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Wednesday, May 24, 2023

नए चेहरों पर दांव या पुरानी जोड़ी का मुकाबला...









रेवांचल टाईम्स - मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले बड़वानी की सबसे बड़ी विधानसभा सेंधवा में चुनाव पूर्व चर्चा का बाजार गर्म है। वर्ष 2023 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में किस दल का उमीदवार कौन होगा ? यह प्रश्न हर कोई जानना चाहता है। किन्तु इस प्रश्न का जवाब समय से पूर्व मिलता नहीं दिखाई देता है। बरसों से चेहरा बने हुए उम्मीदवारों में भी विश्वास की कमी है। पुराने चेहरे भी अब जनता की अदालत में अपनी चमक खोते जा रहे है। अब 2023 में कौन होंगे उम्मीदवार किसके मध्य होगा मुकाबला यह प्रश्न राजनीतिक दलों की टिकिट वितरण व्यवस्था से जुड़ा है। चुनाव के पूर्व टिकिट घोषित करने की अपनी व्यवस्था के तहत तमाम राजनीतिक दल अधिकृत उम्मीदवारों पर ऐनवक्त पर फैसला ले पाते है। कोई भी दल चुनाव के 6 माह पूर्व टिकिट घोषित करने की हिम्मत नही दिखा पाता फिर चाहे उनका उम्मीदवार कितना भी मजबूत और ताकतवर ही क्यों न हो। किसी भी राजनीतिक दल में यह आत्मविश्वास नहीं दिखाई देता की वह समय पूर्व क्षेत्र की जनता को अपना उम्मीदवार घोषित कर बता सकें कि यह हमारे दल का उम्मीदवार है, इन्होंने जनता की सेवा की है, अभी भी कर रहे है, आगे भी करते रहेंगे। राजनीतिक दलों की टिकिट की घोषणाएं तो निर्धारित प्रक्रिया से ही होती है,भले ही यह प्रक्रिया7 कितनी भी औपचारिक हो। बात बड़वानी जिले की सेंधवा विधानसभा चुनाव के पूर्व जनचर्चा की करें तो यह विधानसभा आदिवासी बाहुल्य है। इस विधानसभा से बड़ी संख्या में श्रमिक काम की तलाश में महाराष्ट्र, गुजरात जाते है। काम के लिए पलायन का कारण क्षेत्र में कपास उधोग की हालत खस्ताहाल होना है एवं नवीन उधोगो के बारे में स्थानीय नैतृत्व की अरुचि के चलते एक दो बड़े उधोगो के अलावा उधोग धंधों का अभाव है। क्षेत्र की जनता का मानना है की समय-समय पर दोनों ही प्रमुख दलों को जनता ने प्रतिनिधित्व दिया है, किन्तु रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा जैसी सुविधाओं में क्षेत्र अभी भी पिछड़ा है। कॉटन उधोग बेहाल है। कुछ एक जिनिग प्रेसिंग बची है। जो अंतिम साँसें गिनती प्रतीत हो रही है। एक समय सफेद सोने की प्रदेश की प्रसिद्ध मंडी अब अपने सबसे खराब दौर में है। विधानसभा क्षेत्र मिला जुला परिणाम देने वाला रहा है। वर्तमान में यहां कांग्रेस के ग्यारसीलाल रावत विधायक है। जिन्होंने भाजपा के अंतरसिंह आर्य को पराजित किया था। अंतरसिंह आर्य जो 2003 से लगातार विजय होते आ रहे थै। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे थै। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के ग्यारसीलाल रावत पुनः कांग्रेस के उम्मीदवार बने और भाजपा के अंतरसिंह आर्य को पराजित किया। वर्ष 1990 से 2018 तक यह दो चेहरे ही कांग्रेस-भाजपा की पहिचान बने हुए है। कांग्रेस ने 2008 में सुखलाल परमार ओर 2013 दयाराम पटेल को उम्मीदवार बनाया जो भाजपा के अंतरसिंह आर्य से पराजित हो गए। अब जबकि 2023 के आमचुनाव मध्यप्रदेश में होने वाले है दोनों ही प्रमुख दलों ने अपना आंतरिक सर्वे भी कराया है, दोनों दलों की सर्वे रिपोर्ट अपने-अपने दल को कमजोर बता रही है। इसका आशय यह निकाला जाए कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस अपने उम्मीदवारों में बदलाव कर सकते है। दोनों ही दलों में स्थानीय स्तर पर बदलाव की आवाजें उठने लगी है। राजनतिक दल भी हर संभावनाओं पर नजरें जमाए हुए हैं। जीत पहली प्राथमिकता है। सम्भवतः पुराने उम्मीदवारों पर ही विश्वास जताया जाए। किन्तु नवीन चेहरों की तलाश भी जारी है। बदलाव की स्थिति में किन चेहरों पर राजनीतिक दल दांव लगाएंगे यह राजनीतिक दलों में मंथन का विषय है। सूत्रों की माने तो भोपाल मे कांग्रेस हाईकमान के पास पोरलाल खरतें वाणिज्य