मंडला जिले के जंगल विभाग में चल रहा है जंगल राज भ्रष्टाचार का गढ़ बना जंगल विभाग... - revanchal times new

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Sunday, November 6, 2022

मंडला जिले के जंगल विभाग में चल रहा है जंगल राज भ्रष्टाचार का गढ़ बना जंगल विभाग...





रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में सरकार द्वारा चलाई जा रही जनहित की योजनाओं में अधिकारी कर्मचारीयो के द्वारा डाका डाला जा रहा है। जंगल विभाग में ये सब भ्रष्टाचार देख कर एक कहावत सच होती दिखाई पड़ रही हैं कि जंगल मे मोर नाचा देखा कौन बस इसी तर्ज में जिले में खुलेआम ग्राम पंचायत से लेकर जंगल जंगल तक भ्रस्टाचार का खेल चल रहा है। और जिम्मदारो को जंगल विभाग के जंगल मे झांकने की फुर्सत किसको है।

          वही जानकारी के अनुसार सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं को ऑनलाईन कर दी जिससे कि भ्रष्टाचार में लगाम लग सके पर लगाम लगती तो छोङ जिन्हें ये जिम्मेदारी दी है वह सब ऑनलाईन में ही गोल लाईन कर रहे हैं। आज योजनाएं पोर्टल में विकसित दिखाई पड़ रही दिल्ली भोपाल में बैठे सरकारी तंत्र बडा ही खुश होता है कि हमने जो विकास के लिए राशि दी थी वह पहुँच गई और गरीबों को मूलभूत सुविधाएं मिल गई पर जमी हकीकत देखना कौन रहा है कि प्राप्त राशि से क्या हुआ क्या नही हुआ ये देखने की फुर्सत नही है।

           वही जानकारी के अनुसार एक ताजा मामला प्रकाश में आया है जहाँ पर जंगल विभाग के जिम्मदारो ने गरीब मजदूरों को मिलने वाली लाखों रुपए रेंजर ग़बन कर कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी के खाते में डलवाया ओर सरकारी राशि का बंदरबांट कर दी, वही प्रभारी डीएफओ के भरोसे चल रहे पश्चिम सामान्य वनमण्डल कार्यालय में फाईलों का बोझ बढते जा रहा है तो वहीं अनेक गंभीर मामलों में भी कोई खास कार्यवाही नही हो पा रही है। यहां कई माहों से डीएफओ का पद रिक्त पड़ा हुआ है प्रभारी डीएफओ के भरोसे कार्यालय का संचालन किया जा रहा है। अभी जबलपुर के डीएफओ पश्चिम वनमण्डल मण्डला के प्रभारी हैं जो सप्ताह दो सप्ताह में एक दो दिन ही आते हैं। तो दूसरी तरफ वन परिक्षेत्रों में भी मनमर्जी का आलम दिखाई दे रहा है ऐसा ही एक मामला अब चर्चाओं में आया है। जब लोगों को जानकारी मिली कि वन परिक्षेत्र महाराजपुर में मजदूरों के भुगतान की राशि कार्यालय के ही कर्मचारी के खाते में डालकर मिलीभगत से निकाल ली गई और बंदरवाट कर ली गई यह राशि भी लाखों में बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार पश्चिम सामान्य वन मण्डल के अंतर्गत परिक्षेत्र महाराजपुर में लाखों रुपयों की हेराफेरी का मामला सामने आया है। यह आरोप तत्कालीन परिवीक्षाधीन वनक्षेत्रपाल मेघा कुर्मी पर लगे है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय महाराजपुर में पदस्थ प्रायवेट कर्मचारी अखिलेश सिंगरौरे उर्फ अभय कम्प्यूटर ऑपरेटर के बैंक खाते में नियम विरुद्ध लाखों रुपयों का लेन देन किया गया है और यह लेन देन तत्कालीन परिवीक्षाधीन वनक्षेत्रपाल मेघा कुर्मी द्वारा मई 2021 से जून 2022 में फर्जी न प्रमाणक बनाकर भुगतान प्रायवेट कर्मचारी 7 अखिलेश सिंगरौरे उर्फ अभय कम्प्यूटर ऑपरेटर के बैंक खाते में जमा किया गया है। जिसकी पुष्टि भी हो चुकी है और जॉच के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ रहे है संबंधित रेंजर अब यहां नही है लेकिन उनके कारनामे गजब के रहे हैं। सरकारी धन की किस तरह यहां होली खेली गई इसकी यह छोटी जानकारी सामने आई है सूत्र तो यह भी कहते है कि यहां पर फर्जी मजदूरी हाजरी भर हर माह लाखों रूपए का ब्यारा न्यारा किया जाता है यह हाल अन्य . परिक्षेत्रों में भी बताया जा रहा है बता दें कि अब मजदूरों का भुगतान ऑनलाईन के माध्यम से खाते में किया जाना है लेकिन अधिकारी अपने चहेते कर्मचारी और उनके परिजनों के नाम मजदूरी हाजरी में दर्शाकर उनके खाते में डालते है और फिर उन लोगों से राशि निकलवा लेते हैं। छोटे कर्मचारी डर और दबाव में कुछ बोल नही पाते हैं मजबूरी में उन्हें यह गलत काम करना पड़ रहा है। वहीं मस्टर रोल में और शासकीय दस्तावेजों में बड़ी मात्रा में फर्जी हाजरी भर राशि निकाली जा रही है जंगलों की साफ सफाई, वनों की कटाई सहित अन्य कार्यो में लगने वाले मजदूरों के लिए मिली राशि पर जिम्मेदारों का घपला चर्चा में आ गया है। बता दें कि महाजपुर वन परिक्षेत्र के जंगलों की हो रही अवैध कटाई से पर्यावरण पर प्रभाव पड़ने व मौसम परिवर्तन से इंकार नहीं किया जा सकता। दो दशक पहले जिले में अधिक भू-भाग पर जंगल लहलहाते थे लेकिन वर्तमान में इनकी तादात कम हो गई है। साल, शीशम और सागौन के जंगलों के लिए मशहूर इस इलाके में सागौन के वृक्ष अलविदा कहने की कगार पर हैं। साल और शीशम के वृक्षों के नये पौधे नहीं तैयार होने से यह प्राचीन वृक्ष भी संकट में हैं। पर्यावरण की समस्या मानव जीवन के लिये सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है। मौसम में हो रहे असमय परिवर्तन की सबसे बड़ी जड़ यही पर्यावरण है जिसके सुधार के प्रति किसी का ध्यान नहीं है। आने वाले समय में न तो पर्याप्त पानी मिलेगा और न ही सुखमय वातावरण होगा। पर्यावरण के मूल्यों के पालन करने के प्रति लोगों की बढ़ती अरूचि भयावह रूप धारण करने का संकेत दे रही है। पर्यावरण सुरक्षा का मामला शिष्टाचार की तर्ज पर दूसरे को स्थानांतरण करने पर विश्वास करने की जो परंपरा चल पड़ी है वह अत्यंत खतरनाक है। पर्यावरण एवं जीवन बचाना है तो वन और औषधियों को जीवन बचाना है। जिसके लिए एक बड़ा जागरूकता अभियान की दरकार है। बहरहाल जंगलों की बेरोकटोक हो रही कटाई के दुष्परिणाम हमारे समक्ष है और इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मौसम में हो रहा परिवर्तन है। इसके बावजूद भी लोग पर्यारण संतुलन व वनों की सुरक्षा के प्रति सचेत नहीं है।

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