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Tuesday, July 4, 2023

पीएम के शहडोल कार्यक्रम में शामिल होने जा रही महिला बस हादसे का हुई शिकार,निवास विधायक मर्सकोले ने की आर्थिक मदद।



अंतिम यात्रा में शामिल डॉ अशोक मर्सकोले,पीएम और सीएम को घेरा।

रेवांचल टाईम्स - मंडला, निवास शहडोल जिले में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यक्रम में मण्डला जिले निवास जनपद पंचायत अन्तर्गत ग्राम मेढी से ग्रामीणों को लेकर जा रही बस दुर्घटना ग्रस्त हो गई जिससे बस में सवार चंद्रवती बाई झारिया,पति द्वारका झारिया उम्र 60 वर्ष निवासी मेढी की घटना स्थल पर मौत हो गई. इस घटना पर निवास विधायक डॉ अशोक मर्सकोले ने दुख जताया और और रविवार को मृतिका के घर उसके अंतिम संस्कार में पहुंचे और परिवार जनों से मिलकर शोक जताया और परिवार को 10 हजार रुपए की राशि दी गई ।


निवास विधायक ने केंद्र और प्रदेश सरकार को घेरा


वहीं इस घटना के बाद विधायक डॉ अशोक मर्सकोले ने दुख जताया है,और साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम शिवराज पर भी निशाना साधा है. विधायक ने बताया शहडोल जिले में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में जा रही बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक महिला की दुखद मृत्यु होने का समाचार प्राप्त हुआ.जैसे ही जानकारी लगी तो मैं आज मृतिका के घर पहुंचा और परिवार से मिला जहां पर उनका रो रो कर बुरा हाल था।


Pm cm के कार्यक्रमों में आख़िर हजारों बसें क्यों लगाई जाती है


दूसरे जिले से जनता को सिर्फ़ भीड़ दिखाने के ले जाना कहाँ तक उचित है,

सुबह अच्छा खा पीकर घर से कोई जाए और शाम को 4 लाख का सरकारी आश्वासन के साथ लास मिले इसे किस रूप लिया जावे इस सदमे को कैसे कोई झेल पायेगा 

इस घटना मृत्यु को राजनीतिक हत्या की श्रेणी में मानता हूँ !! महिला के परिवार को 50 लाख मुआवजा दिया जावे।


Cm के मण्डला बबलिया कार्यक्रम में भी लगी बस से एक शिक्षक की मृत्यु हुई जिसकी लीपापोती की कोशिश की गई,और

हमारे द्वारा मप्र शासन से 1 करोड़ मुआवज़े पर अब तक कोई विचार समझ नहीं आया!


मैं प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी से जानना चाहता हूं कि उनके कार्यक्रमों में दूसरे जिले से लोगों को ले जाने की क्या आवश्यकता आख़िर क्यों होती हैं  इतना प्रचार प्रसार किस लिए लोगों की जान को जोख़िम में क्यों डाला जा रहा है अपने राजनीतिक फायदे के लिए सरकारी ख़र्चे पर  लगातार कार्यक्रमों में हजारों बस लगाया जाता है इसमें दुर्घनाएं भी हो रही है फ़िर भी वही प्रचार प्रसार और बससे लाना ले जाना क्यों 

मृत्यु पर जिम्मेदारी क्यों नहीं लेती सरकार

सरकारी खर्च पर अपने वाह वाही प्रचार प्रसार तमाशे के लिए जनता का दुरुपयोग करना और उनकी जान खतरे में डालना कहाँ तक उचित है,,

सतना कोल सम्मेलन कार्यक्रम में 16 कोल समाज के लोगों की मृत्यु हुई, इतनी बड़ी घटना का सदन में ज़िक्र तक शोक संदेश के रूप में क्यों आदिवासी इंसान नहीं होते क्या


मण्डला cm के कार्यक्रम में शिक्षक की मृत्यु को अज्ञात बताना उसके लिए परिवार पर दबाव बनाना उसका 1 करोड़ मुआवजा नहीं देना कहाँ तक उचित है?

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