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Wednesday, December 28, 2022

अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र से जिला शिक्षा अधिकारी के उच्च पद है आसीन नही हो रही कार्यवाही फर्जी प्रमाण पत्र की...आखिर कब होगी जाँच और कौन करेगा



अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र से जिला शिक्षा अधिकारी के उच्च पद है आसीन नही हो रही कार्यवाही फर्जी प्रमाण पत्र की...आखिर कब होगी जाँच और कौन करेगा,

 

रेवांचल टाइम्स-  मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में एक नही दो नही बल्कि सेकड़ो लोगो ने अपने निजी स्वार्थ के चलते अपनी मूल जाति बदल ली जिसकी जाँच उनके वरिष्ट कार्यालय में वर्षो से लंबित बड़ी कही किसी नेता का संरक्षण या फिर अपनी जाति बदल कर की अबैध कमाई के दम पर अपनी शिकायतों को दबा दिया गया है मध्यप्रदेश के हर जिले में कई लोगों ने अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर शासकीय नौकरी हथिया ली है। 

         वही ऐसा ही एक मामला मंडला के शिक्षा विभाग में पदस्थ सहायक संचालक सुनीता बर्वे का सामने आया है। जिसमें  सुनीता बर्वे ने अपनी जाति बदल कर अनुसूचित जनजाति वर्ग का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर शासकीय नौकरी हथियाली। इसका खुलासा 6 साल पहले आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ। उसके बाद आरटीआई एक्टिविस्ट मुकेश श्रीवास ने शासन से लेकर प्रशासन तक उक्त फर्जीवाड़े के खिलाफ जांच करने की मांग की, शासन से लेकर प्रशासन तक उक्त फर्जीवाड़े के खिलाफ जांच करने की मांग की, विभाग और शासन सुनीता बर्वे के खिलाफ जांच कर वैधानिक कार्यवाही करने के बजाय पूरे मामले पर कुंडली मारकर बैठा हुआ है। आरटीआई के तहत सुनीता बर्वे के जो दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, उसके अनुसार सुनीता बर्बे कोस्टा जाति की है और मध्यप्रदेश में कुछ जिलों को छोड़ बाकी जिलों में कोस्टा पिछड़ा वर्ग में आते है । वही जबलपुर गोरखपुर निवासी श्रीमती बर्बे ने 23 जून 1987 को उच्च श्रेणी शिक्षक के पद पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उमरियापान जिला जबलपुर में भर्ती हुईं। सुनीता बर्वे ने शासकीय नौकरी पाने के लिए पिछड़ा वर्ग का लाभ न लेते हुए फर्जी अनुसूचित जनजाति का जो प्रमाणपत्र दिया है, उसमें जाति प्रमाणपत्र में न तो प्रकरण क्रमांक दर्ज है, न ही उसमें जारी करने का दिनांक उल्लेखित है। खास बात यह है कि तहसीलदार गोरखपुर कार्यपालिक दंडाधिकारी जबलपुर द्वारा भी इस जाति प्रमाणपत्र को अपने कार्यालय से जारी नहीं होना लिखित रूप में बताया है। वहीं सुनीता बर्वे के वैवाहिक दस्तावेजों में विवाह पूर्व नाम सुनीता कोष्टा पिता नन्हे लाल कोष्टा था, यह जाति प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के रूप में जाना जाता है। वही सुनीता का विवाह सुरेंद्र कुमार बर्वे से हुआ, वह जाति भी पिछड़ा वर्ग में ही आती है। पति और बच्चे पिछड़ा वर्ग और सुनीता बर्बे अनुसूचित जन जाति में वही सुनीता बर्वे की समग्र सदस्य आईडी क्रमांक 139143534. है, विवरण अनुसार यह भी पिछड़ा वर्ग में ही आता है। इसके बावजूद भी सुनीता बर्वे ने कुटरचित तरीके से अनुसूचित जनजाति वर्ग का फर्जी दस्तावेज बनवाकर शासकीय सेवा प्राप्त की और उसी जाति वर्ग के आधार पर पदोन्नति से लेकर आज मंडला जिले में जिला शिक्षा अधिकारी के उच्च पद पर आसीन है और समस्त प्रकार का लाभ ले रही है।


सीएम से लेकर कलेक्टर तक पहुंची जानकारी नहीं हुई पर नही हुई कार्यवाही


आरटीआई कार्यकर्ता मुकेश श्रीवास ने मय दस्तावेजों इस फर्जीवाड़े की जांच कर वैधानिक कार्रवाई की मांग करते हुए सीएम, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, आयुक्त जनजाति कार्य विभाग आयुक्त जबलपुर छानबीन समिति भोपाल तक को पत्र लिखा लेकिन अभी तक सुनीता बर्वे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।


छानबीन समिति के पास सालों से है मामला लंबित,


वही इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद अपर संचालक जनजाति कार्य मप्र ने संज्ञान लेते हुए एक नवंबर 2021 को आरटीआई कार्यकर्ता मुकेश श्रीवास को अवगत कराया कि सुनीता बर्वे, सहायक संचालक कार्यालय शिक्षा अधिकारी मंडला के फर्जी जाति प्रमाणपत्र की जांच कराने कहा गया है। लेकिन एक साल बीते भी अभी तक सुनीता बर्वे के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं हो सकी है।

इनका कहना है...

           जब जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती सुनीता बर्बे जी से उनसे मोबाईल से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने मोबाईल उठाना भी मुनाशिब नही समझा जिससे उनका पक्ष नही जान पाए है।

                               जिला शिक्षा अधिकारी मंडला

            मेरे द्वारा सूचना अधिकार के आवेदन के माध्यम से जानकारी मंडला जबलपुर से निकाली जिसमे तहसीलदार लिखा गया कि कार्यालय से प्रमाण पत्र जारी नही किया गया है, फर्जी प्रमाण पत्र के आधार से जिला शिक्षा अधिकारी के उच्च पद पर आसीन श्रीमती सुनीता बर्बे जो कि अन्य पिछडा वर्ग में आती है और उन्होंने कूटरचित तरीके से फर्जी प्रमाण पत्र बनवा कर अनुसूचित जनजाति वर्ग का लाभ ले रही जिसकी शिकायत मेरे द्वारा वर्ष 2016 से आज दिनांक तक मय दस्तावेजों के कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री आयुक्त छानबीन समिति को की है पर कही न कही राजनीति संरक्षण और पैसे के दम पर कार्यवाही नही हुई है पर बहुत जल्द माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ सकती है।

                                       मुकेश श्रीवास 

                          आर टी आई कार्यकर्ता

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