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Tuesday, January 24, 2023

विधुत विभाग के आउटसोर्सस और संविदा कर्मचारियों की हड़ताल बनी " अन्नदाता " के लिए मुसीबत...





रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में विद्युत विभाग की लापरवाही से किसानों की फ़सल हो रही हैं बर्बाद और जिम्मेदार मौन,

           वही मध्यप्रदेश सरकार और विद्युत विभाग के ठेकादारों से परेशान आऊट- सोरसेश कर्मचारी और संविदा कर्मचारियों की अनदेखी और लगातार उपेक्षा का शिकार होने की वजह से विद्युत विभाग के कर्मचारी 21 जनवरी 2023 से अनिश्चकालीन हड़ताल पर चले गए हैं, आऊट सोरसेज कर्मचारियों की मांग हैं की हमको भी विद्युत विभाग और सरकार के द्वारा लिखित में आश्वशान चाहिए की भविष्य में हमारा नियमतीकरण किया  जाएगा और काम के घंटे निश्चित किया जाना चहिए, साथ में काम के दौरान जब कोई भी कर्मचारी की अकाल मौत होती है या कोई घटना घटती है तो काम करने वाले कर्मचारी का सरकार और विद्युत विभाग के द्वारा  का बीमा की राशि का निश्चिच किया जाना चाहिए.!! ताकि भविष्य में घटना के शिकार होने वाले कर्मचारी के परिवार का भरण पोषण नियमित रूप से हो सके। ठेकेदार की मनमानी और मध्यप्रदेश सरकार की उपेक्षा की वजह से न तो आऊट सोरशेसेज कर्मचारियों और न ही  संविदा कर्मचारियों का वर्तमान उज्जवल है और न ही भविष्य..!!

हड़ताल पर गए कर्मचारियों का कहना है की एक और जहा हम रात दिन मेहनत करके सभी के घरों पर उजाला बनाए रखने का काम करते है, वही सरकार और ठेकादार की मनमानी की वजह से हमारा खुद और परिवार का वर्तमान और भविष्य अंधेरे पर हैं, हड़ताली कर्मचारियों का कहना है की हमको काम पर तो रख लिया गया हैं परंतु न तो वेतनमान का सुनिश्चित किया गया है और न ही काम के घंटों का ऐसे में हमको सरकार से लिखित में जवाब चाहिए हैं।।


आऊट सोसरेश कर्मचारियों को मिल रहा है संविदा कर्मचारियों का समर्थन...


हड़ताल पर गए आऊट सोरशेश कर्मचारियों को अब संविदा कर्मचारियों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया हैं साथ में सूत्रों से मिली जानकारीनुसार विद्युत विभाग के पावर हाउस में ताला बंदी भी की जाएगी संविदा कर्मचारियों की भी मांगें हे की हमको भी रिटायरमेंट 62 साल की उम्र पर किया जाना सुनिश्चित किया जाए..जिससे की हम एक जगह पर नियमित रूप से विद्युत विभाग में अपनी सेवा दे सकें और नियमित काम कर सकें अभी वर्तमान में ठेकेदार द्वारा कही से भी कोई भी कर्मचारी की भर्ती कर ली जाती हैं और जो कर्मचारी नियमित रूप से अपनी सेवा दे रहा होता है उसको बिना बतलाए ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता हैं जो की सरासर गलत हैं, हड़ताली कर्मचारियों का कहना हैं की  विद्युत विभाग में नियमतिकरन किया जाना सुनिश्चित करें।।


"अन्नदाता" हो रहें हैं सबसे जायदा परेशान...



