निजी वाहनों से बेखौफ हो रही शराब की ढुलाई, आखिर कानून व्यवस्था और आबकारी विभाग की नजर ठेकेदारों तक क्यों नहीं पहुंचती?
दैनिक रेवांचल टाइम्स | नैनपुर, मंडला।नैनपुर पुलिस ने आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 11 पेटी अंग्रेजी शराब, ₹30 हजार नकद और एक एक्सयूवी कार के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन इस कार्रवाई ने कई बड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शराब की इतनी बड़ी खेप निजी वाहन से बेखौफ ढोई जा रही थी, तब आखिर यह शराब कहां से आई? यदि शराब वैध ठेके से निकली थी तो संबंधित ठेकेदार, सप्लायर और पूरे नेटवर्क तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही? केवल परिवहन करने वालों को पकड़ लेने से क्या अवैध शराब के कारोबार पर रोक लग पाएगी?
जिले में लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कुछ शराब ठेकों से नियमों की अनदेखी कर भारी मात्रा में शराब निजी वाहनों के जरिए अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाई जाती है। यदि यह सही है तो सवाल उठता है कि क्या आबकारी विभाग और पुलिस की कार्रवाई केवल छोटे खिलाड़ियों तक सीमित है? आखिर उस स्रोत तक जांच क्यों नहीं पहुंचती, जहां से शराब की आपूर्ति शुरू होती है?
यदि शराब का परिवहन वैध था तो निजी एक्सयूवी में क्यों किया जा रहा था? और यदि परिवहन अवैध था तो संबंधित ठेकेदार या आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? यह जांच का विषय है।
जनता यह जानना चाहती है कि अवैध शराब के कारोबार की जड़ पर कब प्रहार होगा? केवल ढुलाई करने वालों की गिरफ्तारी से सिंडिकेट खत्म नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि पुलिस और आबकारी विभाग पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच करें और यदि किसी ठेकेदार या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह मामला केवल तीन गिरफ्तारियों तक सीमित रहेगा या फिर जांच शराब सप्लाई करने वाले पूरे नेटवर्क और उसके जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचेगी।
क्या पुलिस विभाग इन छोटे मोटे लोगों पर कार्यवाही कर खुद की पीठ धपथापती रहेगी और शराब ठेकेदार को अभय दान देते रहेंगे और जिस लाइसेंसी शराब ठेके से शराब लाई गई है उस ठेकेदार को कब तक बख्शी जाएगा ये कानून .....


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