आज के डिजिटल समय में रोजाना नए-नए प्रोडक्ट लॉन्च हो रहे हैं जो लाइफ को काफी आसान बना रहे हैं। भारत में पिछले कुछ सालों में स्मार्टवॉच का चलन भी काफी अधिक बढ़ गया है। ज्यादातर युवाओं की कलाई में आजकल स्मार्टवॉच ही नजर आती है। बता दें कि स्मार्टवॉच और स्मार्टबैंड्स में बहुत से सारे फीचर होते हैं। इनमें से कुछ फीचर हेल्थ के भी होते हैं। आजकल ज्यादातर स्मार्टवॉच और बैंड में हार्ट रेट सेंसर लगे होते हैं। हालांकि इन पर पूरी तरह से विश्वास करना सही नहीं है। दरअसल, कई बार स्मार्टवॉच में नकली हार्ट सेंसर भी लगे होते हैं।
लगा हो सकता है नकली हार्ट सेंसर
कई बार सामान्य स्मार्टवॉच या स्मार्ट बैंड ओईएम में नकली हार्ट सेंसर लगाकर बेच देते हैं। यूजर्स को इसका पता भी नहीं लग पाता। लेकिन आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपकी स्मार्टवॉच में लगा हार्ट सेंसर असली है या नहीं। दरअसल, असली हार्ट रेट में कम से कम दो एलईडी होते हैं। इसमें से एक हरे रंग की और दूसरी इंफ्रारेड लाइट होती है। इन दोनों लाइटों के बीच में एक सेंसर होता है। अगर आपकी स्मार्टवॉच या बैंड में बिना किसी सेंसर के केवल दो एलईडी हैं तो समझ जाइए कि यह नॉर्मल एलईडी लाइट है। यह किसी फोटोइलेक्ट्रिक हार्ट रेट सेंसर की कॉपी हो सकता है।
क्या हार्ट अटैक का पता लगा सकती है स्मार्टवॉच
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, एसएल रहेजा अस्पताल माहिम-फोर्टिस के कंसल्टेंट-इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हरेश मेहता ने आजतक से बात करते हुए बताया, “स्मार्टवॉच को एक छोटा कंप्यूटर कह सकते हैं जिसमें कई सारे फंक्शन होते हैं। लोग स्मार्टवॉच को प्राइमरी मेडिकल इक्युपमेंट की तरह यूज में ला रहे हैं। उससे प्राप्त डेटा के मुताबिक, स्वयं अपनी हेल्थ का अंदाजा लगा रहे हैं। स्मार्टवॉच से हार्ट रेट और ईसीजी रिदम का पता चल सकता है लेकिन स्मार्टवॉच सौ प्रतिशत हार्ट अटैक को डिटेक्ट कर लेगा, इस बारे में दावा नहीं किया जा सकता। डॉक्टर का कहना है कि स्मार्टवॉच सिर्फ आपकी अनियमित हार्ट रिदम को डिटेक्ट कर सकती है।“
ईसीजी की 12 लीड में से एक लीड सही बता सकती है
डॉ. हरेश ने आजतक को बताया कि, “अगर आपकी स्मार्ट वॉच अच्छी कंपनी की है और इंडियन रेग्यूलेट्री अथॉरिटी सेंट्रल ड्रग स्टेंडर्ट कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन से अप्रूव है तो वह ईसीजी की 12 लीड में से एक लीड सही बता सकती है लेकिन उससे भी आप हार्ट अटैक का पता नहीं लगा पाएंगे। यह वेंट्रीकुलर टैकीकार्डिया यानी ह्रदय की गति तो बता सकती है लेकिन उससे अधिक कुछ नहीं बता सकती।“
ऑक्सीजन लेवल
डॉ. हरेश का कहना है कि “कोरोना के समय पर कई लोगों ने स्मार्टवॉच को ब्लड ऑक्सीजन नापने के लिए भी यूज किया। कई मामलों में मैंने देखा है कि स्मार्टवॉच ब्लड ऑक्सीजन मशीन की अपेक्षा गलत रिजल्ट देती हैं। स्मार्टवॉच फॉल डिटेक्शन सिक्योरिटी के लिए यूज किया जा सकता है। इसमें यह होता है कि अगर आप गिरते हैं या फिर आपका एक्सीडेंट होता है तो वह आपके इमरजेंसी कॉन्टेक्ट्स को अलर्ट के साथ नोटिफिकेशन भेज देगा। लेकिन हर वॉच में यह सुविधा भी हो यह भी जरूरी नहीं।“
गलत डेटा मिलने की संभावना
डॉ. हरेश ने आगे कहा कि, “अगर आप बिना डॉक्टर के स्मार्टवॉच के डेटा को सही मानते रहेंगे तो वह आपके लिए टेशन पैदा करेगा क्योंकि हो सकता है आपकी हेल्थ सही हो लेकिन आपकी स्मार्टवॉच आपकी सेहत का गलत डेटा दे। स्मार्टवॉच पहनें लेकिन उसे प्राइमरी मेडिकल इक्यूपमेंट की तरह ना देखें। अगर आपको कोई भी अनकंफर्टेबल फील होता है तो तुरंत अपने हॉस्पिटल जाकर डॉक्टर से मिलें।
अप्रूव्ड वॉच पहनना सही
वहीं शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर, कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी-पेसमेकर और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. चंद्रशेखर ने आजतक से कहा, “स्मार्टवॉच से हार्ट रेट का पता लगाया जा सकता है। लेकिन कई मामलों में यह भी देखा गया है कि स्मार्टवॉच हार्ट रिदम और हार्ट रेट के बीच अंतर नहीं कर पातीं। फिटनेस इंडस्ट्री में लोग कैलोरी बर्न देखने के लिए भी स्मार्टवॉच पहनते हैं जो कि गलत है। स्मार्टवॉच आपको अनुमानित कैलोरी बर्न बताती है। उदाहरण के लिए अगर आप बैठे-बैठे भी हाथ हिलाते हैं तो कुछ स्मार्टवॉच उसे पैदल स्टेप्स में काउंट कर लेंगी। ऐसे कई एरर हैं जो स्मार्टवॉच के डेटा को पूरी तरह सही साबित नहीं करते। जिन स्मार्टवॉच को हेल्थ मॉनिटरिंग का अप्रूवल मिल चुका है उन वॉच पर कुछ हद तक विश्वास किया जा सका है।”

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