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Saturday, April 8, 2023

उपभोक्ताओ की जेब खाली करेगा चुटका की बिजली


रेवांचल टाईम्स - मंडला जिले के विकास खण्ड नारायांगज में नर्मदा नदी पर बने पहले बरगी बांध से विस्थापित गांव चुटका जिला मंडला में 1400 मेगावाट की परमाणु उर्जा संयत्र प्रस्तावित है। इस परियोजना के लिए 700 - 700 मेगावाट  रिएक्टर की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दे दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय परमाणु उर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डा.जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में दिया है।जैसा  ज्ञात है कि परमाणु उर्जा स्वच्छ नहीं है।इसके विकिरण के खतरे सर्वविदित है।वहीं परमाणु संयंत्र से निकलने वाली रेडियोधर्मी कचरा का निस्तारण करने की सुरक्षित विधी विज्ञान के पास भी नहीं है।ऐसी दशा में 2.4 लाख वर्ष तक रेडियोधर्मी कचरा जैवविविधता को नुकसान पहुंचाता रहेगा।अध्ययन में यह बात भी सामने आया है कि परियोजना के आसपास निवास करने वाले लोंगों के बीच विकलांगता, कैंसर और महिलाओ में गर्भपात एवं बांझपन की मात्रा बढ गई  है। परमाणु उर्जा संयत्रों के इतिहास की तीन भीषण दुर्घटनाओं थ्री माइल आइस लैंड (अमेरिका), चेर्नोबिल (युक्रेन) और फुकुशिमा (जापान) ने बार - बार हमें यह चेताया है कि यह एक ऐसी तकनीक है जिस पर इंसानी नियंत्रण नहीं है।   

इसलिए अमेरिका और ज्यादातर पश्चिम यूरोप के देशों में पिछले 35 वर्षो में रिएक्टर नहीं लगाए गए हैं। फुकुशिमा में आसपास के 20 किलोमीटर दायरे में 3 करोङ टन रेडियोएक्टिव कचरा जमा है।इस कचरा को हटाने में जापान सरकार ने 94 हजार करोङ खर्च कर चुकी है।विकिरण को पुरी तरह समाप्त होने में लगभग तीस साल लगेंगे।

         दरअसल परमाणु बिजली उधोग में जबरदस्त मंदी है।इसलिए अमेरीका,फ्रांस और रूस आदि की कम्पनिया भारत में इसके ठेके और आर्डर पाने के लिए बेचैन है। चुटका संयत्र से बाहर निकलने वाली पानी का तापमान समुद्र के तापमान से लगभग 5 डिग्री अधिक होगा।जो जलाशय में मौजूद जीव - जन्तुओं को खात्मा कर सकती है और जैव विविधता नुकसान पहुंचाएगी।

परमाणु संयंत्र से भारी मात्रा में गर्मी लगभग (3400 डिग्रीसेंटीग्रेड) पैदा होगा।जिसे ठंडा करने में भारी मात्रा में पानी का इस्तेमाल होगा जो काफी मात्रा में भाप बनकर खत्म हो जाएगा तथा जो पानी बचेगा वो विकिरण युक्त होकर नर्मदा नदी को प्रदूषित करेगा।विकिरण युक्त इस जल का दुष्प्रभाव जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, बङवानी सहित नदी किनारे बसे अनेक शहर और ग्राम वासियों पर पङेगा।क्योंकि वहां की जलापूर्ति नर्मदा नदी से होता है।

      आपदा प्रबंधन संस्थान, भोपाल की एक रिपोर्ट के अनुसार मंडला जिले की टिकरिया (नारायणगंज) भूकंप संवेदी क्षेत्रों की सूची में दर्शाया गया है।वर्ष 1997 में नर्मदा किनारे के इस क्षेत्र में 6.4 रेक्टर स्केल का विनाशकारी भूकंप आ चुका है।

इस परिस्थित में इस परियोजना के निर्माण पर पुनर्विचार करना चाहिए। अगर इन खतरों के बाद भी सरकार इस परियोजना को बनाना चाहती है तो  प्रदेश की जनता परमाणु संयंत्र से बनने वाली बिजली का दर जानना चाहती है।जो नहीं बताया जा रहा है,जबकि उत्पादित बिजली का 50 प्रतिशत मध्यप्रदेश सरकार को खरीदना है।ज्ञात हो कि रीवा सोलर प्लांट से मिलने वाली बिजली का अधिकतम दर रूपये 2.97 है। जो दिल्ली मेट्रो को बेचा जा रहा है।वर्ष 2020 के सरकारी आंकङे अनुसार प्रदेश में नवीकरणीय उर्जा की क्षमता 3965 मेगावाट है।जबकि प्रदेश के विभिन्न अंचलो में 5 हजार मेगावाट की सोलर पावर प्लांट निर्माणाधीन है।रिसर्च फाउंडेशन दिल्ली की  रिपोर्ट के अनुसार परमाणु बिजली की लागत 9 से 12 रूपये प्रति यूनिट आएगी।लगभग चालीस वर्ष तक चलने वाली परमाणु उर्जा संयत्र का डी- कमिशनिंग (संयंत्र को बंद करना)आवश्यक होगा।जिसका खर्च स्थापना खर्च के बराबर होगा।अगर इस खर्च को भी जोङा जाएगा तो बिजली उत्पादन की लागत 20 रुपए प्रति यूनिट आएगी।अब इस हालत में मध्यप्रदेश सरकार बिजली खरीदी अनुबंध कैसे करेगी? ज्ञात हो कि प्रदेश में मांग से 50 फीसदी बिजली ज्यादा  उपलब्ध है।वर्ष 2019- 20 में कुल 28293.97 मिलियन यूनिट यानि 2 अरब 82 करोङ 93 लाख 97 हजार 726 यूनिट बिजली सरेंडर की गई थी।मध्यप्रदेश पावर मेनेजमेन्ट कम्पनी ने पिछले पांच साल में बिना बिजली खरीदे विधुत कम्पनियों को 12834 करोङ रुपए का भुगतान बतौर फिक्स चार्ज कर दिया है। एनटीपीसी को ही वित्तीय वर्ष 2023-24 में पावर मेनेजमेन्ट कम्पनी को बिना बिजली लिए तीन हजार करोङ रुपए चुकाने होंगे।जबकि मध्यप्रदेश पावर मेनेजमेन्ट कम्पनी ने 2016 में एनटीपीसी को पत्र लिखकर बिजली सरेंडर करने का अनुरोध किया था।वर्ष 2014 से 2020 तक विधुत कम्पनियों का घाटा 36812 करोङ रुपए और कर्ज 50 हजार करोङ रुपए पार हो गया है।इस कारण प्रदेश के हर बिजली उपभोक्ता पर 25 हजार का कर्ज है।अगर विधुत कम्पनिया चुटका परमाणु संयंत्र से महंगी बिजली खरीदी अनुबंध करती है तो प्रदेश की 1.30 करोङ बिजली उपभोक्ताओ को ही आर्थिक बोझ उठाना होगा।जबकि उपभोक्ता महंगी बिजली के कारण पहले से परेशान है।

        वही स्वच्छ और सस्ती उर्जा के विकल्प की दिशा में आगे बढ़ना ही प्रदेश के हित में होगा।

                              राज कुमार सिन्हा

                 बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ

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