दैनिक रेवांचल टाइम्स - मंडला जनजातीय विभाग मंडला द्वारा पुराने शैक्षणिक भवनों की मरम्मत हेतु ठेकेदारों से गुणवक्ता हीन कार्य कराया जारहा है जिसके बारे में संबंधित संस्थान प्रमुख भी आपत्ति जता चुके है साथ ही स्थानीय शिक्षा समिति के सदस्य भी जिला कलेक्टर और जनजातीय विभाग को पत्र लिख कर जाँच की माँग कर रहें है लेकिन उसके बाउजूद जिले आलाधिकारी अपनी आंखों पर काला चश्मा लगाएं हुए है- वही जनजातीय विभाग मंडला के मुखिया ठेकेदारों के साथ लग्जरी वाहनों में घूमते नजर आरहे है। जबकि संबंधित मरम्मत कार्यो के उपयंत्री राजेश परमार कई बार गुणवत्ता हीन कार्यो को लेकर ठेकेदारों को नोटिस दे चुके उसके बाउजूद जनजातीय विभाग मंडला के सहायक आयुक्त चहेते ठेकेदारों को बचाने की जुगत में उनके साथ घूमते हुए नजर आरहे है भवन की कीमत करीब 10 लाख और मरम्मत के 34 लाख
बीजाडांडी विकासखंड क्षेत्र की शिक्षा समिति के सदस्यों ने बताया कि क्षेत्र में जिन शैक्षणिक संस्थाओं के भवनों की मरम्मत के लिए जनजातीय विभाग ने राशि जारी करी है उतनी कीमत के बो भवन नही जबकि उससे कही कम लागत में उतना ही बड़ा भवन बनके तैयार हो जाता और लाखों रुपये बच भी जाते। लेकिन संबंधित उपयंत्री ने गलत नीयत से अधिक स्टीमेट बनाकर पैसे आवंटित करा लिए जिसकी वजह से जिम्मेदारों द्वारा शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जारहा है। लेकिन सवाल यह उठता कि क्या जिले आलाधिकारी उक्त मामले में अब तक चुप्पी क्यों साधे हुए और आखिर क्या मजबूरी है जो सम्बंधित लोगो पर कार्यवाही करने से बच रहें है। वही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का कहना है अगर कलेक्टर साहिबा उक्त शैक्षणिक संस्थाओं का निरीक्षण करें तो पूरी स्तिथि साफ हो सक्ति है।
इनका कहना
वही जब उक्त विषय को लेकर खंड स्तरीय शिक्षा समिति के अध्यक्ष विजेंद्र यादव (मोंटू) से बात की गई तो उनका कहना था बीजाडांडी बालक आश्रम का जो भवन खड़ा है वर्तमान में उसकी कीमत महज 5 से 10 लाख रुपये है लेकिन जनजातीय विभाग के अधिकारियों ने आँखे बंद करके 34 लाख से अधिक राशि मरम्मत के लिए आवंटित की है जो कही न कही शासकीय राशि का दुरुपयोग है।

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