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Monday, December 5, 2022

नर्सों की लापरवाही के चलते महिला के गर्भ में ही हो गई थी शिशु की मौत...जिम्मेदार कौन



रेवांचल टाईम्स - स्वास्थ्य विभाग में अखिर किस कदर लापरवाही की जा रही ये किसी से छुपा नही है किसी जान जाये या बचे इन्हें कोई मतलब नही है इन्हें तो केवल अपना निजी स्वार्थ दिखता है सरकार से मिलने वाली वेतन कम पड़ रही है और आज ग़रीब लोग भी सरकारी सुविधाएं लेने से डर रहे है क्योंकि सरकारी व्यवस्था पेपटरी हो चली है। वही परिजन बार बार कहते रहे कि जबलपुर रेफर करे लेकिन नर्स की मनमानी के कारण  दूसरे दिन सुबह किया रिफर जिस कारण बच्चे की हुई मौत- परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ पर लगाया लापरवाही का आरोप


दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र का मामला आये दिन सुर्खियों का केंद्र बना स्वास्थ्य विभाग


विशाल रजक तेंदूखेड़ा/दमोह-

  दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा में स्वास्थ्य विभाग के लगातार लापरवाही व कर्मचारियों की मनमानी के मामले सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है यहां पर कर्मचारियों के साथ अवस्थाओं का आलम लगा हुआ है और सुनने वाला ना ही कौई देखने ना ही ध्यान देने वाला कोई नहीं है जिस कारण यहां पर आये दिन शिकायतों के साथ स्वास्थ्य केंद्र अखबार की हेडलाइन बना हुआ है गौर करने वाली बात तो यह है कि यहां पर भाजपा सरकार के विधायक भी है लेकिन उसके बाद भी यहां पर कोई सुधार नहीं हो पा रहा है और लगातार शिकायत और मामले आ रहे हैं अब इसी तरह एक और मामला सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है जहां पर नर्सों की लापरवाही के कारण एक एक महिला के गर्भ में ही शिशु की मौत हो जाने का घटनाक्रम सामने आया है प्राप्त जानकारी के अनुसार तेन्दूखेड़ा नगर के वार्ड़ क्रमांक 2 के निवासी दीपक पिता स्व. निर्मल कुमार सोनी ने नगर के सामुदायिक स्वास्थ में पदस्य नर्स के उपर गंभीर अरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री,कलेक्टर मुख्य चिकित्सा अधिकारी दमोह एव विघायक धर्मेंन्द्र सिंह, लोधी को आवेदन सौंपा है। इसके अलावा 181 पर भी षिकायत दर्ज कराई है। आवेदन में उल्लेख कर बताया कि दिनांक 28 नवंबर को शाम 7 बजे में अपनी गर्भवती पत्नी श्रीमति वैशाली सोनी को पेट में दर्द होने के कारण नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लेकर गया था। जहाँ पर रात में नर्स रंजना बेन द्वारा मेरी  पत्नि की जांच की गई, साथ ही नर्स के द्वारा मुझे 2 से 3 घंटे में प्रसव होने का आष्वासन दिया गया। इसके पश्चात् 3 घंटे बीत जाने के बाद भी महिला की प्रसव पीड़ा कम नही हुई। इसके बाद मेरी पत्नी की और अधिक तबीयत बिगड़ने लगी, तब मेंरे द्वारा एवं उपस्थित परिजनों द्वारा नर्स से कहा गया कि मरीज की अधिक तबीयत खराब हो रहीं है, जिसे जबलपुर रेफर कर दीजिए, तब उन्होंने पुनः 2 घंटे पश्चात् प्रसव हो जाने का आष्वासन दिया एवं उनका कहना था कि सब कुछ ठीक है, आप चिंता न करें। किन्तु कुल 5 घंटे बीत जाने के बाद और अधिक तबीयत खराब होने पर हमारे द्वारा पुनः उनसे निवेदन किया गया कि मेड़म अगर समस्या अधिक हो तो आप रेफर कर दीजिए हम अपने साधन से जिला अस्पताल या जबलपुर मेंडीकल कॉलेज पहुंच जायेंगे, किन्तु उन्होंने लगातार हम परिजनों को अंधेरे में रखा जिससे शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक पूरी रात, असहनीय पीड़ा होने के बाद स्थिति नर्स के हाथ से बाहर होते देख उक्त नर्स द्वारा अगली 29 नवबंर की सुबह 8 बजे मेरी पत्नी को जबलपुर मेंडीकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, किन्तु इसके बाद एंबूलेंस को आने में लगभग आधे घंटे का समय लग गया। इस लापरवाही के कारण जबलपुर जाते समय ही मेरी पत्नी के पेट में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। जिस पर आवेदक ने नगर के अस्पताल प्रबंधन के साथ उपरोक्त नर्सं पर उचित कार्यवाही करने की मांग की हैं। जवलपुर से छुटटी मिलने के बाद आवेदन देकर यह कार्यवाही की मांग की जा रही है। 


इनका कहना- 

       इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सीबीएमओ आरआर बागरी ने कहां कि में दिखवाता हूॅ और मामले की जॉच कराता हूॅ इसके बाद विधिवत कार्यवाही की जाएगी।

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