अपीलीय प्राधिकारी ने दिया आदेश, महाधिवक्ता कार्यालय से जानकारी लेकर आवेदक को प्रदान करें दस्तावेज, अपीलार्थी को मिली राहत
रेवांचल टाईम्स - जबलपुर, विभागीय पारदर्शिता को सबल बनाने हेतु जो अधिकारी संविधान के तहत भारतीय नागरिकों को मिले हैं, उसमें एक महत्वपूर्ण अधिकारी सूचना का अधिकार है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति संबंधित शासकीय विभागों के कार्य प्रणाली सहित समस्त दस्तावेज मांग सकता है। लेकिन इसी अधिकार को धता बताते हुए विभाग जानकारी देने में टाल-मटोल करते हैं। ऐसा ही एक मामला महाधिवक्ता कार्यालय से मांगी गई जानकारी को लोक सूचना अधिकारी ने गोलमोल और भ्रामक जानकारी देकर अपीलार्थी को भटकाया। दरअसल आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी का गोलमाल जबाव देने के एक मामले में प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और सचिव विधि और विधायी कार्य विभाग मप्र ने आदेश जारी करते हुए सूचना अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे पुन: विचार कर अधिनियम की मंशा के अनुरुप महाधिवक्ता कार्यालय से वांछित जानकारी प्राप्त कर अधिनियम के अंतर्गत नियत समयावधि में अपीलार्थी को प्रदान करें। मामले के अनुसार जबलपुर निवासी अधिवक्ता प्रभात कुमार यादव ने दिनांक 14 सितंबर 2022 को लिखित आवेदन देकर सात बिंदुओं पर विधि एवं विधायी कार्य विभाग भोपाल से तत्कालीन महाधिवक्ता से संबंधित जानकारी एवं दस्तावेज की प्राप्ति हेतु सूचना के अधिकार के तहत मांगी थी। मांगी गई जानकारी में महाधिवक्ता को कितने प्रकरण में विशेष अधिवक्ता के रूप में नियुक्ति आदेश और प्रकरणों की सूची सहित शासकीय संस्थाओं में पैनल अधिवक्ता होने के बावजूद महाधिवक्ता को पैरवी की नियुक्ति, विशेष अधिवक्ता के रूप में शासकीय नियमों के तहत किए गए भुगतान, प्रति उपस्थिति फीस का भुगतान, महाधिवक्ता को शासकीय प्रकरणों में विशेष अधिवक्ता नियुक्त करने के नियम, महाधिवक्ता कार्यालय में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिवक्ताओं व पैनल अधिवक्ताओं की सूची और नियुक्ति सहित अब तक कितने अजजा अधिवक्ताओं को महाधिवक्ता बनाया गया है, की जानकारी चाही गई थी। लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने पूरे मामले का गोलमोल एवं भ्रामक जबाव दिया। जिसमें आवेदक को दस्तावेज प्रदान नहीं करते हुए बिंदु अनुसार उत्तरात्मक शैली में जवाब दिया, जिससे क्षुब्ध होकर अपीलार्थी ने दिनांक 15 दिसंबर 2022 को प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर किया। जिसपर सुनवाई करते हुए सचिव और अपील प्राधिकारी उमेश पाण्डव ने अपने आदेश दिनांक 10 जनवरी 2023 के माध्यम से लोक सूचना अधिकारी, विधि एवं विधायी कार्य विभाग को यह निर्देशित किया है कि आवेदक के आवेदन पर पुनर्विचार करते हुए लोक सूचना अधिकारी, सूचना के अधिकार अधिनियम की मंशा के अनुरूप स्पष्ट निष्कर्ष दें एवं महाधिवक्ता कार्यालय से संबंधित जानकारी प्राप्त कर अधिनियम के अंतर्गत नियत समयावधि में आवेदक अधिवक्ता को प्रदान करें।
इनका कहना है-
मैं अभी गाड़ी चला रहा हूं, कल आपसे बात करुंगा।
आशीष आनंद बर्नाड, अतिरिक्त महाधिवक्ता
मुझे संबंधित विषय की जानकारी नहीं है। आप वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर लें।
मनोज सोनकर, निज सचिव, महाधिवक्ता मप्र

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