विद्युत विभाग के कर्मचारियों का हड़ताल पर चले जाने की वजह से सबसे जायदा किसान परेशान हो रहे है क्योंकि अभी वर्तमान में सभी किसानों  के खेतों पर गेहूं की फसल लहलहा रही हैं किसानों की 2 महीनों की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है की चारों तरफ खेत हरे भरे दिखाई दे रहे हैं, और अब इन हरी भरी फसलों को पानी की आवश्यकता हे परंतु जिस दिन से विद्युत विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर गए हुए हैं उस दिन से विद्युत विभाग द्वारा विद्युत आपूर्ति का शेड्यूल बिगाड़ दिया गया हैं किसान एक तो पहले से ही विद्युत आपूर्ति  की कमी और मार को झेल रहें थे और अब हड़ताल होने की वजह से किसानों को नियमित शेड्यूल की जानकारी ना होने की वजह से दूसरी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं, विद्युत विभाग के द्वारा कभी- कभी पूरी रात विद्युत सप्लाई की जारी हे तो कभी- कभी दिन में भी लाइट नहीं दी जा रहीं हैं, विद्युत सप्लाई का शेड्यूल अनिश्चित होने की वजह से किसानों के खेतों में फसलों को कही- कही पानी नहीं मिल पा रहा हैं तो कभी रात- रात भर विद्युत सप्लाई होने की वजह से खेतों में पानी का अधिक भराव हो रहा हैं, जिस जगह पर खंबों और ट्रांसफार्मर के फ्यूज खराब हो गए हैं तो उनको सुधारने के लिए कोई नहीं मिल रहा हैं, विद्युत सप्लाई का सुनिश्चित न होने की वजह से कड़कड़ाती ठंडी में भी किसान रात- रात भर जाग कर खेतों में बैठ कर अपनी फसलों को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं, कुछ किसानों का कहना है की विद्युत विभाग द्वारा कभी- कभी पूरी रात सप्लाई दे दी जाती हैं..जिससे लगातार मोटर पम्प चलने की वजह से खेतों पर पानी का भराव अधिक हो जाता हैं जिससे गेंहू की फसल खराब होने की पूरी संभावना बनी हुई हैं।। वही बम्हनी- बंजर फीडर के अंतर्गत आने वाले बहुत से गांव जैसे सीलगी,खारी, लफरा,कटंगाटोला, धुतका,भड़िया, मलारा चंद्रपुरा करीब 20 से 25 गांव के किसानों ने अपनी समस्या को बतलाते हुए कहा कि हड़ताल के पहले विद्युत विभाग के द्वारा एक निश्चित शेड्यूल होने की वजह से सभी किसान को विद्युत आपूर्ति की जानकारी रहती थी जिससे किसान बंधु दिन में अपनी खेती के साथ- साथ जरूरत के अन्य काम भी कर लिया करते थे, और रात की शेड्यूल का निश्चित होने की वजह से खेतों में पानी का भराव अधिक होने जैसी कोई समस्या नहीं रहती थी, परंतु अब विद्युत आपूर्ति के शेड्यूल का निश्चित न होने की वजह से फसलों को अधिक नुकसान होने की पूरी संभावना बनी हुई है, साथ में पूरी- पूरी रात जाग कर खेतों में बैठ कर लाइट को तकना पड़ रहा हैं, जब विद्युत विभाग के कर्मचारियों से फोन के माध्यम से कोई  भी किसान के द्वारा जानकारी लेने का प्रयास किया जाता है तो हड़ताली कर्मचारियों द्वारा दो टूक जवाब दे दिया जाता हैं की आप हमसे कोई बात ना करें विद्युत आपूर्ति की जानकारी हम नही दे सकते हैं हम अभी हड़ताल पर हैं जो ड्यूटी पर हो आप उनसे बात कीजिए अब ऐसे में अन्नदाता जाए तो कहा जाए और किससे अपनी पीड़ा बतलाए.?? यदि विद्युत विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल जल्द ही समाप्त नहीं होती है तो यह तो निश्चित हैं की इस हड़ताल का सबसे जायदा व्यापक और बुरा असर आने वाले भविष्य में किसानों को झेलनी पड़ सकती हैं।

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