दैनिक रेवांचल टाइम्स - भोपाल नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बंधु की अगुवाई तथा प्रांत अध्यक्ष परमानंद डेहरिया, डी के सिंगौर सहित 20 से ज्यादा कर्मचारी संगठनों के प्रांत अध्यक्षों के आह्वान पर पूरे प्रदेश भर के लगभग पचास हजार से अधिक कर्मचारी-अधिकारी भेल दशहरा मैदान भोपाल पर आयोजित एक दिवसीय वरिष्ठता सह पुरानी पेंशन महासम्मेलन में शामिल हुए। इस महासम्मेलन में मंडला जिले के हजारों शिक्षक, कर्मचारी जिला अध्यक्ष दिलीप मरावी,उमेश यादव,अभित गुप्ता, गंगाराम , कमलेश मरावी, मूलचंद कुन्जाम,संजीव सोनी, नंदकिशोर कटारे, मंगलसिंग पन्दरे ,रमेश गुमास्ता,अमरसिंग चन्देला के नेतृत्व में ट्रेन, बस एवं निजी वाहनों से भोपाल पहुंचे, जिसमें महिला मोर्चा की रश्मि मरावी, मीना साहू, सरिता सिंग, सविता कटारे,अर्चना गुमास्ता, संजू लता सिंगौर के मार्गदर्शन में सैकड़ों महिला कर्मचारियों ने महासम्मेलन में पहुंचकर एनपीएस के विरोध में अपना आक्रोश व्यक्त किया।
सरकार की राह आसान नहीं होगी
वर्तमान में हिमाचल के बाद मध्यप्रदेश में भी पुरानी पेंशन प्रमुख चुनावी मुद्दा बन गया है, जिसे देखकर विपक्ष ने भी पुरानी पेंशन के मुद्दे को लपकते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार बनते ही मध्यप्रदेश प्रदेश के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा कर दी है। जिससे उत्साहित होकर प्रदेश भर के कर्मचारी वर्तमान सरकार से चुनाव पूर्व इस बजट सत्र में पुरानी पेंशन बहाल करने का दबाव बना रहे हैं। ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर ने "पेंशन नहीं तो वोट नहीं" "वोट फॉर ओपीएस" का नारा बुलंद करते हुए कहा कि यदि वर्तमान सरकार पुरानी पेंशन लागू नहीं करती तो कर्मचारी अपने और आने वाली युवा पीढ़ी के भविष्य को देखते हुए सरकार बदलने के लिए काम शुरू कर देंगे। यदि पुरानी पेंशन बहाल नहीं होती तो कर्मचारियों के रुख़ को देखते हुए कहा जा सकता है कि वर्तमान सरकार की फिर से सत्ता में आने की राह आसान नहीं होगी।
सरकार बनाने का फार्मूला
राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बंधु ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए पेंशन देने वाली सरकार बनाने का फार्मूला समझाया। उन्होंने कहा कि जब कर्मचारी विशेष रूप से शिक्षक ठान लेते हैं तो देश, प्रदेश की सत्ता बदल जाती है। प्रदेश के 6 करोड़ वोटरों में सिर्फ चार से पांच करोड वोटिंग ही होती है। प्रदेश में राज्य एवं केंद्र के 8 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। हर कर्मचारी के परिवार में औसतन 5 वोट होते हैं। इस तरह उनके परिवार से ही 40 लाख वोट होते हैं और यदि अपने भविष्य को संवारने के लिए प्रत्येक कर्मचारी इस चुनाव में थोड़ी सी मेहनत कर ले तो प्रत्येक कर्मचारी कम से कम 10 बाहरी वोटरों को प्रभावित कर सकता है। इस तरह एक करोड़ से अधिक यानी लगभग 20% वोटों को प्रभावित करने का माद्दा कर्मचारी रखते हैं।
कर्मचारी की इस ताकत को कांग्रेस अच्छे से जानती है, इसलिए यदि चुनाव के पूर्व पुरानी पेंशन बहाल नहीं की जाती तो इससे आहत कर्मचारी आगामी चुनाव में इस बात का बदला जरूर लेंगे।


No comments:
Post a Comment