मंडला 10 अप्रैल 2023
जिला शिक्षा एवं
प्रशिक्षण संस्थान से प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय विज्ञान एवं
प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं
प्रौद्योगिकी विभाग (भारत सरकार) नई दिल्ली के सहयोग से एस्ट्रोनॉमिका साइंस
एक्टीविटी एण्ड एजूकेशन सेन्टर मध्यप्रदेश द्वारा मण्डला जिले के ट्रेनी टीचर्स
में नवाचार को बढ़ावा देने के लिये नवाचारी पद्धति से विज्ञान शिक्षण की प्रशिक्षण
कार्यशाला का आयोजन डाइट मण्डला में किया जा रहा है। 8 से 12 अप्रैल 2023 तक पांच दिवस चलने वाली इस कार्यशाला में
देश के विभिन्न नगरों से आ रहे वैज्ञानिक एवं स्त्रोत विद्वान प्रशिक्षु शिक्षकों
को अनेक प्रकार से अनुपयोगी वस्तुओं का उपयोग करके नवाचारी पद्धति से शिक्षण करना
सिखा रहे हैं।
स्क्रैप व अनुपयोगी हो
चुकी सामान्य वस्तुओं का उपयोग करते हुए शिक्षण उन्मुखीकरण कार्यशाला में डॉ. ओपी
गुप्ता प्रयागराज, डॉ. वीके मुद्गल झाँसी, वी.बी. रायगाँवकर पुणे, लखन साहू कांकेर, इंजी. बीबीआर गाँधी इटारसी ने ट्रेनी शिक्षकों को गणित, भौतिकी, जीवविज्ञान, पर्यावरण समेत
अनेक विषयों को प्रभावी तरीके से अध्यापन प्रशिक्षण दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ के
कांकेर से लखन साहू ने जीव विज्ञान के विषय अंतर्गत बॉडी के ऑर्गन आंख, दिमाग, फेंफड़े, लीवर, किडनी, हृदय आदि फंक्शन को अपने विद्यार्थियों को
कैसे समझाया जाए रोचक तरीके से प्रशिक्षण दिया। वी.बी. रायगाँवकर पुणे महाराष्ट्र
ने अपने वृहद् प्रशिक्षण के दौरान पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन और डायरेक्ट टीचिंग
पद्धति से शिक्षण करना सिखाया। उन्होंने अनेक छोटे-छोटे प्रयोग सामान्य रूप से
उपलब्ध सामग्री से विज्ञान के सिद्धांतों को समझाने की विधियाँ छात्र, अध्यापक, अध्यापिकाओं को सिखाया। डॉ. विवेक मुदगिल
झांसी उप्र ने बल के अनेक प्रयोगों को साक्षात करके उनके सिद्धांत तथा बल युग्म, स्पर्श तनाव और दृष्टि के विभिन्न प्रयोग करके दिखाए। प्रयागराज उप्र के
वयोवृद्ध वैज्ञानिक डॉ. ओपी गुप्ता ने भौतिक शास्त्र और गणित के अनेक सिद्धांत और
उन्हें प्रभावी ढंग से क्लास रूम में समझाना सिखाया। साथ ही गणित के ट्रिक्स भी
दिखाए। पर्यावरण एवं विज्ञान स्त्रोत विद्वान इंजी बीबीआर गांधी ने कहा कि जब भी
आप अपने विद्यार्थियों को शिक्षण दे रहे होंगे तब आपकी अपेक्षा यही होती है कि
उनका ध्यान आपकी ओर रहे, वहीं स्वयं को भी करना
है। विज्ञान हर क्षण, हर घटना में विद्यमान है, इसलिए हर विषय के शिक्षक को विज्ञान की सूझबूझ होना जरूरी है। प्रशिक्षण के
दौरान डाइट प्राचार्य राजेश कुमार जायसवाल, अभिलाष तिवारी, वेदप्रकाश गुप्ता एवं राजेश उपरीत उपस्थित थे।
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