जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मंडला एवं संस्था आवाज के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न, पॉक्सो कानून और बाल अधिकारों पर विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी
दैनिक रेवांचल टाईम्स - मंडला।बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, त्वरित सहायता और विधिक सहयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) मंडला एवं संस्था आवाज के संयुक्त तत्वावधान में होटल पर्ल रेजीडेंसी में पैरा लीगल वालंटियर्स (पीएलवी) का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में बाल अधिकार, लैंगिक शोषण, पॉक्सो अधिनियम तथा पीड़ित बच्चों को मिलने वाली कानूनी एवं मनोसामाजिक सहायता पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए जिला विधिक सहायता अधिकारी विजय खोबरागड़े ने कहा कि बच्चों के मुद्दे अत्यंत संवेदनशील हैं, विशेषकर तब जब कोई बच्चा लैंगिक शोषण का शिकार हुआ हो। ऐसे मामलों में पैरा लीगल वालंटियर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि पीएलवी बच्चों और न्याय व्यवस्था के बीच एक मजबूत सेतु बनकर उन्हें कानूनी, सामाजिक और मनोसामाजिक सहायता दिलाने में अहम योगदान दे सकते हैं।
प्रशिक्षण के मुख्य वक्ता एवं भोपाल से आए संस्था आवाज के निदेशक प्रशांत दुबे ने कहा कि देश में बच्चों के खिलाफ लैंगिक अपराध चिंताजनक स्तर पर हैं। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए बताया कि पीएलवी थाने से लेकर न्यायालय तक पीड़ित बच्चों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि बच्चों पर होने वाले अपराधों के मामलों में मध्यप्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। प्रदेश से प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे लापता होते हैं तथा बाल विवाह और बाल लैंगिक शोषण जैसी गंभीर चुनौतियां आज भी समाज के सामने मौजूद हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय होकर कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति मंडला के अध्यक्ष डॉ. गजेन्द्र गुप्ता ने जिले में बच्चों के संरक्षण हेतु उपलब्ध संस्थागत व्यवस्थाओं और सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल कल्याण समिति प्रथम श्रेणी न्यायिक शक्तियों के साथ चौबीसों घंटे बच्चों से जुड़े मामलों में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्था आवाज के जिला समन्वयक सत्यनारायण डेहरिया ने मंडला जिले की सामाजिक कुरीतियों और स्थानीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कई सामाजिक कारण आज भी बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा में बाधा बनते हैं। उन्होंने पीएलवी की जिम्मेदारियों और पीड़ित बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण में जिले के लगभग 26 पैरा लीगल वालंटियर्स एवं 10 सपोर्ट पर्सन शामिल हुए। संस्था आवाज की ओर से अभिलाषा यादव, आकाश झारिया तथा भोपाल से आईं पवनरेखा बिसेन ने भी फील्ड में कार्य करते समय आने वाली चुनौतियों और अपने अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। कार्यक्रम का संचालन सत्यनारायण डेहरिया ने किया।


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