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Monday, November 21, 2022

फसल अवशेषों को न जलाएं, उसका प्रबंधन कर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं

 


 

मण्डला 21 नवम्बर 2022

                जिले में धान फसल की कटाई का कार्य प्रारंभ हो चुका है। प्रायः यह देखा जाता है, कि किसान फसल काटने के पश्चात् आगामी फसल के लिये खेत तैयार करने और अपनी सुविधा के लिये खेत में आग लगाकर तने के डंठल व फसल अवशेष को नष्ट कर देते हैं। जबकि नरवाई जलाने से विभिन्न तरह के नुकसान होने की परिस्थिति निर्मित होती है। जिले के सभी किसानों से अपील है कि फसल अवशेषों (नरवाई) को नहीं जलायें और इसका प्रबंधन करते हुये उसे रोटावेटर एवं अन्य कृषि यंत्रों के माध्यम से भूमि में मिलाकर भूमि के जीवांश पदार्थ की मात्रा में वृद्धि कर भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ायें।

                प्रदूषण एक्ट 1981 की धारा 19 (1) के तहत् फसल अवशेषों को जलाये जाने पर व्यक्ति व निकाय को पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि नेशनल ग्रीन ट्रिव्यूनल को निम्नानुसार देय करना होगा। 2 एकड़ से कम भूमि स्वामी, निकाय 2500 रूपये। 2 एकड़ से अधिक एवं 5 एकड़ से कम भूमि स्वामी, निकाय 5 हजार रूपये। 5 एकड़ से अधिक भूमि स्वामी, निकाय 15 हजार रूपये।

                उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंडला द्वारा बताया गया कि नरवाई में आग लगाने से खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं जससे भूमि की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है और उत्पादन में कमी आ जाती है। खेत में पड़े फसलों के अवशेष जैसे- भूसा, डंठल, कड़वी सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं।

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