

10 अगस्त श्रावण महीने का दूसरा सोमवार सोम प्रदोष का महासंयोग श्रावण मास में शिव को प्रिय वार और तिथि का एक साथ होना महासौभाग्य माना जाता है इस दिन रुद्राभिषेक करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है 

17 अगस्त श्रवण का तीसरा सोमवार व नाग पंचमी एक ही दिन  होगा कालसर्प दोष निवारण तथा विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए सबसे चमत्कारी दिन माना गया है 

24 अगस्त श्रवण का चौथा सोमवार श्रावण महीने का आखिरी सोमवार होने से यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का आखिरी विशेष अवसर

 होगा इस दिन शिव को प्रिय सभी विशेष सामग्री अर्पण करें तथा फल प्राप्ति की प्रार्थना करें

12 अगस्त सावन शिवरात्रि श्रवण महीने की दुर्लभ तिथि मानी जाती है इस दिन 4:30 से सुबह सूर्योदय तक शिव पूजा अर्चना करने से सभी संकट तथा असाध्य रोग दूर होते हैं

सोमवार को 11 दाना चावल भगवान शिव पर चढ़ाये 

 मंगलवार को 11 दाना लौंग भगवान शिव पर चढ़ाये 

 बुधवार को 11 दाना इलायची भगवान शिव पर चढ़ाये 

 गुरुवार को 11 दाना चना दाल भगवान शिव पर चढ़ाये 

 शुक्रवार को 11 दाना खड़ी मूंग भगवान शिव पर चढ़ाये 

 शनिवार को 11 दाना काला तिल चढ़ाये 

 रविवार को समस्त मनोकामना पूर्ण करने के लिए शहद भगवान शिव पर अर्पित करें।

 रुद्राभिषेक का महत्व

 शिवलिंग पर जल दूध घृत शक्कर शहद गंगाजल और फलों के रस से स्नान करने की प्रक्रिया को रुद्राभिषेक कहा जाता है रुद्राभिषेक का अर्थ है अपने भीतर की मेल नकारात्मकता अहंकार और विकारों का समन करना जिस प्रकार जल लगातार शिवलिंग पर गिरकर उसे शीतलता प्रदान करता है उसी प्रकार निरंतर साधना और ईश्वर का स्मरण हमारे विचलित मन को शांत और स्थिर करता है

सोमवार व्रत का विधान

 सावन की प्रत्येक सोमवार को विशेष व्रत रखे जाते हैं सोमवार का दिन चंद्रमा से संबंधित है और शिव अपने मस्तक पर चंद्र को धारण करते हैं चंद्रमा मन का कारक है सावन सोमवार का व्रत रखने से मन पर नियंत्रण प्राप्त होता है अनिद्रा तनाव और मानसिक अशांति दूर होती है भकत अपनी इंद्रियों को वश में करना सीखता है

वही पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि सावन का महीना एक मौसम या पंचांग की तिथि नहीं है बल्कि यह जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और चेतना के विस्तार का आधार है यह हमें सिखाता है कि परिवर्तन ही संसार का नियम है और कठिन दोऱ के बाद सुखद और आनंद दायक समय अवश्य आता है यह श्रावण मास हमें हमारी संस्कृति पर्यावरण और आंतरिक ऊर्जा के करीब लाता है जिससे मनुष्य एक संतुलित स्वस्थ और आनंदमय जीवन की ओर अग्रसर होता है।

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