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Friday, November 18, 2022

जबरिया फीलगुड कराने का इवेंट जनजाति गौरव दिवस!..




रेवांचल टाईम्स - धरती आबा बिरसा मुंडा का जन्मदिवस मध्यप्रदेश शासन द्वारा जनजाति गौरव दिवस के तौर पर मनाया गया!  जुंबा डांस, कलश यात्रा, चुनरी चढ़ाना, रंगोली प्रतियोगिता जैसी अनेक गैर आदिवासी गतिविधियों के साथ मनाए गए  *जनजातीय गौरव दिवस में जनजाति गौरव की बातें और गतिविधियां कम ही देखने मिली!



बिरसा मुंडा ने अपने साथियों के साथ बंदूक और तोपों का मुकाबला तीर कमान से किया। उनका विद्रोह जमीदारी और अंग्रेजों की राजस्व व्यवस्था के खिलाफ था। उनके ही एक परिचित ने उनके ठिकाने का पता देकर उन्हें गिरफ्तार करवा दिया। और अंतिम हस्र रांची जेल में उनकी मृत्यु के रूप में हुआ।


धरती आबा पर आप क्यों गर्व कर रहे हैं! इसीलिए ना कि उन्होंने जमीदारी व्यवस्था और अंग्रेजों की राजस्व व्यवस्था को अमान्य किया। लोगों को एकजुट किया, उसकी खिलाफत की। 


तो फिर जनजाति गौरव के अवसर पर अंग्रेजों की राजस्व व्यवस्था को आप खत्म क्यों नहीं करते? आदिवासी क्षेत्र जमीदारी व्यवस्था से भी बड़ी क्रूर वन विभाग की गुलामी से समुदायों को मुक्त क्यों नहीं करते? 


जुंबा डांस, कलश यात्रा, चुनरी चढ़ाना रंगोली प्रतियोगिता, इन सब से कैसे जनजाति गौरव परिलक्षित हो रहा है। जनजाति गौरव के नाम पर तो संभवत मध्यप्रदेश शासन ने एक अच्छी सी संगोष्ठी का भी आयोजन नहीं कर पाया। 


जनजाति गौरव के नाम पर जिस पेशा कानून को लागू करके अपनी पीठ शासन थपथपा रहा है आप देख लीजिएगा उसे भी सही तरीके से क्रियान्वित नहीं किया जा सकेगा। जिस दिन आप गौरव दिवस मनाते हैं उसके दूसरे दिन ही धरती और जल जंगल की तो बात छोड़िए घर पर ट्रैक्टर में रखी बालू पर आपकी पुलिस जाकर आदिवासी से पैसा ऐंठ लाती है।


वास्तव में जनजाति गौरव दिवस जबरिया फिलगुड कराने का इवेंट ही सिद्ध हुआ है। इस तरह के तमाशे बंद कर शासन कम से कम अच्छी स्वशासन की अच्छी प्रशासनिक व्यवस्था कायम कर दे। यही बहुत है। आदिवासी समुदाय का इससे बड़ा भला होगा। लगेगा कि सचमुच हमारे शासन प्रशासन को जनजाति समुदाय पर गौरव है। आपकी व्यवस्था धरती आबा बिरसा मुंडा का मान रखती है। बी


                                विवेक पवार

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