रेवांचल टाईम्स - महामृत्युंजय अस्पताल के डॉ सी.के गुप्ता के लापरवाही से हुई ग्राम सावरियापनी की दुर्गा जमरे के मामले में उठाई गई डॉ गुप्ता और अन्य की गिरफ्तारी की मांग
जागृत आदिवासी दलित संगठन के आदिवासी अपने मांगो पर रहे अडिग, प्रशासन के आश्वासन से असंतुष्ट हो कर कार्यवाही होने तक जारी रखेंगे आंदोलन
जागृत आदिवासी दलित संगठन के नेतृत्व में बड़वानी जिले के आदिवासी महिला - पुरुषों द्वारा आज दिनांक 06.02.2023 को निजी महामृत्युंजय अस्पताल में हुई आदिवासी महिला की मौत को लेकर धरना प्रदर्शन और रैली का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के 1000 से अधिक आदिवासी महिला और पुरुष शामिल हुए । आदिवासियों द्वारा दोषी डॉक्टर एवं अस्पताल प्रबंधन पर अत्याचार अधिनियम और आपराधिक मानव वध के अंतर्गत धारा 299 एवं 304 के अंतर्गत कार्यवाही और गिरफ्तारी की मांग की गई, लेकिन पुलिस द्वारा कार्यवाही न की जाने के कारण जागृत आदिवासी दलित संगठन एवं जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के आदिवासियों ने आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है ।
ग्राम सावरियापानी की दुर्गाबाई जमरे स्वस्थ्य थी, परंतु उन्हें बच्चा नहीं होने की शिकायत थी । जांच करने वे महामृत्युंजय अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर चंद्रकांता गुप्ता, उनकी बहू डॉ सोनल राठोड, असिस्टेंट भास्कर पवार ने दुर्गा बाई का Diagnostic hysteroscopic laparoscopy 24 जनवरी को करीब 12 बजे शुरू किया । लगभग 1-1.30 बजे से ही उनकी हालत बिगड़ने लगी और लगातार हालत बिगड़ने के बाद, शाम 7.55 बजे उनकी मौत हो गयी । परिवारजन को बताया गया कि हार्ट अटैक से मौत हुई है । परंतु, गाँव वालों और परिवारजन के लगातार मांग के बाद ही अगले दिन 4 डॉक्टरो द्वारा पोस्ट्मॉर्टेम किया गया । पोस्ट्मॉर्टेम में पाया गया कि दुर्गा बाई के पेट में खून की नली (inferior epigastric vessels) ऑपरेशन में कट गया था, पेट दो जगह फट गया था (Retroperitoneal and Intraperitoneal tear) जिसके कारण 3.5-4 लिटर खून अंदर ही बह गया था और रक्तस्राव के कारण हुए सदमा hemorrhagic shock (रक्तस्राव से सदमा) से ही मौत हुई थी । डॉक्टर ने तुरंत अपनी लापरवाही सुधारने की बजाय उनको उसी हालत में छोड़ दिया ! ऑपरेशन कर खून बहाव रोकना था जो नहीं किया गया । इसी कारण यह मात्र लापरवाही नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या ही है ।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दुर्गाबाई पूरी तरह स्वस्थ थी और उसे किसी भी तरह की बीमारी नही थी । डॉक्टर सी.के गुप्ता द्वारा मात्र इसलिए कटी हुई नली नहीं जोड़ी गई ताकि उनसे हुई गलती न दिखे, और उनपर उंगली न उठे! इस कारण 4-5 घंटों तक अधिक रक्तस्राव होने, डॉक्टरों की निष्क्रियता और घोर लापरवाही की वजह से दुर्गा जमरे की मौत हुई ।
यह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी एक सप्ताह बाद ही प्राप्त हो सकी। 4 दिन तक पुलिस थाने के सामने धरना देने के बाद एवं पुलिस और जिला प्रशासन की घोर उदासीनता और डोकटोरों को बचाने के स्पष्ट मंशा के बाद आज हजारों आदिवासी बड़वानी पहुँच कर न्याय मांगे । महामृतुंजय अस्पताल के सामने भी प्रदर्शन किया गया और कलेक्टर और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा गया ।
आदिवासियों की मांग यह है कि -
डॉ चंद्रकांता गुप्ता, डॉक्टर सोनल राठोड, भास्कर पवार सहित दुर्गाबाई के ऑपरेशन में भाग लेने वाले सभी डॉक्टर, ऑपरेशन के बाद उनकी देखरेख के लिए जिम्मेदार स्टाफ और डॉ. चंद्रकांता गुप्ता एवं अस्पताल पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 299, 304 एवं अत्याचार अधिनियम की धारा 3(2)(v) के अंतर्गत एफ.आई. आर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए ।
11 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं होना स्पष्ट दर्शाता है कि “विकास यात्रा” के दावों के बावजूद प्रशासन आदिवासियों के हितों के बारे में बिलकुल गंभीर नहीं है ! सरकारी अस्पताल में सभी तरह का इलाज करवाने की व्यवस्था हो प्रशिक्षित डॉक्टर, सभी तरह की दवाइयां और जांच की पूर्ण व्यवस्था की भी मांग आदिवासियों द्वारा उठाई गई, जिस संबंध में आदिवासियों द्वारा जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपा गया । मामले में आदिवासियों द्वारा सवाल जवाब भी किए गए लेकिन प्रशासन आदिवासियों द्वारा किए गए एक भी सवाल का जवाब न दे सका । आदिवासियों को प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पर कोई भी विश्वास न होने के कारण मांगे पूरी होने तक आदिवासियों द्वारा धरना चालू रखने का निर्णय लिया गया है । आंदोलन में जागृत आदिवासी दलित संगठन, एवं जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) सहित अन्य आदिवासी संगठन शामिल है ।
जागृत आदिवासी दलित संगठन
हरसिंग जमरे - 9893104698; वालसिंग सस्ते - 9179673859; माधुरी – 9179753640 ; नासरी बाई निंगवाल – 7354421581


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