उच्च न्यायालय के आदेश में नर्मदा तट के 300 मीटर की परिधि में नहीं हो सकता नया निर्माण
पर्यावरण को रौंद कर तान रहे बहुमंजिला इमारत
दैनिक रेवांचल टाइम्स - मंडला, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देशित किया है कि राज्य सरकार ऐसे नव भवन निर्माणों को अनुमति प्रदाय न करे जो कि नर्मदा के तट से 300 मीटर की परिधि में आते हैं, लेकिन हाईकोर्ट के इस निर्देश की अवहेलना कर निर्माण एजेंसियां मंडला स्थित मां नर्मदा तट से कुछ ही दूरी पर जिला न्यायालय की बहुमंजिला इमारत तान रहे हैं। इससे न केवल नर्मदा तटों की पर्यावरणीय संतुलन को नेस्तनाबूद किया जा रहा है, बल्कि मां नर्मदा की प्राकृतिक छटा को भी बिगाड़ने का काम हो रहा है। इसे लेकर मां नर्मदा भक्तों और प्रकृति प्रेमियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आश्चर्य की बात है कि हाईकोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन खुद मप्र शासन, विधि और विधायी कार्य विभाग के आदेशों के तहत हो रहा है। विधि और विधायी कार्य विभाग ने अपने पत्र क्रमांक 17(ए) 21/2017/21-ब (एक)/ 1991/ 4220 ने अपने आदेश में मंडला जिले में पांच करोड़ 72 लाख 27 हजार की लागत से न्यायालय परिसर मंडला में 10 न्यायालय कक्ष, कांफ्रेंस हाल, लायब्रेरी रूम सहित अन्य निर्माण कार्य होना है। इस निर्माण के लिए कार्यालय मुख्य वास्तुविद मध्यप्रदेश लोनिवि, निर्माण भवन, अरेरा हिल्स भोपाल ने साइट प्लान भी बनाया। इस पूरे प्लान को वैसे तो मंडला जिला मुख्यालय के पास कहीं भी बनाया जा सकता था, लेकिन जिम्मेदार इसे मां नर्मदा तट से कुछ ही दूरी पर बना रहे हैं। जिला न्यायालय के निर्माण में नर्मदा तटों से 300 मीटर की परिधि में निर्माण की हाईकोर्ट की मनाही को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। बता दें कि मध्य प्रदेश की उच्च न्यायालय के निर्णय को ताक में रखकर जिला न्यायालय परिसर मंडला की बहुमंजिला इमारत का निर्माण संपन्न हो रहा है। जो विधि विरुद्ध है। मां नर्मदा पर आस्था रखने वाले धर्म प्रेमियों बन्धुओं के लिये भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा प्रतीत होता है। मां नर्मदा के तटों पर नए निर्माण पर पूर्णतया रोक लगे व गंदे नालो का भी मां नर्मदा में समावेश होना पूर्णत: बंद हो। इस विषय को लेकर लगभग 700 दिनों से निराहार रहकर परम तपस्वी भैय्याजी सरकार केवल मात्र नर्मदा जलग्रहण कर राज्य सरकार को जगाने का प्रयास कर रहे हैं किंतु मंडला न्यायालय परिसर में नवनिर्मित आलीशान बहुमंजिला बिल्डिंग बनने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मननीय उच्च नायालय के आदेश की अवहेलना एव धार्मिक आस्थाओं से साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस अत्यंत गंभीर विषय पर तत्काल मध्य प्रदेश की सरकार कोई उचित निर्णय ले ताकि अमरकंटक से खम्बात की खाड़ी तक मां नर्मदा तट पर हुए अवैध अतिक्रमण धराशायी हो सके।
कोर्ट ने दिया था कब्जा हटाने का निर्देश-
