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Saturday, December 31, 2022

मुख्यमंत्री द्वारा निरस्त बसनिया बांध को शुरू करना आदिवासियों के साथ धोखा - डॉ अशोक मर्सकोले




रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में बन रह बांध को लेकर अनेक प्रकार से स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा विरोध प्रगट किया जा रहा है। वही 3 मार्च 2016 को विधानसभा में एक सवाल के जबाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने लिखित में कहा  था  कि सात बांधो को नए भूअर्जन अधिनियम से लागत में वृद्धि होने,अधिक डूब क्षेत्र होने,डूब क्षेत्र में वन भूमि आने से असाध्य होने के कारण निरस्त किया जाता है।जिसमें मंडला - डिंडोरी जिले की राघवपुर, रोसरा,बसनिया और अपर बुढनेर बांध शामिल है।


साथ ही नर्मदा घाटी विकास विभाग के वार्षिक प्रशासनिक प्रतिवेदन 2009 - 2010 में  जानकारी दिया गया था कि 50 हजार हेक्टेयर में सिंचाई और 20 मेगावाट जल विधुत उत्पादन किया जाएगा।  इस बसनिया बांध से डूब में आने वाली निजी,शासकीय एवं वन भूमि से मात्र 2500 हेक्टेयर क्षेत्र से ज्यादा में सिंचाई होगी।जबकि जैव विविधता से परिपूर्ण 2107 हेक्टेयर जंगल डूब जाएगा। सिंचाई तो स्थानीय समुदाय के लिए धोखा है,जल विद्युत उत्पादन ही बांध का मुख्य उद्देश्य है।जिसके लिए पावर फाइनेंस कार्पोरेशन नई दिल्ली और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्टस कम्पनी मध्यप्रदेश के बीच 26 मई 2020 को नर्मदा घाटी की विभिन्न परियोजनाओ के लिए 22 हजार करोङ रुपए के कर्ज का अनुबंध किया जा चुका है। ज्ञात हो कि बरगी बांध से 4.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य रखा गया था, परन्तु  32 साल बाद मात्र 70 हजार हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है।      


हम विकास के लिए विरोधी नहीं पर विकास के नाम पर आए बरगी बांध, कान्हा राष्ट्रीय वन उद्यान फैन अभयारण्य मनेरी उद्योगिक क्षेत्र चुटका परियोजना सरदार सरोवर बांध के नाम से आदिवासियों के जमीन सस्ते में लेकर सिर्फ़ छलावा हुआ है,


 जमीन के बदले जमीन, घर आंगन के बदले घर आंगन और अपनी नैसर्गिक सांस्कृतिक भौगोलिक विरासत क्षेत्र से हटाना उसके मुआवज़े के रूप में प्रदेश के उच्चतम राशि दिया जाना साथ ही रिक्त जमीन जल और जंगल के अधिकार की लगातार मांग हर स्तर  करते आये हैं, परंतु अनदेखी हुई हर स्तर से, इन प्रोजेक्ट से विष्ठापित आज कहाँ है किस स्तर की जिंदगी कहाँ जी रहा है किन प्रदेशों में मज़दूरी कर रहा है किसी को पता नहीं, किसी भी सरकार ने उनकी स्थिति जानने की कोशिश तक नहीं कि यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण रहा।  आदिवासी अब सजग और जाग्रत होगया है अपने अधिकारो के लिए लड़ने की स्थिति में भी है मैं एक सामाजिक जनप्रतिनिधि और विधायक के रूप में जनता के संघर्ष के साथ हूँ, अब आदिवासी समुदाय और उनके अधिकारों के साथ अन्याय नहीं होने दूँगा इसके लिए संकल्प बद्ध हूँ रहूँगा।


       वही जबकि विधायक के द्वारा 2021 में इस बांध को निरस्त कर लिफ्ट सिंचाई योजना में परिवर्तित करने हेतु मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया था।जिसमें न तो विस्थापन होगा न ही जंगल डूबेगा। परन्तु सरकार की हठधर्मिता के कारण  स्थानिय समुदाय पर जबरन विस्थापन थोपा जा रहा है।


इस विस्थापन के खिलाफ 26 सितंबर 2021 को चकदेही नारायणगंज मंडला में आयोजित नर्मदा चिंतन समागम में मेरे द्वारा घोषणा किया था कि सदन से सङक तक लङाई लङूंगा। आज भी इस पर कायम हूं।मेरी इस भूमिका पर कुछ असमाजिक तत्व प्रभावित होने वाले परिवार को गुमराह किया जा रहा है।

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