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Saturday, November 19, 2022

शीत - घात से बचाव से लिए क्या करें और क्या न करें....बचाव के लिए जानकारी

 


 

मण्डला 19 नवम्बर 2022

                मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आमजनों को शीत से बचने एडवाईजरी जारी की है। जारी एडवाईजरी में उन्होंने कहा है कि वर्तमान में शीत ऋतु में वातावरण का तापमान अत्यधिक कम होने व शीतलहर के कारण मानव स्वास्थ्य पर अनेक विपरीत प्रभाव जैसे- सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़ों में संक्रमण, हाईपोथर्मिया, अस्थमा, एलर्जी होने की आशंका बढ़ सकती है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है।

 

शीत से बचने के लिए क्या करें

               

                शीत से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें, घर में ठंडी हवा प्रवेश न हो इसलिए दरवाजे व खिड़की बंद रखें, सोते समय रजाई, कम्बल का उपयोग करें। फ्लू या बुखार, नाक बंद होने की स्थिति में घर से बाहर न निकलें, घर में रहें, आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सक से परामर्श करें, गरम एवं ताजा भोजन, गर्म पानी का उपयोग करें, वृद्ध, बच्चे एवं गर्भवती माताओं का विशेष ध्यान रखें, लकड़ी का अलाव, सिगड़ी एवं रूम हीटर का उपयोग करें। शीतघात के दौरान यथासंभव घर के अंदर रहें और ठण्डी हवा बारिश बर्फ से संपर्क रोकने के लिये अनिवार्य होने पर ही यात्रा करें, शरीर को सूखा रखें, शरीर की गरमाहट बनाये रखने हेतु अपने सिर, गर्दन, कान, नाक को पर्याप्त रूप से ढकें, सूती एवं गर्म ऊनी कपड़े पहनें, शरीर की गर्मी बचाये रखने के लिए टोपी, मफलर तथा आवरण युक्त एवं जलरोधी जूतों का उपयोग करें, फेफड़ों में संक्रमण से बचाव हेतु मुंह एवं नाक ढक्कर रखें। स्वास्थ्यवर्धक गरम भोजन का सेवन करें, शीत प्रकृति के भोजन से दूर रहें। गरम तरल पदार्थ नियमित रूप से पिएं, इससे ठंड से लड़ने के लिए शरीर की गर्मी बनी रहे। रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता में वृद्धि के लिए विटामिन सी से भरपूर ताजे फल व सब्जियाँ खाएं। तेल, क्रीम, जेली या बॉडी क्रीम से नियमित रूप से अपनी त्वचा का मसाज करें। बुजुर्ग, नवजात शिशु तथा बच्चों का यथासम्भव अधिक ध्यान रखें क्योकि उन पर शीतऋतु का प्रभाव अधिक होता है। बच्चों व बुजुर्गों को टोपी मफलर, स्वेटर व गर्म कपड़े पहनाकर गर्म रखें। कमरे को गर्म करने के लिए कोयले का प्रयोग न करें, अगर कोयले व लकड़ी जलाना आवश्यक है तो रोशनदान का प्रयोग करें, बंद कमरे में कोयले को जलाना खतरनाक हो सकता है क्योकि यह कार्बन मोनोऑक्साईड जैसी जहरीली गैस पैदा करती है जो किसी की जान भी ले सकती है। अधिक समय तक ठण्ड में न रहें, शराब न पिएं, यह शरीर की गरमाहट को कम करता है। यह खून की नसों को पतला कर देता है, विशेषकर हाथों से जिसमें हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ सकता है, शीत में छतिग्रस्त हिस्सों की मालिश न करें, अचेतन अवस्था में किसी व्यक्ति को तरल पदार्थ न दें, शीत लहर, हाइपोथर्मिया से प्रभावित व्यक्ति को तत्काल चिकित्सीय सहायता प्रदान कराएं।

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