कर विभाग इंदौर में पदस्थ कर अधिकारी का नाम भी टिकिट की दौड़ में बताया जा रहा है। क्षेत्र में पोरलाल खरतें ने सक्रियता भी दिखाई है। पोरलाल ग्राम मेंदलियापानी तहसील वरला के निवासी है। जिनकी आरंभिक शिक्षा वरला में हुई। अच्छे वक्ता होकर आदिवासी समाज के मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति रखते है। टिकिट मिलने की स्थिति में शासकीय सेवा से राजनीति में पदार्पण करेंगे। समन्वयवादी होने के कारण हर वर्ग समाज में अपनी पहुच बनाने में लगे है। इसी क्रम में दूसरा नाम ग्रीष्म कुमार सोलंकी याने मोंटू सोलंकी जो जयस के बड़वानी जिला अध्यक्ष है। क्षेत्र के चर्चित और तेज तर्रार आदिवासी युवा चेहरे सम्पूर्ण विधानसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे है। पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी राजकला सोलंकी को कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के रूप में विजयी श्री दिलवा चुके है। तेजी से उभरते आदिवासी नेता के रूप में पहिचान बनाने में सफल हुए है। अभी हाल में सैकड़ो साथियों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी दावेदारी भी पेश कर चुके है। विधानसभा में जयस की सदस्यता अभियान में हजारों युवाओं को जोड़ रहे है। कांग्रेस और जयस के गठबंधन की दशा में मोंटू सोलंकी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार हो सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी में भी बदलाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। भाजपा में बदलाव की स्थिति में विकास आर्य के नाम पर विचार किया जा सकता है। पूर्व मंत्री अंतरसिंह आर्य के पुत्र विकास आर्य विगत वर्षों में क्षेत्र में जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय भूमिका निभा रहे है। आदिवासी बोली में धारदार भाषण देतें है। जिला जनपद के खुद भी सदस्य रह चुके है, इस बार अपनी पत्नी को जिला जनपद सदस्य के रूप में विजयी दिलवाई। राजनीति का अच्छा अनुभव रखते है। क्षेत्र में कार्यकर्ताओं से परिचय है। पिता अंतरसिंह आर्य के परिचय का लाभ मिलने की संभावना भी है। भारतीय जनता पार्टी में नवीन चेहरे के रूप में रेलास धनसिंह सेनानी की उपस्थिति को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। विगत 3-4 बरसों में क्षेत्र में अधिक सक्रिय है। पेशे से दंत चिकित्सक रेलास ग्राम आमझिरी के निवासी है। उनके पिता धनसिंह सेनानी सेंधवा मंडी के अध्यक्ष भी रह  चुके है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजातीय मोर्चा के जिला अध्यक्ष है। टिकिट की दौड़ में शामिल है। वैसे दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा आप की आमद भी क्षेत्र में पहली बार होने जा रहीं है। आप अभी असरकारक नही दिखती। किन्तु क्षेत्र में नए राजनैतिक विकल्प के तौर पर आप की आमद को देखा जा रहा है। भाजपा-कांग्रेस में बदलाव की स्थिति में यह चेहरे सामने आ सकते है। यदि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल पुराने आजमाए उम्मीदवारों पर दांव लगाते है, तब ग्यारसीलाल रावत और अंतरसिंह आर्य पुनः मैदान में होंगे। किन्तु राजनीति में परिवर्तन की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। क्षेत्र की जनता नई सम्भावनाओं को तलाश रही है। ऐसी सम्भावना जो क्षेत्र के विकास की आवाज को विधानसभा में बुलन्द कर सके। क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के लिए लड़ाई लड़ सके। पुराने आजमाए नेताओं से क्षेत्र की जनता का विश्वास कम हुआ है। जनता नवीन सम्भावनाओं को तलाश रही है। किंतु जनता के चाहने से क्या होगा, होगा वहीं जो राजनीतिक दल तय करेंगे यह आने वाले समय मे तय होगा कि यह दल नवीन सम्भावनाओं पर विश्वास व्यक्त करते है या पुरानी जोड़ी के बीच ही 2023 में मुकाबला होगा।

                       नरेन्द्र तिवारी....

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