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Wednesday, November 1, 2023

ओरियंट पेपर मिल के कास्टिक सोडा यूनिट (सोडा फैक्ट्री कंपनी) मेन गेट के सामने की सड़क हुई बदहाल और कंपनी हो रही दिनों-दिन मालामाल....


रेवांचल टाईम्स - ओरियंट पेपर मिल के कास्टिक सोडा यूनिट से मेन गेट के सामने की सड़क हुई बदहाल और कंपनी हो रही दिनों-दिन मालामाल होती नजर आ रही है।

        वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नवगठित नगर परिषद बरगवां(अमलाई) क्षेत्रान्तगर्त एशिया के सबसे बड़ा कागज कारखाना ओरियंट पेपर मिल की इकाई कास्टिक सोडा यूनिट (सोडा फैक्ट्री कंपनी) स्थित है कहने को तो कंपनी बहुत बड़ी है लेकिन जब कंपनी के द्वारा आम जनमानस के हितों मे किए जाने वाले मूलभूत सुविधाओं के अनुरूप सामाजिक दायित्वों के काम की बात आती है तो ये बातें छोटी हो जाती है। जहां एक ओर उक्त कंपनी दिन दोगनी रात चौगुनी तेजी के साथ मुनाफा कमाते जा रही है उसके ठीक विपरीत यहां की आमजनता के प्रति उदासीन होते जा रही है कंपनी मुनाफे कमाने में इतना व्यस्त हैं कि उसे यहां की कोई जनसमस्याएं दिखाई ही नहीं दे रही है जबकि इन जनसमस्याओं की जननी खुद सोडा फैक्ट्री कंपनी ही है।

         उक्त कंपनी के मेन गेट के सामने की सड़क पूरी तरह से बदहाल स्थिति में है इस सड़क पर अधिकांशत: सोडा फैक्ट्री कंपनी के ही भारी-भरकम मालवाहक वाहनों की आवाजाही हमेशा बनी रहती है जिसकी वजह से ये सड़क पूरी तरह से जर्जर और गढ्ढो में तब्दील हो गई है चूंकि क्षेत्रवासियों के लिए यही सड़क बकहो होते हुए बुढ़ार व शहडोल जिला मुख्यालय सह संभाग मुख्यालय जाने-आने के लिए मात्र एक ही संपर्क मार्ग है जो कि पूरी तरह से जर्जर हालत में है और इसी जर्जर सड़क के कारण आए दिन कोई न कोई दुर्घटनाएं भी होते ही रहती है। जिससे कंपनी को कोई सरोकार नहीं है।

           सूत्र बताते हैं कि यूं तो सोडा फैक्ट्री कंपनी इस गड्ढे वाली जर्जर सड़क को बड़ी शान से अपने स्वामित्व की सम्पत्ति बताते रहती है लेकिन जब इसे सुधारवाने एवं बनवाने की बातें व प्रस्ताव कंपनी के समाने समाजसेवियों और आमजनो के द्वारा की रखी जाती है तो कंपनी अपना पल्ला झाड़ लेती है। कंपनी की उदासीनता का दंश यहां के क्षेत्रवासी भोगने को विवश हैं कंपनी जनहित में उक्त सड़क का निर्माण न तो स्वयं ही करा रही है न ही किसी और स्थानीय निकाय इत्यादि को कराने दे रही है।

        वही जबकि कंपनी को नियमानुसार सीएसआर फंड से इस जर्जर सड़क को प्राथमिकता देते हुए बनवाया जाना चाहिए लेकिन सूत्र बताते हैं कि कंपनी सीएसआर फंड से किसी भी प्रकार का कोई काम तो करवाती ही नहीं है कंपनी के इस ढुलमुल रवैए को देख कर तो यही लगता है कि कंपनी की तानाशाही के आगे सारे कायदे कानून बौने हो चुके है लेकिन कंपनी यहां धरातल पर मात्र क्षेत्रवासियों को धूल एवं दुर्गंध युक्त हवा इत्यादि की ही सौगात देती आ रही किंतु कागजों में देखा जाए तो अपनी फर्जी कोरमपूर्ति के बल पर हमेशा अपनी पीठ थपथपाने में ही लगे रहती है।

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