रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के निवास नगर पंचायत बनने के बाद निवास नगर का विकास तो हुआ नही मगर यहां पर जिम्मदारों के द्वारा अपना पद का दुरुपयोग खुलके किया जा रहा है चाहे वो मुख्य नगर पालिका अधिकारी उपयंत्री हो या फिर बाबू सब अपने अपने जुगाड़ में लगे हुए और यह सोच रहे है कि सरकारी धन को कैसे और कहाँ से निजी उपयोग और अपने चहेतों को फ़ायदा पहुँचा दे ये सोच बना कर बैठ कर कार्य कर रहे ये नगर परिषद निवास का दुर्भाग्य है कि सब जानकर भी अनजान बने बैठे है और जो थोड़ा बहुत जानकर है वह डर के नही बोल पा रहे हैं।
वही जानकारी के अनुसार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी मोहन मरूआ और पंप मेकेनिक का जरूर विकास हुआ है दैनिक वेतन भोगी कही जमीन गाड़ी जेवर ले रहे है तो हल्ला न हो जाने के डर से अभी तक 6 माह बीत जाने के बाद भी जमीन का नामातंरण तक नही करा रहे है ताकि जिले की जनता को पता न लग सके कि दैनिक वेतन भोगी जिसको झाड़ू लगवाने और साफ सफाई के लिए निवास लाया गया था वह यहां फर्जी फाइल चला चला कर कही जमीन जेवर गाड़ी ले रहा है। और नगर पालिका के पैसों की सफाई कर रहा है पंप मेकेनिक के साथ दैनिक वेतन भोगी मोहन मरूआ द्वारा फर्जी फाइल चलकर यहां रहे अधिकारी मीना कोरी के साथ शासन के पैसे का दुरुपयोग किया है एक पंप मेकेनिक को पंप का ज्ञान होगा वह कैसे लेखापाल का काम कर सकता है यह सभी जानते है, मगर वाह रे व्यवस्था, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस पंप मेकेनिक को शहपुरा नगर पालिका से भगाया गया था जिसके बाद यह निवास में जमा हुआ है और यहां पर बिलो में कमीशन बाजी कर रहे है एक पंप मेकेनिक को लेखापाल बनाने का परिणाम नगर पंचायत को अब भोगना पड़ेगा जब नगर पंचायत को हर चीज में पेनालिटी लगेगी अनुभव न होने के कारण ये पंप मेकेनिक ने कोई भी टेक्स समय मे जमा नही किये है न जीएसटी जमा हो रही है न ही इनकम टैक्स जमा हो रहे है जिसके कारण आये दिन पेनाल्टी पे पेनाल्टी लग रही और व्यापारियों के पत्र आ रहे है बिल क्रमांक 247, का 2501 रुपये 238 का 1069 रुपये ,22 का 1800 रुपये ,25 का 360रुपये ,216 , 1110 रुपये का जीएसटी आज तक जमा नही किया गया है जबकि उक्त खरीदी 2019 से 2021 में कई गई है इससे यह पता चलता है कि जब एक अनुभव हींन कर्मचारी को जिम्मेदारी दी जाएगी तो ऐसा तो होना ही है ।वही दूसरी तरफ दैनिक वेतन भोगी मोहन मरूआ फर्जी फाइल चला कर कमीशन पे कमीशन ले रहे है और आज आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर लिया है उससे पता लगता है कि नगर का विकास तो हुआ नही मगर इनका विकास जरूर हुआ है । संयुक्त संचालक जबलपुर द्वारा केवल कागजों में ही कारण बताओ नोटिस प्रतिवेदन आदि मांगा जाता है मगर कार्यवाही कुछ नहीं होती दिखती है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सयुक्त संचालक द्वारा नोटिस जारी इसलिए किया जाता है कि यहां प्रभारी सीएमओ के द्वारा लिफाफे में दक्षिणा भेज दे जब तो अनेको नोटिश जारी होने के बाद भी सयुक्त संचालक द्वारा आज तक कोई कठोर कार्यवाही नही की गई है जबकि पिछले कई दिनों से प्रमाण सहित खबरें प्रकाशन के बाद भी आज तक ज्वाइंट डायरेक्टर के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है जिसके कारण इनके हौसले बुलंद है ।


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