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Sunday, May 14, 2023

रेत का अनोखा नजारा रात से सुबह तक चल रहा अवैध उत्खनन, नही हो रही रेत माफियाओं के ऊपर कोई कार्यवाही ग्रामीण परेशान...



रेवांचल टाईम्स - मंडला जिले में आज भी कुछ रेत खदानों की नीलामी नही हुई है जहाँ पर लगातार पुलिस और खनिज विभाग की शह पर खुलेआम इन खदानों से रेत का अबैध उत्तखन्न के साथ परिवहन हो रहा है सब मुखबधिर हो कर जिम्मेदार देख रहे है पर इन अबैध कारोबारियों पर लगाम लगाना तो दूर की बात है इनकी जो शिकायत होती है उनमें भी कोई कार्यवाही नही होती है और कही न कही ये अवैध कारोबारी किसी न किसी राजनीति से जुड़े हुए है और इन्हें खुला संरक्षण प्राप्त है आज अबैध कारोबार सत्ता पक्ष का या विपक्ष के कार्यकर्ता सब के सब अबैध कारोबार लिप्त है कोई कही रेत चुरा रहा है तो कोई सट्टा खिला रहा है सब दिन दोगुनी रात चौगनी तरक्क़ी करने में लगे हुए है।

        वही प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहगांव नदियों व नालों का जल स्तर कम हो गया है। जिसका फायदा उठाकर रेत का अवैध उत्खन शुरू कर दिया गया है। जिले में अवैध खनन एक ऐसा रोग हो गया है, जिसकी जितनी दवा की जाती है, वह उतना बढ़ता जाता है। यानी सरकार नदियों में रेत के अवैध खनन को लेकर जितनी सख्त हो रही है, नदियों का सीना उतना ही छलनी हो रहा है। प्रदेश के कृषि मंत्री ने घोषणा की थी कि नर्मदा नदी में अवैध खनन करने वालों के ऊपर हत्या का मामला दर्ज होगा, लेकिन इसके बावजूद नदी को छलनी किया जा रहा है। मोहगांव, गिठार के आससपास बुडनेर नदी से रेत निकाली जा रही है।  रेत का अवैध खनन जोरों पर है। कभी-कभार कुछ छोटे रेत चोरों के खिलाफ कार्रवाई कर संबंधित विभाग अपनी पीठ थपथपा लेता है।  जबकि प्रशासन को सूचना देने के लिए जिला प्रशासन का मैदानी अमला हर गांव हर पंचायत में तैनात है लेकिन क्षेत्र में चल रहे रेत के अवैध उत्खनन की सूचना खानिज विभाग, पुलिस व जिला प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती। जब तक जिला प्रशासन को खबर मिलती है तब तक रेत माफिया फरार होने में कामयाब हो जाता है। कमजोर सूचना तंत्र का फायदा उठाकर रेत का करोबार जिले में तेजी से फल-फूल रहा है। वही दूसरी ओर पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहे है। इसके साथ ही नादियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और अवैध उत्खनन के क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। कई जगह नदियों में रेत का इतना खनन कर दिया गया है कि नदी की धारा में ही परिवर्तन हो गया है। जिसके चलते भविष्य में इन नदियो की बहने की दिशा ही बदल जाएगी और लोगों को बाढ़ जैसी विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं प्रशासन को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

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