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घोष की कविताएं मनुष्य के मानुष प्रकृति को संरक्षित करने वाली कविता है। युवा कवि और फिल्मकार सुदीप सोहनी....



रेवांचल टाईम्स - मंडला युवा कवि और फिल्मकार सुदीप सोहनी ने कहा कि शंख घोष की कविताओं में स्मृति की तटस्थता एक काव्य मूल्य की तरह मौजूद रहा है। शंख घोष अपनी कविताओं में देशज एवं पाश्चात्य ज्ञान परम्पराओं को लेकर कविता की दार्शनिक परिभूमि तक पहुंचते हैं। वे मानवीय अभिव्यक्ति के कवि हैं। युवा कवि सौरभ राय ने कहा कि शंख घोष की कविताओं में विषय गत सौंदर्य से कहीं अधिक भाषा गत सौंदर्य उन्हें महत्त्वपूर्ण बनाती हैं। इन कविताओं में चुप्पी की बेकल पुकार है।

कार्यक्रम का दूसरा सत्र पंजाबी के कवि हरभजन सिंह पर केंद्रित था। कवियित्री बाबुषा कोहली ने कहा कि जीवन के वैविध्यपूर्ण तरलता मौजूद है। जो कभी कभी तनाव तो कभी कभी सुख देता है। हरभजन सिंह अपनी कविताएँ वास्तविक संसार के बीचों बीच स्वप्न से जगाने वाली हैं। युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश ने कहा कि पंजाबी काव्य परम्परा में हरभजन सिंह एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। उन्हें पंजाबी काव्य परम्परा में किसी एक खाँचेन में नहीं रखा जा सकता है। युवा कवि विहाग वैभव ने कहा कि हरभजन सिंह की कविताओं का स्थापत्य सत्य की स्वीकार्यता से निर्मित होता है। हरभजन सिंह की कविताओं के रूपक उनकी आत्मकथा सरीखा लगते हैं। युवा आलोचक शुभम मोंगा ने कहा कि हरभजन सिंह की अंतर्दृष्टि उनकी रचनाओं को विशिष्ट बनाती हैं। युवा कवि कुमार मंगलम ने कहा कि हरभजन सिंह ने अपनी कविता में कोई सभ्यता समीक्षा संभव किया है तो वह बहुत हद तक राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक और सांप्रदायिक संदर्भों में मनुष्य को केंद्र में रखकर उदात्त जीवन का भाष्य रचा है। वे अपनी कविता में श्रम, करुणा और सौंदर्य को उसकी समूची द्वंद्वात्मकता में उभार देते हैं। अरुणाभ सौरभ ने कहा कि हरभजन सिंह की कविताएँ लोक जीवन की आस्था से रची बसी आधुनिकता से अनुप्राणित है। हरभजन सिंह की कविताओं में व्यापक भारतीय समाज अभिव्यक्ति पाता है। 

कार्यक्रम का तीसरा सत्र उर्दू के कवि अख्तर उल ईमान पर केंद्रित था। इस सत्र में कवयित्री रश्मि भारद्वाज ने अपने वक्तव्य में कहा कि अख़्तर उल ईमान की रचनाएँ एक साथ जीवन से मोहभंग और फिर नए सिरे से उससे मोह जोड़ने की कवायद है। इनमें एक गहन सामाजिक बोध और अपने यथार्थ को चित्रित करने चलने की एक सतत कोशिश देखते हैं लेकिन साथ ही यहाँ एक प्रखर राजनैतिक चेतना भी दृष्टिगत होती है जो तमाम राजनीतिक अस्थिरताओं और सत्तासीनों की स्वार्थी लालसाओं के बीच अपनी आवाज़ की आज़ादी को लेकर, आवाम की आवाज़ को जगह देने के लिए न सिर्फ़ आकुल है, अपनी रचनाओं में बहुत ही संजीदगी से उसे ‘तीसरी आवाज़’ की तरह प्रतिस्थापित भी करती है। कवि की आवाज तीसरी आवाज है। यह आवाज मनुष्यता के पक्ष की आवाज है। आवाम की आजादी की आवाज है। ईमान की नज़्में आत्मा की पीड़ा की मुखर अभिव्यक्ति है। आलोचक राहुल सिंह ने कहा कि रात उनकी कविता में कई तरह से व्यक्त हुआ है। जिस तरह हिंदी कविता में मिथकीय चेतना मौजूद है उसी तरह ईमान के यहां भी यह चेतना मौजूद है। इस्लाम धर्म की मिथकीय चेतना को जाने बगैर ईमान की कविता पढ़ने मुश्किल काम है। कवि आनंद गुप्ता ने कहा कि ईमान आम आदमी के पक्ष में अपनी आवाज उठाने वाले कवि हैं। अपनी अभिव्यक्ति के लिए उन्होंने ग़ज़ल को छोड़ नज़्में चुनी। वे खुरदुरे यथार्थ के कवि हैं। कवयित्री ज्योति शर्मा ने कहा कि ईमान की शायरी अपने समकालीनों में अलग राह बनाती हैं। इनके नज़्मों में यथार्थ का आग्रह इतना है कि वे उर्दू में एक नई परम्परा को निर्मित करते प्रतीत होते हैं। वे मानवता के आकुलता को अभिव्यक्त करने वाले शायर हैं। कवि अर्पण कुमार ने कहा कि ईमान प्रश्नाकुलता के दायरे में समाज को रखते हुए स्वयं को समाज से विलग नहीं करते। वे आधुनिकता और परम्परा के धरातल पर निर्भय होकर काल के सीमाओं को अपनी रचनाओं में लांघ कर क्लासिकल को अतिक्रमित करते हैं। वे अपनी रचनाओं में बोलने को ताकत देते हैं। 


युवा 2022 के पहले दिन का समापन उस्ताद महमूद फारुखी द्वारा सैयद हैदर रज़ा की जीवनी की प्रस्तुति दास्तान-ए-रज़ा से हुई। युवा 2022 के कल के सत्र में अयप्पा पणिक्कर, रमाकांत रथ और अरुण कोलटकर पर बातचीत होनी है।

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