वहीं जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान माननीय उच्चयायालय ने स्पष्ट कहा है कि नर्मदा नदी के किनारे 75 आतिक्रमण पाये गये कोर्ट ने अवैध निर्माणों को गिराने का निर्देश दिया था जो 1 अक्टूबर 2008 के बाद बने थे, वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंड पीठ ने नर्मदा नदी के 300 मीटर के दायरे में ही रहे निर्माण पर लगी रोक से इंकार कर दिया था। और नई निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंधित कर दिया है। इसके बाद भी आज मंडला के न्यायालय परिसर में आज बहुमंजिला ईमारत बन रही है जहां पर हाई कोर्ट ने रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है। वहीं आज मंडला में बहुमंजिला बन कर तैयार होने को है और वो भी मां नर्मदा के तट से मात्र 200 मीटर की दूरी के अंदर निर्माण कर चल रहा है।
नगर को तीन ओर से मां नर्मदा की गोद है नसीब-
आदिवासी बाहुल्य मंडला नगरी जिसे महिष्मति नगरी के नाम से भी जाना जाता है। इस नगर के तीनों ओर से मां नर्मदा अपने गोद मे लिए हुये है। मां नर्मदा के किनारे किनारे मंडला शहर बसा हुआ है। जिससे यहां की प्राकृतिक सुंदरता में चार-चांद लग जाते हैं। वैसे तो नर्मदा तट के किनारे बहुत से तपस्वियों मुनियों के आश्रम व घाट बने हुए हैं लेकिन मां नर्मदा के तटों के किनारे अब बड़ी तेजी से भू माफियाओं के साथ सरकारी निर्माण एजेंसी और अतिक्रमणकारियों की बाढ़ सी आ गई है। साथ ही दोनों तटों के किनारों पर कच्चे पक्के मकानों और सरकारी भवनों का निर्माण बदस्तूर जारी है।
मां नर्मदा के प्रति लोगों में असीम आस्था-
लोगों का मां नर्मदा की पवित्र नदी के प्रति अटूट आस्था व विश्वास है। जिसका नतीजा यह है कि घाटों के सुंदर निर्माण होने के चलते सुबह शाम जनमानस का हुजूम बना रहता है व संध्या आरती के समय सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पूजन अर्चन हेतु मां नर्मदा के तट पर पहुंचते हैं। इस पवित्र नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के किये जगह-जगह सीवर प्लांटों का निर्माण कराया गया है। साथ ही शहर के गंदे नालों का पानी नर्मदा नदी में समाहित होता है जिससे लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। जिसे रोकने हेतु सरकार के अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि मध्य प्रदेश संस्कृति एवं पर्यटन विकास विभाग के द्वारा नर्मदा नदी पर विशेष जोर दिया जा रहा है व नर्मदा तटों के दोनों किनारे पर पक्के भवनों का निर्माणों पर रोक लगनी चाहिये। जिससे नर्मदा तटों के किनारे की हरियाली व प्राकृतिक सुंदरता कायम रहे पर ऐसा देखने को नहीं मिल पा रहा है। मां नर्मदा के तटों के किनारे बड़े बड़े बहुमंजिला पक्के मकानों का निर्माण किया जा रहा है। जिससे भविष्य में मां नर्मदा की सुंदरता पर ग्रहण लगते नजर आ रहा है।
इनका कहना है ....
सूचना अधिकार से जानकारी प्राप्त की की मंडला जिले में जो कोर्ट परिसर में बहुमंजिला इमारत बन रही है वह अबैध तरीके से निर्माण कराई जा रही है जहाँ सरकार और हाईकोर्ट के आदेश अनुसार माँ नर्मदा को दोनों तटों के तीन सौ मीटर के अंदर कोई भी नया निर्माण नही कर सकता पूर्व में उच्च न्यायालय जबलपुर ने डिंडौरी में बन रहे भवन को हटाने के आदेश दिए ये पी आई यू विभाग मंडला को सब पता है इसके बाद भी नियम को नजरअंदाज करके भव्य निर्माण करना नियम विरुद्ध है।
मुकेश श्रीवास
आर टी आई कार्यकर्ता मंडला


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